कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति के खिलाफ 2018 में दर्ज धमकी का मामला खारिज कर दिया, जिसकी मृत्यु 2010 में ही हो चुकी थी।
कलकत्ता हाईकोर्ट।
मृत व्यक्ति पर 2018 में धमकी देने का आरोप।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने मामला पूरी तरह खारिज किया।
संपत्ति विवाद को आपराधिक रंग देने की कोशिश।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। जिस व्यक्ति की आठ साल पहले ही मौत हो चुकी थी, उसके खिलाफ 2018 में धमकी देने का आरोप। यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट के सामने आया तो अदालत भी हैरान रह गई।
कोर्ट ने पाया कि जिस चिकित्सक तापस कुमार बंद्योपाध्याय पर 2018 में धमकी देने का आरोप लगाया गया, उनकी मृत्यु 22 सितंबर 2010 को ही हो चुकी थी। इस आधार पर न्यायमूर्ति अजय कुमार गुप्ता ने सह-आरोपित चिकित्सक गौर दास के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला भी खारिज कर दिया।
मामला कोलकाता के बालीगंज की एक संपत्ति से जुड़ा है। वर्ष 2010 में इस संपत्ति को लेकर एक ट्रस्ट डीड तैयार की गई थी। शिकायतकर्ता महिला का आरोप था कि धोखाधड़ी के जरिए दस्तावेज तैयार कर संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश की गई।
इसी आरोप को लेकर उन्होंने 2018 में आपराधिक मामला दर्ज कराया। महिला ने आरोप लगाया था कि सात मई 2018 को गौर दास और तापस कुमार बंद्योपाध्याय ने उनके मामा को धमकी दी थी। लेकिन हाई कोर्ट के समक्ष दस्तावेजों की जांच में सामने आया कि तापस कुमार की मृत्यु 22 सितंबर 2010 को ही हो चुकी थी।
यानी जिस घटना के समय धमकी देने का आरोप लगाया गया, उससे करीब आठ वर्ष पहले ही उनकी मृत्यु हो गई थी। न्यायमूर्ति अजय कुमार गुप्ता ने टिप्पणी की कि 2018 में ऐसे व्यक्ति पर धमकी देने का आरोप लगाया गया, जिसकी करीब आठ वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी थी। इसलिए यह आरोप किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने यह भी पाया कि शिकायतकर्ता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना बयान दर्ज कराते समय भी तापस कुमार की मृत्यु का उल्लेख नहीं किया था।
हाई कोर्ट ने यह भी देखा कि संबंधित संपत्ति को लेकर दीवानी अदालत में पहले से विवाद चल रहा था। अदालत के अनुसार, मामले की मूल प्रकृति संपत्ति से जुड़ा दीवानी विवाद है। ऐसे विवाद को आपराधिक मुकदमे के जरिए दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने की कोशिश की गई। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने गौर दास के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को भी खारिज कर दिया।