चंडीगढ़ प्रशासन ने नगर निगम (MC) द्वारा भेजे गए संशोधित पेट एंड कम्युनिटी डॉग बायलॉज को मंजूरी दे दी है। मई 2025 में निगम ने यह मसौदा जनता से आपत्तियां और सुझाव प्राप्त करने तथा जनरल हाउस की मंजूरी के बाद प्रशासन को भेजा था। इन बायलॉज का उद्देश्य सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करना और पालतू व आवारा कुत्तों से जुड़ी जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना है।
ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, नगर निगम ने छह आक्रामक मानी जाने वाली कुत्तों की नस्लों पर प्रतिबंध लगाया है। इनमें अमेरिकन बुलडॉग, अमेरिकन पिटबुल, बुल टेरियर, केन कोर्सो, डोगो अर्जेंटिनो और रॉटवीलर शामिल हैं। हालांकि, यह प्रतिबंध पूर्व प्रभाव से लागू नहीं होगा- यानी जिन लोगों ने इन नस्लों को पहले से निगम में पंजीकृत कराया है, वे इससे प्रभावित नहीं होंगे।
नगर निगम ने बायलॉज के उल्लंघन पर विभिन्न मामलों में 500 रुपये तक का जुर्माना तय किया है। अगर किसी कुत्ते को सार्वजनिक स्थल पर शौच करते हुए पाया गया, तो मालिक को 10,000 रुपये का जुर्माना देना होगा। निगम ने स्पष्ट किया है कि कुत्तों द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर शौच करना ठोस अपशिष्ट प्रबंधन बायलॉज के तहत लिटरिंग (कूड़ा फैलाना) माना जाएगा और उसी के अनुसार दंडित किया जाएगा।
पहली बार, नगर निगम ने निर्णय लिया है कि डॉग बायलॉज से संबंधित जुर्माने की राशि पानी और संपत्ति कर के बिलों में जोड़ी जाएगी, ताकि वसूली सुनिश्चित की जा सके।
नगर निगम रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों (RWAs) के साथ मिलकर आवारा कुत्तों के लिए नामित फीडिंग जोन निर्धारित करेगा। इन स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखना अनिवार्य होगा। यदि किसी स्थान पर कूड़ा या गंदगी पाई गई, तो संबंधित व्यक्ति पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
अगर किसी मकान से कुत्तों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायत मिलती है, तो निगम की टीम मौके पर जाकर जांच करेगी, साक्ष्य दर्ज करेगी और कुत्तों को जब्त कर लेगी। संबंधित मालिक का पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा और पशु क्रूरता अधिनियम के तहत अदालत में कार्यवाही शुरू की जाएगी।
बायलॉज के अनुसार, हर कुत्ते का चार महीने की आयु पूरी होते ही नगर निगम कार्यालय में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। पालतू कुत्ते से किसी को चोट या नुकसान पहुंचने की स्थिति में संपूर्ण जिम्मेदारी मालिक की होगी, नगर निगम की नहीं।
निगम ने मकान के आकार के आधार पर पालतू कुत्तों की अधिकतम संख्या भी तय की है-
बायलॉज में सुप्रीम कोर्ट के अगस्त माह में दिए गए आवारा कुत्ता प्रबंधन संबंधी निर्देशों को भी शामिल किया गया है, ताकि पशु कल्याण और नागरिक सुरक्षा दोनों के बीच संतुलन बनाया जा सके। इन नए बायलॉजों के लागू होने के बाद, चंडीगढ़ प्रशासन उम्मीद कर रहा है कि इससे न केवल पालतू पशु पालन में जिम्मेदारी बढ़ेगी, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता और सुरक्षा में भी सुधार होगा।
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