65 देशों के 447 खरीदार भदोही पहुंचे… लेकिन कालीनों में उन्हें चमक-दमक नहीं, सस्ता वाला क्यों पसंद आया? – Aaj Tak

Feedback
भदोही में चार दिन तक कालीनों का बाजार सजा रहा. देश के अलग-अलग हिस्सों से कारोबारी पहुंचे. विदेशों से खरीदार आए. कालीनों के डिजाइन देखे गए. कीमतों पर बात हुई. ऑर्डर की बातचीत चली और कई कारोबारियों को उम्मीद बंधी कि आने वाले दिनों में उनके पास बड़े ऑर्डर पहुंच सकते हैं. लेकिन इस बार एक्सपो में एक चीज थोड़ी अलग थी. विदेशी खरीदारों की पसंद. आयोजकों के मुताबिक, इस बार खरीदारों ने महंगे और बेहद लग्जरी कालीनों के मुकाबले सस्ते कालीनों में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई. यानी ऐसा कालीन जो देखने में अच्छा हो, जेब पर बहुत भारी न पड़े और जरूरत पड़ने पर बदला भी जा सके.
इसे समझने के लिए दुनिया की मौजूदा आर्थिक हालत देखिए. महंगाई बढ़ रही है. ईंधन की कीमतों का असर कारोबार पर पड़ रहा है. कई देशों में लोग खर्च को लेकर पहले से ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं. ऐसे में जब कोई घर सजाने के लिए कालीन खरीदता है तो संभव है कि वह पहले की तरह महंगे और प्रीमियम प्रोडक्ट के बजाय बजट वाला विकल्प चुने. यही ट्रेंड भदोही के एक्सपो में भी नजर आया.
यहां देखें Video…
इस चार दिन तक चले इंडिया कारपेट एक्सपो में 65 देशों के 447 विदेशी खरीदार और उनके प्रतिनिधि पहुंचे. इनमें 216 विदेशी खरीदार ऐसे थे, जिन्होंने खुद एक्सपो में पहुंचकर कालीनों और दूसरे प्रोडक्ट्स को देखा. अब सवाल है कि भदोही में ऐसा क्या खास था कि इतने देशों के खरीदार यहां पहुंचे.
यह भी पढ़ें: एक कालीन, बच्चन परिवार की तीन पीढ़ियां… हरिवंश राय से अमिताभ और अभिषेक तक, 6 महीने में तैयार हुई ये अनोखी तस्वीर
दरअसल, एक्सपो में देश के अलग-अलग हिस्सों से 223 कालीन निर्यातकों ने अपने स्टॉल लगाए थे. कश्मीर, जयपुर, बीकानेर, आगरा, कोलकाता, पानीपत, वाराणसी, मिर्जापुर और भदोही समेत कई जगहों के कारोबारी यहां अपने प्रोडक्ट लेकर पहुंचे. किसी ने पारंपरिक डिजाइन दिखाए तो किसी ने नए जमाने की पसंद को ध्यान में रखकर डिजाइन तैयार किए. और खरीदारों ने इन्हें देखा भी, पसंद भी किया.
कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन मुकेश गोम्बर के मुताबिक, एक्सपो में मिली इंक्वायरी से भविष्य में 500 करोड़ रुपये से ज्यादा के निर्यात कारोबार की उम्मीद है. यानी एक्सपो खत्म हो गया है, लेकिन कारोबार की कहानी अभी खत्म नहीं हुई. कई निर्यातकों को ऑर्डर मिले हैं. वहीं कई कारोबारियों को ऐसी इंक्वायरी मिली हैं, जिनके आने वाले समय में ऑर्डर में बदलने की उम्मीद है.
bhadohi carpet Expo 447 foreign buyers 65 countries 500 crore export
और यही वजह है कि कारोबारी इस एक्सपो को सिर्फ चार दिन का मेला नहीं मान रहे. उनके लिए असली नतीजा आने वाले महीनों में दिखाई देगा. एक रूसी खरीदार ने भी एक्सपो की तारीफ की. उसका कहना था कि ब्रिक्स के प्रचार-प्रसार से उनके लिए इस आयोजन में शामिल होना आसान हुआ.
लेकिन इस एक्सपो की एक और कहानी है. वो कहानी उन महिलाओं की, जिन्होंने पारंपरिक कारोबार वाले परिवार से आए बिना कालीन की दुनिया में अपनी जगह बनाई. भदोही की नेहा ने MBA किया. फिर कारपेट डिजाइन का कोर्स किया. इसके बाद उन्होंने खुद कालीन डिजाइन करना शुरू किया.
bhadohi carpet Expo 447 foreign buyers 65 countries 500 crore export
डिजाइन तैयार होता है, उसका प्रोडक्शन कराया जाता है और फिर उसे एक्सपोर्ट किया जाता है. नेहा इस कारोबार में करीब छह साल से हैं. दिलचस्प बात ये है कि उनके परिवार का पहले से कालीन कारोबार से कोई संबंध नहीं था. उनके पति डॉक्टर हैं, लेकिन नेहा ने अपनी अलग राह चुनी.
यह भी पढ़ें: मखमली सोफे, ईरानी कालीन और सागवान की लकड़ी से सजा है जहीर-सागरिका का आशियाना, नन्हे फतेहसिंह के लिए घर में हैं खास इंतजाम
अब दूसरी कहानी श्रद्धा मिश्रा की. 28 साल की श्रद्धा ने मुंबई से साइकोलॉजी की पढ़ाई की. इसके बाद कॉरपोरेट सेक्टर में HR की नौकरी की. लेकिन मन कहीं और था. करीब एक साल पहले उन्होंने कालीन कारोबार में कदम रखा. और यहां उन्होंने अपनी पढ़ाई को भी काम में लगाना शुरू किया.
bhadohi carpet Expo 447 foreign buyers 65 countries 500 crore export
श्रद्धा के मुताबिक, लोगों की पसंद और व्यवहार को समझने वाली उनकी साइकोलॉजी की पढ़ाई कालीन डिजाइन तैयार करने में भी काम आती है. यानी भदोही के इस एक्सपो में सिर्फ कालीन नहीं बिक रहे थे. यहां बदलते बाजार की कहानी भी दिखाई दे रही थी.
एक तरफ दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता है. महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतें कारोबार को प्रभावित कर रही हैं. दूसरी तरफ विदेशी खरीदार भारत के कालीनों की तरफ अब भी देख रहे हैं. बस उनकी पसंद बदल रही है. पहले जहां महंगे और लग्जरी प्रोडक्ट ज्यादा आकर्षित करते थे, वहीं अब सस्ते और आसानी से इस्तेमाल किए जा सकने वाले कालीनों की मांग बढ़ती दिख रही है. 
तो क्या इसका मतलब भारतीय कालीन कारोबार के लिए मुश्किल आने वाली है? जरूरी नहीं. कारोबारियों का मानना है कि विदेशी खरीदारों की बड़ी संख्या बताती है कि मुश्किल आर्थिक हालात के बावजूद भारतीय कालीनों की पकड़ मजबूत है. यानी दुनिया की जेब भले थोड़ी तंग हो गई हो, लेकिन भदोही के कालीनों के लिए दुनिया का दरवाजा अभी खुला है. अब देखना ये है कि एक्सपो में हुई बातचीत में से कितने ऑर्डर बनते हैं और 500 करोड़ रुपये का दावा आखिर कितने बड़े कारोबार में बदलता है.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News