Karnataka News: कर्नाटक में सियासी तकरार छिड़ी है, सीएम की कुर्सी को लेकर छिड़े बवाल के बीच सिद्धारमैया ने डीके शिवकुमार को ‘ब्रेकफास्ट’ पर बुलाया है. यहां पर दोनों नेता मीटिंग के जरिए कुछ बड़ा डिस्कस करने वाले है.
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CM Siddaramaiah: बात सीएम हाउस से निकलकर दिल्ली पहुंच चुकी है. कुर्सी की लड़ाई उस मोड़ पर आ गई है कि अब विपक्षी भी खिल्ली उड़ाने लगे हैं. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि जल्द ही कर्नाटक में कुछ बड़ा होने वाला है. इसी बीच कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को ब्रेकफास्ट पर मीटिंग के लिए बुलाया है. इस मीटिंग में सबकुछ डिस्कस करने की बात है क्योंकि कांग्रेस हाईकमान ने दोनों सीनियर नेताओं से राज्य की लीडरशिप से जुड़े चल रहे संकट पर चर्चा करने की रिक्वेस्ट की थी. एक तरफ सिद्धारमैया कुर्सी नहीं छोड़ना चाहते हैं तो दूसरी तरफ डीके शिवकुमार एक वादा कांग्रेस को याद दिला रहे हैं. जानिए आखिर क्या है वो वादा.
डीके शिवकुमार को लंच पर बुलाया
सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार को दिल्ली तलब किया गया है. उधर सीएम ने भी डिप्टी सीएम को ब्रेकफास्ट पर मीटिंग के लिए बुलाया है, उन्होंने ये भी कहा है कि वो आएंगे तो हम सबकुछ डिस्कस करेंगे, ये मीटिंग तब होने जा रही है जब सीएम कुर्सी को लेकर तकरार छिड़ी है. डीके शिवकुमार ने एक वादे का जिक्र करते हुए कहा था कि 2023 में कर्नाटक में पार्टी के सत्ता में आने के बाद कांग्रेस लीडरशिप के द्वारा एक “सीक्रेट डील” हुई थी. उस डील के मुताबिक मुख्यमंत्री को साफ तौर पर ढाई साल बाद अपना पद अपने डिप्टी को सौंपना था. ऐसे में सिद्धारमैया ने 20 नवंबर को ढाई साल पूरा कर चुके हैं. शिवकुमार के सपोर्टर दावा कर रहे हैं कि अब उनके लिए पद छोड़ने का अपना “वादा” निभाने का समय आ गया है.
हाईकमान करेगा फैसला
हालांकि सिद्धारमैया ने इसके बाद एक्स पर लिखा कि कर्नाटक के लोगों द्वारा दिया गया मैंडेट एक पल नहीं है, बल्कि एक जिम्मेदारी है जो पूरे पांच साल तक चलती है. साथ ही कहा कि वह पूरे पांच साल के लिए मुख्यमंत्री रहेंगे. हालांकि शुक्रवार को वो इस बात से पलट गए और कहा कि हाईकमान जो कहेगा, उसे मानेंगे. डीके शिवकुमार ने भी यही कहा था कि जो हाईकमान कहेगा वो वही करेंगे.
पुराने फैसलों का किया जिक्र
उपमुख्यमंत्री ने पार्टी के पहले के नेतृत्व के फैसलों का भी जिक्र करते हुए कहा कि अंदरूनी मामले ऐतिहासिक रूप से हाईकमान के साथ सलाह-मशविरे से सुलझाए गए हैं. उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी 20 साल तक कांग्रेस चीफ रहीं, उन्होंने पावर भी कुर्बान कर दी, अब्दुल कलाम ने उन्हें अगला PM बनने के लिए बुलाया लेकिन उन्होंने मना कर दिया, मनमोहन सिंह का नाम सुझाया जो देश का विकास कर सकते हैं. जब सोनिया गांधी जी ने मुझे कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का प्रेसिडेंट बनाया, तो हमने लोगों से वादा किया था कि हमें युवाओं और महिलाओं पर बहुत भरोसा है, उसी भरोसे के आधार पर, हमने पांच गारंटी स्कीम शुरू कीं, इस तरह, हमने इन सभी प्रोग्राम का ब्लूप्रिंट तैयार किया.
18 मई को क्या हुआ था
साल 2023 में जब कांग्रेस की सरकार बनी तो सीएम की कुर्सी को लेकर बहस छिड़ गई, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार में कौन सीएम बनेगा इसकी चर्चा होने लगी, इस स्थिति में 18 मई को टॉप नेगोशिएटर नई दिल्ली में कांग्रेस प्रेसिडेंट मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर इकट्ठा हुए थे, मीटिंग में सिद्धारमैया और शिवकुमार के साथ खड़गे, केसी वेणुगोपाल, रणदीप सुरजेवाला और शिवकुमार के भाई, MP डीके सुरेश भी शामिल हुए, ताकि वे पावर शेयरिंग के सवाल को सुलझा सकें. ऐसा कहा जाता रहा है कि शिवकुमार ने शुरू में सरकार के पहले 2.5 साल मांगे थे, जिसे सिद्धारमैया ने अपनी सीनियरिटी का हवाला देते हुए मना कर दिया था. इसके बाद हुए समझौते में सिद्धारमैया को शुरुआती आधा समय और शिवकुमार को बाद का समय दिया गया. इस वादे को मीडिया से बात करते हुए डीके शिवकुमार कई बार दोहरा चुके हैं.
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जी न्यूज में न्यूज डेस्क पर बतौर सब एडिटर कार्यरत. देश- विदेश की खबरों को सरल भाषा में लिखते हैं. साहित्य और राजनीति में विशेष दिलचस्पी. यूपी के सुल्तानपुर जिले से ग्रेजुएशन, महात्मा गांधी काशी विद…और पढ़ें
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