नीरज कुमार, निज प्रतिनिधि: निर्यात शुल्क में बढ़ोतरी व अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ से मखाना कारोबार प्रभावित हुआ है। स्थानीय बाजार में भी भाव कम होने से मखाना का कारोबार हांफ रहा है। मुख्य डाकघर स्थित डाक निर्यात केंद्र से जून माह तक पांच देशों को कारोबारी मखाना भेजते थे। हलांकि डाक निर्यात केंद्र से एक बार में अधिकतम 10 किलो मखाना सहित अन्य सामान भेजा जा सकता है। पिछले माह निर्यात शुल्क में 20 रूपया प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है। हलांकि यह बढ़ोतरी सिर्फ डाक विभाग द्वारा संचालित डाक निर्यात केंद्र में ही हुई है। अन्य स्थानों से मखाना दूसरे देशों में भेजने के लिए प्रति किलो 30 से 35 रूपये प्रति किलो अधिक खर्च करना पड़ रहा है। अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाए जाने के कारण वहां मखाना का दाम आसमान छू रहा है। इसकारण अमेरिका में भारतीय मखाना की मांग घटी है। जून माह तक अमेरिका, ओमान, मलेशिया सहित मध्य पूर्व के देशों तक मखाना पहुंच रहा था।
वर्तमान में आस्ट्रेलिया व जापान को ही मखाना की आपूर्ति की जा रही है। हालांकि इन दोनों देशों में मखाना भेजने की रफ्तार में कमी नहीं आई है लेकिन वैश्विक बाजार में भारतीय मखाना की धमक जरूर कम हुई है। एक तो अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण सप्लाई चेन बाधित होने से भी विदेशों तक मखाना निर्यात करने में परेशानी हुई। रही सही कसर निर्यात शुल्क वृद्धि व अमेरिकी टैरिफ ने पूरी कर दी। मखाना से बने खाद्य उत्पादों की मांग विदेशों में अधिक है। विदेशी बाजार तक मखाना पहुंचाकर कारोबारी अधिक मुनाफा कमाते थे। इसका लाभ मखाना किसानों को भी होता था। विदेशी बाजार तक मखाना का पर्याप्त निर्यात नहीं हो पाने के कारण स्थानीय स्तर पर भी इसका भाव गिरा है। हालत यह है कि मखाना का गुड़ी 17 हजार से उपर नहीं पहुंच पाया है। बाहरी कारोबारी भी मखाना की खरीद के लिए नहीं पहुंच रहे हैं। भाव कम होने से मखाना किसान खेतों में तैयार मखाना को निकालने से भी हिचक रहे हैं। मखाना किसान प्रताप नारायाण, भूपेंद्र मंडल आदि ने बताया कि बाजार भाव सामान्य होने की उम्मीद में किसान हैं।
850 रूपया प्रति किलो से अधिक मखाना का भाव नहीं मिल रहा है। उच्च क्वालिटी का लावा भी अधिकतम हजार रूपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। मखाना किसानों ने बताया कि जुलाई और अगस्त माह में अब तक कम बारिश होने के कारण मखाना किसानों को सिंचाई में अतिरिक्त खर्च का वहन करना पड़ा। मखाना के गिरते बाजार भाव से लागत मूल्य भी निकाल पाना इस स्थिति में संभव नहीं है। उधर निर्यात शुल्क बढ़ने व अमेरिकी टैरिफ के कारण मखाना कारोबारी और थोक विक्रेता भी परेशान हैं। डेढ़ माह पूर्व तक 13500 रूपये तक में विदेशों तक मखाना पहुंच जाता था। निर्यात शुल्क बढ़ने से अब 1500 रूपये तक का खर्च आ रहा है।
डाक निर्यात केंद्र के मार्केटिंग एक्जक्यूटिव आयुष कुमार ने बताया कि निर्यात शुल्क में प्रति किलो 20 रूपये की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि डाक विभाग के अतिरिक्त अन्य स्थानों से मखाना बाहर भेजने की तुलना में कम है। वर्तमान में जापान और आस्ट्रेलिया को ही मखाना भेजा जा रहा है। टैरिफ के कारण कारोबारी अमेरिका मखाना नहीं भेज रहे हैं। ओमान, मलेशिया भी पिछले एक माह से मखाना नहीं भेजा जा रहा है। ओमान में सबौर वन वेरायटी के मखाना की अच्छी डिमांड है।
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