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नोएडा में हाल ही में हुए फैक्ट्री विरोध और हिंसक प्रदर्शन के मामले में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस जांच में रूपेश राय नाम का शख्स इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य आरोपी बनकर सामने आया है. सेक्टर-39 थाने की पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है और उसके मोबाइल फोन से मिले व्हाट्सएप चैट्स ने कई अहम राज खोल दिए हैं.
व्हाट्सएप चैट में लोगों को उकसाया
जांच एजेंसियों के मुताबिक, अब तक की पड़ताल में तीन संगठित समूहों की भूमिका सामने आई है, जिन्होंने प्रदर्शन को हवा देने में अहम भूमिका निभाई है. रूपेश राय को ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ नाम के एक संगठन से जुड़ा बताया जा रहा है. उसके फोन से बरामद चैट्स में वह लोगों को उकसाता हुआ नजर आ रहा है और फैक्ट्रियों में काम बंद कराने के लिए रणनीति बनाते हुए दिखा है.
जबरन कर्मचारियों से रुकवाया काम
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन समूहों के सदस्य फैक्ट्रियों के बाहर पहुंचे और जबरन कर्मचारियों को बाहर निकालकर काम ठप कराया. जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे विरोध की योजना महीने की शुरुआत से ही बनाई जा रही थी. अप्रैल के पहले सप्ताह में इन संगठनों ने कई मजदूर यूनियनों के साथ बैठकें भी की थीं, जिनमें आगे की रणनीति तय की गई.
कुछ महिला एक्टिविस्ट्स हिरासत में
इस मामले में कुछ महिला एक्टिविस्ट्स को भी नोएडा पुलिस ने हिरासत में लिया है. अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की उम्र ज्यादातर 25 से 30 साल के बीच है और ये लोग सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर भीड़ जुटाने और माहौल भड़काने का काम कर रहे थे.
17 व्हाट्सएप ग्रुप्स से भीड़ जुटाने की कोशिश
पुलिस ने अब तक कम से कम 17 व्हाट्सएप ग्रुप्स की पहचान की है, जिनके डिजिटल ट्रेल की गहन जांच की जा रही है. इन ग्रुप्स के जरिए संदेश प्रसारित कर प्रदर्शन के लिए लोगों को जुटाने की कोशिश की गई थी.
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन गतिविधियों के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हैं. अधिकारियों का कहना है कि मामले में जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.
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