हिंदी को राष्ट्रभाषा व उर्दू को द्वितीय राष्ट्र भाषा घोषित की जाए : शमीम – Dainik Bhaskar

भास्कर न्यूज|चकिया
हिंदी उर्दू अकादमी नई दिल्ली के तत्वाधान में इमाद पट्टी गांव में जिला स्तरीय संगोष्ठी एवं काव्यपाठ का आयोजन किया गया। हिंदी उर्दू अकादमी के अध्यक्ष कायदे उर्दू शमीम अहमद ने इसकी अध्यक्षता की जबकि संचालन गुलाम रब्बानी मिस्बाही ने किया। इस दौरान शमीम अहमद ने कहा कि उर्दू और हिंदी हमारे देश की भाषाएं हैं। भाषा का कोई धर्म नहीं होता। अंग्रेजों ने इन भाषाओं को धर्म की आड़ में हमारे बीच धार्मिक नफरत फैलाने की साजिश रची है जो बेहद शर्मनाक है। इसलिए हमारा संगठन इन भाषाओं पर लगे धार्मिक लेबल को मिटाने के लिए आंदोलन चलाएगा। चंपारण की धरती से हम भारत सरकार से मांग करते हैं कि हिंदी को राष्ट्रभाषा और उर्दू को द्वितीय राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया जाए। हमारा संगठन हर इलाके में एक पुस्तकालय स्थापित करेगा और सभी भाषाओं की किताबें उपलब्ध कराएगा ताकि किताबें पढ़ने का स्वाद और जुनून बरकरार रह सके। मुहम्मद दलशाक, शुजा गांधी, डॉ वलीउल्लाह कादरी, प्रोफेसर कलीम अहमद हैदर इमाम अंसारी, मौलाना आदिल हुसैन मिस्बाही ने भी संबोधित किया व कहा कि उर्दू भाषा और साहित्य को बढ़ावा देने सहित अन्य बात कही। वहीं काव्य पाठ की अध्यक्षता उज़ैर अंजुम ने की और संचालन का दायित्व जिला एंकर आदित्य मानस ने निभाया। मौके पर जफर हबीबी, रूह-उल-हक हमदम, समीउल्लाह चम्पारणी, सईद अहमद कादरी, डॉ. ताहिरुद्दीन ताहिर, वारिस इस्लाम पुरी, डॉ. सबा अख्तर शोख, हिदायतुल्लाह अहसन चम्पारणी, आकिब चिश्ती, मेहबूब शबनम मेहस्वी, मुजीब-उर-रहमान मुजीब ने अपनी शायरी पेश की। मौके पर मौलाना मंजर हुसैन रिजवी, मौलाना अली रजा, मुहम्मद जवाद आलम, डॉ. अब्दुल रहमान, मेराज अहमद, हाफिज अब्दुल मुबीन आदि भी थे।
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