'गेंद अब ईरान के पाले में, लेकिन वक्त…', अमेरिका ने कहा- हॉर्मुज की नाकेबंदी जारी रहेगी – AajTak

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अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने शुक्रवार को ईरान के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए तेहरान से गुजारिश की है कि वे मिडिल-ईस्ट में चल रहे संघर्ष को खत्म करने में मदद के लिए एक ‘अच्छे समझौते’ पर राज़ी हो जाए, गेंद अब तेहरान के पाले में है. हेगसेथ ने कहा कि वक्त खत्म होने से पहले एक समझौता करने का ईरान के पास एक ऐतिहासिक मौका है. US किसी समझौते पर पहुंचने के लिए बेचैन नहीं है.  इसके साथ ही, उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे को दोहराया कि वॉशिंगटन के पास दुनिया भर का वक्त है. हेगसेथ ने कहा, “मुझे बस इतना करना है कि वे सार्थक और सत्यापित किए जा सकने वाले तरीकों से परमाणु हथियार बनाना छोड़ दें.”
हालांकि, अमेरिकी रक्षा सचिव ने होर्मुज़ स्ट्रेट की चल रही नाकेबंदी के मामले में कोई नरमी नहीं दिखाई और कहा कि यह जब तक ज़रूरी होगा, तब तक जारी रहेगी. यह एक ऐसा रुख है, जिससे ईरान के साथ बातचीत और ज़्यादा पेचीदा होने की संभावना है, क्योंकि ईरान ने नाकेबंदी हटाने को बातचीत फिर से शुरू करने की एक शर्त बना रखा है.
उन्होंने कहा, “हमारी नाकेबंदी का दायरा बढ़ रहा है और यह ग्लोबल होती जा रही है. कोई भी जहाज़ होर्मुज़ स्ट्रेट से दुनिया में कहीं भी, यूनाइटेड स्टेट्स नेवी की अनुमति के बिना नहीं जा सकता.”  उन्होंने यह भी बताया कि 13 अप्रैल को यह कैंपेन शुरू होने के बाद से अब तक 34 जहाज़ों का रास्ता बदला गया है.
होर्मुज़ को लेकर US बनाम NATO
पेंटागन के प्रमुख ने यह भी चेतावनी दी है कि ईरान द्वारा इस जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोई भी कोशिश सीजफायर का उल्लंघन मानी जाएगी. उन्होंने कहा, “ईरान द्वारा हथियारों से लदी, तेज़ रफ़्तार वाली नावों के इस्तेमाल के कारण होरमुज़ स्ट्रेट से गुज़रना काफ़ी सीमित और सामान्य से ज़्यादा जोखिम भरा हो गया है.”
राष्ट्रपति ट्रंप की ही राह पर चलते हुए, हेगसेथ ने यूरोप में NATO के सहयोगी देशों से भी गुजारिश किया कि वे होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित करने में यूएस की मदद करें. यह जलमार्ग दुनिया की एक-तिहाई तेल आपूर्ति के लिए ज़िम्मेदार है.
उन्होंने उन सहयोगी देशों पर तंज किया, जिन्होंने अब तक इस नाकेबंदी में शामिल होने से परहेज़ किया है. हेगसेथ ने कहा, “यूरोप को होर्मुंज़ स्ट्रेट की ज़रूरत US से कहीं ज़्यादा है. बिना पर्याप्त योगदान दिए, सिर्फ़ अमेरिकी सुरक्षा का फ़ायदा उठाने वाले देशों का दौर अब खत्म हो चुका है.”
28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से, राष्ट्रपति ट्रंप ने NATO के सहयोगी देशों की बार-बार आलोचना की है. राष्ट्रपति ने उन्हें ‘कायर’ और ‘कागज़ी शेर’ कहा है, क्योंकि उन्होंने इस अहम जलमार्ग को फिर से खोलने में कोई मदद नहीं की. साथ ही, यूएस ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर ये देश आगे बढ़कर मदद नहीं करते हैं, तो वॉशिंगटन भविष्य में उन्हें दिए जाने वाले समर्थन पर फिर से विचार कर सकता है.
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इस्लामाबाद में बातचीत…
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत के दूसरे दौर को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के इस्लामाबाद जाने की उम्मीद है, जिससे अमेरिका के साथ शांति वार्ता फिर से शुरू करने के प्रस्तावों पर चर्चा की जा सके. हालांकि, उनका अमेरिकी वार्ताकारों से मिलने का कोई कार्यक्रम तय नहीं है. फिर भी, पाकिस्तानी सूत्रों ने बताया कि बातचीत की संभावना को देखते हुए अमेरिका की एक लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा टीम पहले से ही इस्लामाबाद में मौजूद है.
दोनों देशों के बीच बातचीत का पहला दौर 11 अप्रैल को 21 घंटे तक चली लंबी चर्चा के बाद टूट गया था, जिसके लिए दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को ज़िम्मेदार ठहराया था.
अराघची ने ‘X’ पर किए गए पोस्ट में कहा कि वे द्विपक्षीय मामलों पर अपने सहयोगियों के साथ तालमेल बिठाने और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श करने के लिए पाकिस्तान, ओमान और रूस का दौरा करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के पड़ोसी देश तेहरान की प्राथमिकता बने हुए हैं.
पाकिस्तान सरकार के दो सूत्रों ने बताया कि अराघची का यह संक्षिप्त दौरा ईरान के प्रस्तावों पर केंद्रित होगा, जिन्हें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए बाद में वॉशिंगटन तक पहुंचाएगा.
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‘समझौता तभी, जब ईरान के हितों की रक्षा…’
ईरान के विदेश मंत्रालय के एक टॉप अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि शांति वार्ता का मुख्य ज़ोर जंग को इस तरह खत्म करने पर होना चाहिए, जिससे ईरान के हितों और मांगों की रक्षा हो सके. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने आगे कहा कि अब परमाणु हथियार उनका मुख्य मुद्दा नहीं हो सकते. उन्होंने कहा, “मुख्य मुद्दा युद्ध को इस तरह खत्म करना है, जिससे हमारे हितों और मांगों की रक्षा हो सके. हमने इस संघर्ष-विराम को इसलिए स्वीकार किया, क्योंकि यह सभी मोर्चों पर जंग को पूरी तरह खत्म करने के लिए एक आधार और प्रस्तावना का काम कर सकता है.”
उन्होंने बातचीत जारी रखने की ईरान की इच्छा को अमेरिका द्वारा नाकेबंदी हटाने से भी जोड़ा, जिसे उन्होंने ‘आक्रामकता का कृत्य’ बताया. उन्होंने कहा, “जहाजों पर हमले भी सीजफायर का उल्लंघन हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत हैं. इससे यह साबित होता है कि अमेरिकी पक्ष में न केवल सद्भावना की कमी है, बल्कि असल में उसके इरादे भी बुरे हैं.”
दरअस्ल, दोनों में से कोई भी पक्ष समझौता करने के संकेत नहीं दे रहा है, इसलिए बातचीत की संभावनाएं अभी भी अनिश्चित बनी हुई हैं.
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