45 डिग्री की गर्मी में 'फरिश्ता' बन जाते हैं गोपाल दादा… लोगों को पिलाते हैं पानी, 30 साल से जिंदा रखे हैं 'प्याऊ' की परंपरा – AajTak

Feedback
दोपहर का वक्त… जयपुर की सड़कें तप रही हैं. हवा ऐसी जैसे किसी ने आग के दरवाजे खोल दिए हों. लोग सिर पर गमछा रखे जल्दी-जल्दी अपने ठिकानों की तरफ भाग रहे हैं. हवामहल के आसपास पर्यटक छांव तलाश रहे हैं, डिलीवरी बॉय पसीने से भीगे हुए हैं, ऑटो ड्राइवर बार-बार पानी की बोतल टटोल रहे हैं.
लेकिन इसी झुलसाती गर्मी के बीच सड़क किनारे एक बूढ़ा आदमी रोज चुपचाप बैठ जाता है. न कोई दुकान… न कोई बोर्ड… न कोई दान पेटी… बस एक बड़ा-सा मटका, कुछ गिलास और चेहरे पर सुकून भरी मुस्कान. ये कहानी है 78 साल के गोपाल दादा की. जयपुर में लोग इन्हें अब नाम से कम और ‘प्याऊ वाले दादा’ के नाम से ज्यादा जानते हैं.
jaipur gopal dada free water service hawa mahal humanity story pyaau tradition
पिछले करीब 30 साल से गोपाल दादा हर गर्मी में हवामहल के पास राहगीरों की प्यास बुझा रहे हैं. सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक वह सड़क किनारे बैठते हैं और आने-जाने वाले हर इंसान को अपने हाथों से ठंडा पानी पिलाते हैं.
कोई ऑटो ड्राइवर रुकता है… कोई मजदूर… कोई पर्यटक… कोई डिलीवरी बॉय… दादा किसी से कुछ नहीं पूछते. बस मुस्कुराकर गिलास आगे बढ़ा देते हैं.
आज के दौर में जहां लोग पानी तक खरीदकर पीते हैं, वहां गोपाल दादा हर दिन करीब 400 लीटर पानी लोगों को मुफ्त पिलाते हैं. उनसे सवाल किया तो उन्होंने बेहद सादगी से कहा- प्यास सबको लगती है… पानी जरूर पिलाना चाहिए. शायद यही एक लाइन गोपाल दादा की पूरी जिंदगी की कहानी है.
यह भी पढ़ें: पुलिसवाले ने पेश की इंसानियत की मिसाल, अस्पताल में ले जाकर बुजुर्ग महिला का कराया इलाज
दरअसल, यह सिर्फ पानी पिलाने की कहानी नहीं है. यह उस परंपरा की कहानी है, जो धीरे-धीरे शहरों से गायब होती जा रही है- ‘प्याऊ’ की परंपरा.’ एक समय था जब राजस्थान और उत्तर भारत के शहरों में जगह-जगह प्याऊ हुआ करती थीं. राहगीरों के लिए मिट्टी के घड़ों में ठंडा पानी रखा जाता था. गर्मियों में लोग वहां रुकते, पानी पीते और कुछ पल राहत महसूस करते.
jaipur gopal dada free water service hawa mahal humanity story pyaau tradition
लेकिन आधुनिक शहरों की भागती जिंदगी में अब ये प्याऊ लगभग गायब हो चुकी हैं. गोपाल दादा शायद उन्हीं आखिरी लोगों में हैं, जो इस परंपरा को अब भी जिंदा रखे हुए हैं.
दादा बताते हैं कि इस सेवा की शुरुआत उन्होंने नहीं, बल्कि उनके पिता ने की थी. बचपन में वह अपने पिता को लोगों को पानी पिलाते देखते थे. धीरे-धीरे यही आदत उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गई.
वक्त बदला… शहर बदला… लोग बदल गए… लेकिन गोपाल दादा नहीं बदले. अब उम्र 78 साल हो चुकी है. तेज धूप में घंटों बैठना आसान नहीं होता. लेकिन दादा रोज आते हैं. क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर उनकी वजह से किसी राहगीर को थोड़ी राहत मिल जाए, तो वही सबसे बड़ी कमाई है. दिलचस्प बात यह है कि दादा इस काम के बदले कुछ नहीं चाहते. न पहचान… न पैसा.
यह भी पढ़ें: फोटोग्राफर ने पेश की इंसानियत की मिसाल, कैमरा बेचकर कराया अनाथ बच्ची का इलाज
सोशल मीडिया के दौर में जहां लोग छोटी-सी मदद का वीडियो बनाकर इंटरनेट पर डाल देते हैं, वहीं गोपाल दादा चुपचाप अपना काम करते रहते हैं. कई लोग उनके पास रुकते हैं, हाथ जोड़ते हैं, धन्यवाद कहते हैं. लेकिन दादा बस मुस्कुरा देते हैं. 
कई बार पर्यटक भी रुककर उनसे बात करते हैं. कुछ लोग उनकी तस्वीरें लेते हैं. कुछ उनके साथ सेल्फी भी खिंचवाते हैं. लेकिन दादा के लिए ये सब मायने नहीं रखता. उनके लिए सबसे बड़ी खुशी तब होती है, जब कोई प्यासा इंसान पानी पीकर राहत की सांस लेता है.
गर्मियों में जब तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच जाता है, तब एक गिलास ठंडा पानी किसी राहत से कम नहीं होता. जयपुर की तपती गर्मी में गोपाल दादा सिर्फ पानी नहीं बांटते… वो लोगों को यह एहसास भी दिलाते हैं कि दुनिया में अब भी अच्छाई बाकी है.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News