'1987 में तो पैदा ही नहीं हुआ था…' SIR नोटिस से घबराए तेलंगाना के वोटर, पुराने दस्तावेजों की मांग पर उठे सव – India.com

Telangana SIR: तेलंगाना में वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर अब राजनीतिक बहस के साथ आम मतदाताओं की परेशानी भी सामने आने लगी है. हैदराबाद में SIR की सुनवाई के दौरान कुछ लोगों ने शिकायत की कि उनसे कई दशक पुराने दस्तावेज मांगे जा रहे हैं. कई मतदाताओं का सवाल है कि जब उनके पास आधार, पेन और वोटर ID जैसे सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं, तो उनसे इतने पुराने रिकॉर्ड क्यों मांगे जा रहे हैं.

मामला अब राज्य की राजनीति तक पहुंच गया है. मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने चुनाव आयोग से दावे और आपत्तियों के लिए अतिरिक्त समय मांगा है. उनका कहना है कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से वोटर लिस्ट से हटना नहीं चाहिए.
रेजिडेंट में SIR नोटिस पाने वाले साई कन्मुदराज ने सुनवाई के दौरान अपनी परेशानी बताई. उनका कहना था कि 1987 में उनका एक दस्तावेज मांगा गया था, जबकि उस समय उनका जन्म ही नहीं हुआ था. उन्होंने सवाल उठाया क अगर उस समय उनके लिए ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं बना था, तो अब वो इसे कहां से लेकर आएं.

कनमुदराज का कहना है कि उनके पास मौजूद आधार और पैन कार्ड सरकारी दस्तावेज हैं, लेकिन कथित तौर पर उनसे संबंधित सत्यापन को मंजूरी नहीं दी गई है. उन्होंने कहा कि वोटर आईडी, बैंक पासबुक या अन्य सरकारी रिकॉर्ड को भी स्वीकार किया जाना चाहिए, ताकि आम लोगों को दशकों पुराने कागजात तलाशने में परेशानी न हो.
एक अन्य महिला ने भी SIR सुनवाई में इसी तरह की परेशानी बताई. उनका कहना था कि वह लंबे समय से उसी मतदान के लिए जगह पर मतदान करती रही हैं, लेकिन अब उनसे पहचान और पते से जुड़े अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा रहे हैं. महिला के मुताबिक उन्होंने अपना आधार और वोटर ID जमा किया, लेकिन इसके बावजूद उनसे अन्य प्रमाण मांगे गए. उनके पिता का निधन हो चुका है और पुराने पते से जुड़ा रिकॉर्ड साबित करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है.

उन्होंने ये भी बताया कि उनके पास कक्षा 10 का सर्टिफिकेट है, लेकिन उसमें पोटोग्राफ नहीं है. ऐसे में वो ये समझ नहीं पा रही थीं कि सत्यापन के लिए आखिर कौन-सा दस्तावेज पर्याप्त माना जाएगा.
SIR से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि नोटिस और सुनवाई प्रक्रिया का हिस्सा हैं. प्रभारी सहायक नगर आयुक्त एवं एआरओ जी वसंत कुमार के मुताबिक एक दिन में करीब 360 नोटिस जारी किये गए थे. अधिकारियों के अनुसार ASDD Entries, No-Mapping Cases और विभिन्न विसंगतियों की जांच की जा रही है. सुनवाई के दौरान संबंधित मामलों की संख्या करीब 3,760 से 3,786 के बीच बताई गई, जबकि 2,856 विसंगतियों भी सामने आईं.नोटिस पाने वाले मतदाताओं को इलेक्शन कमिशन की तरफ से निर्धारित दस्तावेजों के साथ वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जा रहा है.
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर SIR प्रक्रिया के लिए लगभग चार सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा है. उन्होंने विशेष रूप से दावे और आपत्तियां और नोटिस का जवाब देने के लिए अधिकतर समय मांगा जाता है. मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची का मसौदा को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने और खासकर शहरी इलाकों में हेल्पडेस्ट बढ़ाने का भी सुझाव दिया है.
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हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक… तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी … और पढ़ें
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