बिहार में ट्रैफिक चालान वालों के लिए बड़ी खुशखबरी, कल लोक अदालत में निपटेंगे ढाई लाख पेंडिंग मामले – Zee News

चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने कहा कि सामान्य अदालतों का बोझ कम करने के लिए ट्रैफिक चालान जैसे मामलों को लोक अदालत में प्राथमिकता देनी चाहिए. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था की जाए ताकि लोगों को परेशानी न हो. गंभीर अपराधों जैसे शराब पीकर गाड़ी चलाने पर कोई राहत नहीं दी जाएगी.
Trending Photos
पटना हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद बिहार के लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है. अगर आपका भी ट्रैफिक चालान कटा है और आप उसे लेकर परेशान हैं, तो कल यानी 9 मई, 2026 को लगने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत आपके लिए सबसे अच्छा मौका है. हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि ट्रैफिक चालान के विवादों को अब अदालतों के चक्कर लगाने के बजाय लोक अदालत के जरिए सुलझाया जाए.

पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए भारी नाराजगी जताई. कोर्ट के सामने यह बात आई कि बिहार में ट्रैफिक चालान के ढाई लाख (2,67,509) से भी ज्यादा मामले अदालतों में लटके हुए हैं. इतना ही नहीं, सिर्फ अप्रैल 2026 के पहले 16 दिनों में ही 10,850 नए मामले जुड़ गए. रानी तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि जब दूसरे राज्यों में लोक अदालत के जरिए चालान निपटाए जा सकते हैं, तो बिहार में ऐसा क्यों नहीं हो रहा?

कोर्ट की सख्ती के बाद बिहार सरकार ने एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना, 2026 शुरू की है. इसकी अधिसूचना (नोटिस) 30 अप्रैल को जारी कर दी गई थी. इस योजना के तहत अगर आपने छोटे-मोटे नियम तोड़े हैं, जैसे कि सीट बेल्ट नहीं लगाना, तेज रफ्तार में गाड़ी चलाना, हेलमेट न पहनना या बिना लाइसेंस गाड़ी चलाना, तो आपको जुर्माने की राशि में छूट मिल सकती है. लोक अदालत में इन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाएगा ताकि आम लोगों को परिवहन विभाग की मनमानी से राहत मिले.

Add Zee News as a Preferred Source

लोक अदालत में छोटे मामलों का निपटारा तो होगा, लेकिन कुछ गलतियां ऐसी हैं जिन्हें गंभीर माना गया है. अगर कोई शराब पीकर गाड़ी चलाते पकड़ा गया है, मोबाइल पर बात करते हुए ड्राइविंग कर रहा था, ओवरलोडिंग का मामला है, नाबालिग गाड़ी चला रहा था या बहुत खतरनाक ढंग से गाड़ी चला रहा था, तो ऐसे लोगों को कोई राहत नहीं मिलेगी. लोक अदालत में केवल उन्हीं मामलों की सुनवाई होगी जो साधारण यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े हैं.
हाईकोर्ट ने जिला अदालतों के जजों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे ट्रैफिक चालान के मामलों को सबसे पहले निपटाएं. कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे लोग घर बैठे ऑनलाइन पैसे जमा कर सकें और उन्हें कचहरी के चक्कर न काटने पड़ें. याचिकाकर्ता के वकील विकास कुमार पंकज ने कोर्ट को बताया था कि विभाग की सुस्ती के कारण बिहार में ये मामले लोक अदालत तक पहुँच ही नहीं पाते थे, जिससे आम आदमी परेशान होता था और अदालतों पर बोझ बढ़ता था.
ये भी पढ़ें- दिल्ली में पांडव कुमार की हत्या पर कोहराम, कांग्रेस बोली- न्याय दिलाकर रहेंगे
हाईकोर्ट ने ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लोक अदालतों का उपयोग बहुत अच्छे से किया जा रहा है. लोक अदालत बनाने का मकसद ही यही है कि छोटे-मोटे झगड़े और चालान जैसे मामले वहीं निपट जाएं ताकि बड़ी अदालतों के पास गंभीर केसों को सुनने के लिए समय बच सके. बिहार में अब तक प्रभावी तंत्र न होने से लोग परिवहन विभाग की मनमानी का शिकार हो रहे थे. अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 जून, 2026 को होगी, जिसमें कोर्ट देखेगा कि लोक अदालत में कितने चालान निपटाए गए.
Thank you
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts.

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News