जम्मू-कश्मीर के बारामूला के कछुआ गांव में करीब 36 साल के अंतराल के बाद कुछ ऐसा हुआ, जिसने लोगों के दिलों को जीत लिया. 1989 के बाद पहली बार, कश्मीरी पंडित 29 और 30 अप्रैल को मंदिर में हवन करने के लिए लौटे. इस घटना के बाद माना जा रहा है कि घाटी में फिर से एक बार सामान्य स्थिति पैदा हो रही है.
Trending Photos
Jammu-Kashmir News: 36 साल के लंबे अंतराल के बाद, एक दिल को छू लेने वाली घटना सामने आई है. बारामूला के कछुआ गांव में गणेश मंदिर में होने वाले सालाना समागम की फिर से शुरुआत हुई है. यह घाटी के सामाजिक ताने-बाने को फिर से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम है.
दरअसल, 1989 के बाद पहली बार, कश्मीरी पंडित 29 और 30 अप्रैल को मंदिर में हवन करने के लिए लौटे. ऐतिहासिक रूप से इन तारीखों पर अलग-अलग समुदायों के लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा होते रहे हैं. इस बार के आयोजन में 29 अप्रैल को हवन (पवित्र अग्नि अनुष्ठान) हुआ, जिसके बाद 30 अप्रैल को विशेष पूजा की गई. यह 36 साल बाद इन अनुष्ठानों की औपचारिक वापसी का प्रतीक है.
कहां है यह मंदिर?
यह मंदिर बारामूला शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है. अब इसे तीर्थयात्रा सर्किट पर एक स्थायी पड़ाव के तौर पर विकसित करने की योजना बनाई जा रही है. इस आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय मुस्लिम निवासियों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई. बारामूला के डिप्टी कमिश्नर (DC) सैयद फखरुद्दीन हामिद ने इसे एकता और भाईचारे का एक सशक्त प्रतीक बताया.
कछुआ में गणेश मंदिर का फिर से खुलना, जम्मू-कश्मीर प्रशासन और स्थानीय समुदायों द्वारा सदियों पुरानी आध्यात्मिक परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए किए जा रहे बड़े और निरंतर प्रयासों का ही एक हिस्सा है.
यह भी पढ़ें: ऋतिक के तिलक से मुबारिक को दिक्कत! गाली-गलौज और मारने की धमकी के बाद जेल पहुंचा आरोपी
प्रशासन ने दी बधाई
प्रशासन ने इस अवसर पर मुस्लिम और पंडित, दोनों समुदायों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि दोनों समुदायों के आपसी सहयोग से ही यह पुनरुद्धार संभव हो पाया है. इससे पहले, 26 मार्च 2026 को श्रीनगर में भी एक ऐतिहासिक घटना घटी थी.
श्रीनगर के हब्बा कदल इलाके में स्थित ऐतिहासिक रघुनाथ मंदिर को 36 साल से भी ज़्यादा समय तक बंद रहने के बाद फिर से खोला गया. यह मंदिर 170 साल पुराना है और मूल रूप से 1857 में बनाया गया था. ‘स्मार्ट सिटी’ पहल के तहत इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया और रामनवमी के भव्य समारोहों के साथ इसे फिर से खोला गया. इस समारोह में स्थानीय निवासियों और कश्मीरी पंडितों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया.
घाटी में लौट रही सामान्य स्थिति
इन मंदिरों का फिर से खुलना घाटी में सामान्य स्थिति की वापसी का संकेत माना जा रहा है. साथ ही, इसे कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत को फिर से स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम भी माना जा रहा है, क्योंकि यह जमीनी स्तर पर एकता और भाईचारे को दर्शाता है.
यह भी पढ़ें: पाकिस्तान से संभला नहीं तो भारत के ‘टच’ में आया ईरान, तेहरान से आए एक फोन कॉल की इनसाइड स्टोरी
Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Zee News Hindi पर. Hindi News और India News in Hindi के लिए जुड़े रहें हमारे साथ.
सैयद खालिद हुसैन जम्मू-कश्मीर के एक पुरस्कार विजेता पत्रकार हैं, जिन्हें 24 वर्षों से अधिक का अनुभव है. साल 2014 से ‘ज़ी न्यूज़’ में चीफ स्पेशल कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम कर रहे हैं.
जी …और पढ़ें
Thank you
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts.