PM Kisan latest news; भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पीएम-किसान (PM-KISAN) आज देश के करोड़ों किसानों के लिए आर्थिक सहारा बन चुकी है। इस योजना के तहत सरकार सीधे किसानों के बैंक खातों में आर्थिक मदद भेजती है, जिससे उन्हें खेती-किसानी के खर्चों में राहत मिलती है। हाल ही में जारी जानकारी के मुताबिक, अब तक इस योजना के जरिए 22 किस्तों में कुल ₹4.28 लाख करोड़ से अधिक की राशि किसानों के खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। यह अपने आप में एक बड़ा आंकड़ा है, जो दिखाता है कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
4 मई को पीएम किसान योजना के आधिकारिक हैंडल (@pmkisanofficial) से किए गए पोस्ट में अब तक की सभी 22 किस्तों का पूरा लेखा-जोखा देश के सामने रखा गया।
कुल वितरित राशि:- योजना की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 22 किस्तों में किसानों के बैंक खातों में ₹4.28 लाख करोड़ से अधिक की राशि सीधे ट्रांसफर (DBT) की जा चुकी है।
महिला किसानों को बड़ा सहारा:- इस योजना से देश की 2.17 करोड़ से अधिक महिला किसान जुड़ी हुई हैं। सरकार ने केवल महिला लाभार्थियों के खातों में ही अब तक ₹1.10 लाख करोड़ से अधिक की सम्मान राशि भेजी है।
इसके साथ ही सरकार ने बताया कि ‘PM-Kisan पोर्टल’ को एक वन-स्टॉप डिजिटल समाधान बनाया गया है, जहां किसान आसानी से नया रजिस्ट्रेशन, अपने भुगतान का स्टेटस (Payment Tracking) और रीयल-टाइम मदद पा सकते हैं।
इस योजना की एक खास बात यह भी है कि इसका लाभ महिलाओं तक भी बड़े पैमाने पर पहुंचा है। आंकड़ों के अनुसार, 2.17 करोड़ से अधिक महिला लाभार्थियों को इस योजना का फायदा मिला है। इतना ही नहीं, महिला किसानों और परिवारों को अब तक ₹1.10 लाख करोड़ से ज्यादा की राशि सीधे उनके खातों में दी जा चुकी है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में भी अहम भूमिका निभा रही है।
गवर्नमेंट ऑफ इंडिया (Government of India) द्वारा शुरू की गई यह योजना किसानों को हर साल ₹6,000 की सहायता तीन बराबर किस्तों में प्रदान करती है। यह रकम सीधे बैंक खाते में DBT (Direct Benefit Transfer) के जरिए भेजी जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाती है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह राशि बीज, खाद, सिंचाई और अन्य जरूरी खर्चों में काफी मददगार साबित होती है।
हालांकि, सरकार ने 23वीं किस्त जारी होने की तारीख को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन अगर हम पुराने रिकॉर्ड्स और रुझानों को देखें, तो हर वित्त वर्ष की पहली किस्त जून से अगस्त के पहले सप्ताह के बीच आती है।
आपको बता दें कि पिछले साल की किस्त अगस्त के शुरुआती सप्ताह में ट्रांसफर की गई थी। उससे पहले वर्ष 2024 में 17वीं किस्त 18 जून को जारी हुई थी। इस लिहाज से उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार भी जून के आखिरी हफ्ते या फिर जुलाई से अगस्त के बीच किसानों के खाते में ₹2,000 की 23वीं किस्त क्रेडिट हो जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि PM-KISAN ने ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी प्रवाह बढ़ाया है, जिससे स्थानीय बाजारों को भी फायदा मिला है। साथ ही समय पर मिलने वाली आर्थिक सहायता से किसानों की निर्भरता कर्ज पर कम हुई है। यह योजना न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रही है, बल्कि देश की कृषि व्यवस्था को भी मजबूत बना रही है। आने वाले समय में अगर इस योजना का दायरा और बढ़ाया जाता है, तो यह ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने में और भी बड़ी भूमिका निभा सकती है।
अगर आप एक नए किसान हैं और पहली बार इस योजना का लाभ उठाने के लिए रजिस्ट्रेशन करने जा रहे हैं, तो आपके लिए एक जरूरी बदलाव किया गया है। अब नए रजिस्ट्रेशन के लिए फार्मर आईडी (Farmer ID) होना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना इस आईडी के नए किसान पीएम किसान पोर्टल पर अपना आवेदन पूरा नहीं कर सकेंगे। इसलिए, किस्त आने से पहले अपनी फार्मर आईडी जरूर बनवा लें, ताकि आपकी सहायता राशि बिना किसी रुकावट के सीधे आपके खाते में पहुंच सके।
सर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।
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