Aravalli Hills SC Hearing Live: अरावली केस में अपने ही फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, खनन पर सरकार से मांगी स्पष्ट जानकारी – AajTak

Feedback
Aravalli Hills के संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
Aravallii Case: SC को परिभाषा पर चिंता, हाई पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी बनाने का निर्देश
Aravalli Case Hearingh: 20 नवंबर के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
Aravalli Case: CJI ने 20 नवंबर के आदेश पर उठाए सवाल, स्पष्टीकरण जरूरी बताया
SC ने माइनिंग प्लान पर विशेषज्ञों की भूमिका पर जोर दिया
Aravalli केस पर थोड़ी में SC में सुनवाई शुरू होगी
Importance of Aravalli: नई परिभाषा से थार रेगिस्तान का रास्ता खुलने की चेतावनी
Aravalli Hearing: 90 के दशक से 2025 तक, पहाड़ बचाने की जंग जारी
Aravalli Controversy पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया
Aravalli SC Hearing: 90% पहाड़ियों के खत्म होने के दावे केंद्र ने किया खारिज
Aravalli New Mining लीज पर रोक
Aravalli Hills Hearing Live: ‘पहाड़ी’ की नई परिभाषा पर बढ़ी चिंता
Aravalli Hills SC Hearing: अरावली पर्वतमाला से जुड़े अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है और मौजूदा परिभाषा पर सवाल उठाए हैं. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि वर्तमान परिभाषा से पर्यावरण संरक्षण का दायरा सिमट सकता है.
कोर्ट ने 20 नवंबर के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए कहा कि किसी भी फैसले से पहले निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है. इसके लिए हाई पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें डोमेन एक्सपर्ट्स शामिल होंगे.
कोर्ट ने खनन, इकोलॉजिकल कंटिन्यूटी और संरचनात्मक प्रभावों पर भी जवाब मांगा है. अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा और उसके संरक्षण को लेकर गहरी चिंता जाहिर की है. अदालत ने कहा कि मौजूदा परिभाषा से संरक्षण का दायरा सीमित होने का खतरा पैदा हो सकता है. इस मुद्दे पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से कई अहम तकनीकी सवालों पर जवाब मांगा है. साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच के लिए हाई पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी गठित करने का प्रस्ताव रखा गया है. अरावली मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी.
पढ़ें पूरी खबर: अरावली रेंज की परिभाषा क्या है? एक्सपर्ट कमेटी बनाने के निर्देश… SC में 21 जनवरी को अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली रेंज की परिभाषा को लेकर गंभीर चिंता जताई है और केंद्र से कई तकनीकी सवालों पर जवाब मांगा है. कोर्ट ने कहा कि 20 नवंबर के आदेश को लागू करने से पहले एक निष्पक्ष और स्वतंत्र समीक्षा ज़रूरी है. इसके लिए डोमेन एक्सपर्ट्स की हाई पावर्ड कमेटी गठित होगी, जो खनन के पर्यावरणीय असर, परिभाषा की सीमाओं और संरक्षण की निरंतरता जैसे मुद्दों की जांच करेगी. अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 को होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अरावली पहाड़ियों से जुड़े 20 नवंबर के आदेश को अगली सुनवाई तक लागू नहीं किया जाएगा. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 21 जनवरी 2026 तय की है. तब तक यथास्थिति बनी रहेगी और सभी अहम पहलुओं पर विस्तार से विचार किया जाएगा.
अरावली मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट की कुछ परिणामी टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है, जिस पर स्पष्टता जरूरी है. CJI ने कहा कि 20 नवंबर के आदेश को लागू करने से पहले एक निष्पक्ष और ठोस रिपोर्ट अनिवार्य है. उन्होंने अरावली पहाड़ियों और रेंज की परिभाषा, 500 मीटर से ज्यादा दूरी की स्थिति, माइनिंग पर रोक या अनुमति और उसके दायरे को लेकर गंभीर अस्पष्टताओं को सुलझाने की जरूरत बताई.
अरावली मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस मुद्दे को समग्र रूप से देखने की जरूरत है और कोर्ट द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को स्वीकार किया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विशेषज्ञों द्वारा एक ठोस माइनिंग प्लान तैयार किया जाएगा, जिसे कोर्ट की मंजूरी के बाद ही लागू किया जाएगा. इस प्रक्रिया में पब्लिक कंसल्टेशन भी होगा. CJI ने इस पहल की सराहना की.
अरावली केस पर थोड़ी देर में सुनवाई शुरू होगी. इस मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता में तीन जजों की बेंच करेगी.
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अरावली पहाड़ियां थार रेगिस्तान को दिल्ली-NCR तक फैलने से रोकने वाली हरी दीवार हैं. लेकिन 10-30 मीटर ऊंची पहाड़ियों को “नॉन-हिल” मानने से उनके खत्म होने का खतरा बढ़ेगा. इससे धूल भरी आंधियां, भूजल स्तर में गिरावट और उत्तर भारत में वायु प्रदूषण और गंभीर हो सकता है.
अरावली में खनन को लेकर विवाद की शुरुआत 1996 में अवैध खनन के खिलाफ याचिका से हुई थी. 2002 और 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने वन भूमि में खनन पर रोक लगाई, लेकिन स्पष्ट परिभाषा न होने से गैप बने रहे. इसी का फायदा उठाकर 2018 तक राजस्थान में कम से कम 31 पहाड़ खत्म हो गए. 2025 का फैसला इन्हीं कानूनी कमियों को दूर करने की कोशिश के तौर पर लाया गया.
#SaveAravalli अभियान के तहत देशभर में उठे विरोध के बीच सुप्रीम कोर्ट ने अरावली को लेकर स्वत: संज्ञान लिया. 100 मीटर की नई परिभाषा पर बढ़ती चिंताओं को देखते हुए कोर्ट ने मामले की आपात समीक्षा का फैसला किया. आज, 29 दिसंबर को विशेष वेकेशन बेंच सुनवाई करेगी, जिसमें यह जांच होगी कि कहीं यह नई कसौटी संवेदनशील इलाकों को रियल एस्टेट और खनन के लिए खोल तो नहीं रही.
केंद्र सरकार ने अरावली की नई परिभाषा को लेकर उठ रहे सवालों पर सफाई दी. 24 दिसंबर को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने कहा कि अरावली का 99% हिस्सा अब भी संरक्षित है और इसे “डेथ वारंट” बताना गलत है. उनका तर्क है कि नई परिभाषा से सिर्फ चोटियां ही नहीं, बल्कि पहाड़ियों की ढलान और आधार भी संरक्षण में आते हैं. सरकार के मुताबिक सख्त शर्तों के तहत भी महज 0.19% क्षेत्र ही खनन के लिए संभावित रूप से पात्र हो सकता है.
अरावली को लेकर नई परिभाषा के बाद सुप्रीम कोर्ट और पर्यावरण मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है. दिसंबर 2025 में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में सभी नई खनन लीज पर अंतरिम रोक लगा दी गई. जब तक सस्टेनेबल माइनिंग के लिए एक वैज्ञानिक मैनेजमेंट प्लान तैयार नहीं हो जाता, तब तक किसी भी नई खनन अनुमति को मंजूरी नहीं दी जाएगी. इस फैसले को पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में अहम माना जा रहा है.
अरावली हिल्स से जुड़ा विवाद 2025 के अंत में और गंभीर हो गया है. यह मामला अब सिर्फ खनन पर नहीं, बल्कि इस बात पर आ टिका है कि आखिर “पहाड़ी” की परिभाषा क्या होनी चाहिए.
20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने एक नई समान परिभाषा को स्वीकार किया, जिसके अनुसार किसी इलाके में वही भू-आकृति अरावली पहाड़ी मानी जाएगी, जिसकी ऊंचाई आसपास की जमीन से कम से कम 100 मीटर ज्यादा हो. साथ ही कहा गया कि 500 मीटर के भीतर मौजूद ऐसी पहाड़ियों के समूह को ही अरावली रेंज माना जाएगा.
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इस परिभाषा से अरावली क्षेत्र की करीब 90 प्रतिशत छोटी पहाड़ियां कानूनी सुरक्षा से बाहर हो सकती हैं. इससे हजारों पहाड़ी इलाकों पर वन संरक्षण कानून लागू नहीं रहेगा, जिससे खनन और अन्य गतिविधियों का रास्ता खुल सकता है. इसी वजह से इस फैसले को लेकर पर्यावरण हितैषियों में गहरी चिंता है.
Copyright © 2025 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News