मुजफ्फरनगर में खतौली के श्री कुन्द-कुन्द जैन स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिंदी विभाग ने शोध के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। एम.ए. अंतिम वर्ष के छह छात्र-छात्राओं के छह शोध-पत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हुए हैं।
माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय सहारनपुर से संबद्ध महाविद्यालयों में यह पहला अवसर बताया जा रहा है, जब किसी एक विभाग के इतने शोध-पत्र एक ही सत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हुए हों।
हिंदी विभाग के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न साहित्यिक एवं सामाजिक विषयों पर शोध कर यह उपलब्धि हासिल की। इनमें रितिक का शोध-पत्र ‘महादेवी वर्मा के काव्य में नारी-वेदना की अभिव्यक्ति’, अक्षिता द्विवेदी का ‘राम की शक्ति-पूजा में राम का मानवत्व’ और दीपाली तोमर का ‘हिंदी पत्रकारिता और समाचारबोध’ शामिल हैं।
इसी क्रम में रविना का शोध-पत्र ‘निराला के काव्य में प्रगतिवादी चेतना’, मोनिका पाल का ‘अज्ञेय की काव्य संवेदना’ तथा रितिका चौधरी का ‘राष्ट्रीय आंदोलन में भारतेन्दु हरिश्चंद्र की भूमिका’ विषय पर प्रकाशित हुआ।
शैक्षिक गुणवत्ता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि
ये सभी शोध-पत्र इंटरनेशनल जर्नल ऑफ हिंदी रिसर्च और अंतरराष्ट्रीय शोध समीक्षा एवं मूल्यांकन जैसी प्रतिष्ठित, यूजीसी सूचीबद्ध, रिफर्ड एवं पीअर रिव्यूड अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। महाविद्यालय प्रशासन ने इसे नवाचार एवं शैक्षिक गुणवत्ता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
हिंदी विभाग को मिली बधाई
इन शोध-पत्रों का प्रकाशन हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष कुमार जैन, डॉ. नेमचंद जैन एवं डॉ. संजीव कुमार के निर्देशन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के सचिव श्री मुकेश कुमार जैन एवं प्राचार्या डॉ. नीतू वशिष्ठ ने सभी छात्र-छात्राओं और हिंदी विभाग को बधाई दी तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
महाविद्यालय परिवार ने दी शुभकामनाएं
महाविद्यालय परिवार के अन्य सदस्यों, जिनमें श्री जितेंद्र सिंह, डॉ. कमल किशोर, डॉ. अरविंद, डॉ. नीरजा गुप्ता, डॉ. सपना जैन, डॉ. राजीव कौशिक, डॉ. दीप्ति जैन, डॉ. अर्चना, डॉ. विपिन बंसल, डॉ. शिवानी चौधरी, डॉ. पूजा पुण्डीर, श्री आशीष जैन, श्री मुकुल जैन, श्री पारुल जैन, नीलम शर्मा, श्री विजेंद्र कुमार एवं श्री रजत गुप्ता शामिल हैं, ने भी शुभकामनाएं व्यक्त कीं।
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