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बजट 2026 में इस बार एक बात बिल्कुल साफ नजर आई. सरकार अब टेक्नोलॉजी को सिर्फ सपोर्ट सिस्टम नहीं, बल्कि देश की ग्रोथ का इंजन मान रही है. इसे ऑरेंज इकॉनमी के कैटिगरी में माना जा रहा है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण में गेमिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और डिजिटल स्किल्स पर खास फोकस दिखा.
इसका असर आने वाले समय में छात्रों, गेमर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और आम डिजिटल यूजर्स तक दिख सकता है.
बजट का सबसे मजबूत संकेत गेमिंग और क्रिएटर इकोनॉमी को लेकर आया. सरकार ने ऐलान किया कि देश के हजारों स्कूलों और कॉलेजों में AVGC यानी एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स से जुड़ी कंटेंट क्रिएटर लैब्स बनाई जाएंगी. सरकार का मानना है कि अब गेमिंग सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला सेक्टर बन चुका है.
इन लैब्स के जरिए छोटे शहरों के युवाओं को भी वही सॉफ्टवेयर और टूल्स मिलेंगे, जो अभी तक बड़े स्टूडियो और प्राइवेट इंस्टीट्यूट तक सीमित थे. इसका मतलब साफ है. सरकार चाहती है कि गेम डेवलपमेंट और डिजिटल कंटेंट को एक सही करियर के तौर पर देखा जाए.
ई-स्पोर्ट्स (Esports) के लिए बजट में कोई अलग स्कीम नहीं आई, लेकिन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च का ऐलान हुआ है. फास्ट इंटरनेट, मजबूत नेटवर्क और आगे चलकर बेहतर कनेक्टिविटी का फायदा ऑनलाइन गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स दोनों को मिलेगा. खासकर उन खिलाड़ियों को, जो इंटरनेशनल टूर्नामेंट में हिस्सा लेते हैं.
ऑरेंज इकॉनॉमी
भारत का एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (#AVGC) क्षेत्र एक तेज़ी से बढ़ता हुआ उद्योग है, जिसमें वर्ष 2030 तक लगभग 20 लाख पेशेवरों की आवश्यकता होने का अनुमान है। मैं मुंबई स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज़ के सहयोग से 15,000 माध्यमिक… pic.twitter.com/MkQ95DeLRB
बजट 2026 में पहली बार गेमिंग और डिजिटल कंटेंट को सीधे शिक्षा और स्किल से जोड़ा गया है. सरकार ने कहा है कि देश के 15,000 सेकेंडरी स्कूल और 500 कॉलेजों में AVGC यानी एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स से जुड़ी कंटेंट क्रिएटर लैब्स बनाई जाएंगी.
अब तक गेमिंग या कंटेंट क्रिएशन सीखने के लिए ज्यादातर युवाओं को प्राइवेट इंस्टीट्यूट या ऑनलाइन कोर्स पर निर्भर रहना पड़ता था. ये कोर्स अक्सर महंगे होते हैं और छोटे शहरों में आसानी से उपलब्ध नहीं होते. लैब्स के जरिए सरकार यह संदेश दे रही है कि गेमिंग और डिजिटल कंटेंट को भी एक प्रोफेशन की तरह देखा जाना चाहिए.
लेकिन यहां सवाल यह है कि इन लैब्स में कौन पढ़ाएगा. कौन से सॉफ्टवेयर होंगे. और क्या यह ट्रेनिंग इंडस्ट्री की जरूरत के हिसाब से होगी या नहीं. पहले भी कई स्किल प्रोग्राम लॉन्च हुए हैं, जिनका असर जमीन पर सीमित रहा.
बजट 2026 में AI को भविष्य की सबसे अहम तकनीक बताया गया है. सरकार ने कहा है कि AI का इस्तेमाल अब सिर्फ कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा. इसे सरकारी सेवाओं, खेती, हेल्थ और शिक्षा जैसे सेक्टर में लाया जाएगा.
यह बात सुनने में अच्छी लगती है, लेकिन AI को जमीन पर लागू करना आसान नहीं होता. इसके लिए सही डेटा, मजबूत सिस्टम और प्रशिक्षित लोगों की जरूरत होती है. अभी भी कई सरकारी विभाग बेसिक डिजिटल सिस्टम से जूझ रहे हैं.
AI को अगर सही तरीके से लागू किया गया तो इससे फैसले तेज हो सकते हैं और सेवाएं बेहतर हो सकती हैं. लेकिन अगर तैयारी अधूरी रही, तो यह सिर्फ कागजों तक सीमित रह सकता है.
बजट में IIT और IISc जैसे संस्थानों में 10,000 नई टेक फेलोशिप शुरू करने की बात कही गई है. इसका फोकस AI, डीप-टेक और रिसर्च पर होगा.
सराकार का यह कदम रिसर्च करने वाले छात्रों के लिए अहम है. लेकिन यह भी सच है कि इसका फायदा सीमित संख्या में छात्रों को ही मिलेगा. देश के करोड़ों युवा जो गेमिंग, डिजाइन या टेक्नोलॉजी में करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह सीधा समाधान नहीं है.
सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का मतलब है चिप बनाने पर जोर. चिप आज हर चीज में है. मोबाइल फोन, लैपटॉप, गेमिंग कंसोल, AI सर्वर और यहां तक कि कारों में भी.
सरकार का कहना है कि भारत को इस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनना होगा. इसके लिए बड़े निवेश की बात की गई है. लेकिन सेमीकंडक्टर फैक्ट्री लगाना आसान नहीं होता. इसमें समय लगता है और तकनीकी समझ भी चाहिए.
अगर यह मिशन सही तरीके से आगे बढ़ता है, तो आने वाले सालों में हार्डवेयर की सप्लाई और कीमत पर असर पड़ सकता है. लेकिन इसका नतीजा तुरंत दिखने वाला नहीं है.
बजट 2026 में विदेशी क्लाउड कंपनियों को 2047 तक टैक्स छूट देने का फैसला लिया गया है. शर्त यह है कि वे भारत के डेटा सेंटर का इस्तेमाल करें.
इसका मतलब यह है कि सरकार चाहती है कि डेटा भारत में ही स्टोर हो. इससे डेटा सेंटर सेक्टर में निवेश बढ़ सकता है. लेकिन आम यूजर के लिए इसका असर तुरंत नहीं दिखेगा. डेटा सेंटर बनने में सालों लगते हैं. उसके बाद ही ऐप्स, गेम्स और AI प्लेटफॉर्म पर फर्क दिखता है.
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