'राज्यपाल बीजेपी का पक्ष ले रहे', राजभवन से दूसरी बार बेरंग लौटे विजय, भड़के पार्टी कार्यकर्ता – AajTak

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तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त खींचतान चल रही है. TVK प्रमुख विजय आज दूसरी बार राजभवन पहुंचे, लेकिन इस बार भी उन्हें सरकार बनाने का न्योता नहीं मिला और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा. यही वजह है कि राजभवन के बाहर खड़े उनके समर्थकों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया. उनका साफ आरोप है कि राज्यपाल जानबूझकर देरी कर रहे हैं और BJP का पक्ष ले रहे हैं.
विजय की तरफ से दावा किया गया है कि उनके पास 112 विधायकों का समर्थन है, जिसमें कांग्रेस के विधायक भी शामिल हैं. इसके बावजूद उन्हें सरकार बनाने के लिए नहीं बुलाया गया. इसी बात से नाराज कार्यकर्ताओं ने चेन्नई में राजभवन के बाहर जमकर प्रदर्शन शुरू कर दिया.
‘बहुमत साबित करने की जगह विधानसभा है, राजभवन नहीं’
प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने साफ कहा कि बहुमत साबित करने का सही मंच विधानसभा है, न कि राजभवन. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मशहूर एस.आर. बोम्मई केस का हवाला देते हुए कहा कि फ्लोर टेस्ट ही असली तरीका है और राज्यपाल को उसी दिशा में कदम उठाना चाहिए. समर्थकों का तर्क है कि 108 विधायकों के साथ TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, ऐसे में संविधान के मुताबिक राज्यपाल को विजय को सरकार बनाने के लिए बुलाना चाहिए था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जिससे अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
पीटीआई (PTI) के मुताबिक, राज्यपाल ने विजय को आश्वासन दिया है कि वह सरकार बनाने के लिए किसी और दूसरी पार्टी को न्योता नहीं देंगे. हालांकि, इसके लिए एक प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है. राज्यपाल का कहना है कि विजय को अपने समर्थक विधायकों के हस्ताक्षर वाली लिस्ट लेकर दोबारा आना होगा. जब तक हर विधायक के हस्ताक्षर वाली लिस्ट जमा नहीं होती, तब तक शपथ ग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी. राज्यपाल ने स्पष्ट किया है कि समर्थन का दावा कागजों पर पूरी तरह पक्का होना चाहिए.
एक और दिलचस्प बात यह है कि विपक्षी नेता पलानीस्वामी ने अभी तक राज्यपाल से मुलाकात का कोई समय नहीं मांगा है. इस दौरान प्रदर्शन काफी तेज हो गया और पुलिस को स्थिति संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. तिरुपुर से आए ये कार्यकर्ता काफी गुस्से में थे और उनका कहना था कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है. अब इन कार्यकर्ताओं ने फैसला किया है कि जब तक शपथ ग्रहण नहीं होता, वे चेन्नई में ही डटे रहेंगे. कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे अपने नेता को मुख्यमंत्री बनते देखकर ही यहां से वापस जाएंगे.
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