हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है और कोई राष्ट्र भाषा को लेकर टिप्पणी करता है तो वह सही नहीं है। राष्ट्र भाषा सहित अन्य भाषाओं का सबको सम्मान करना चाहिए। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा शुक्रवार को रोहतक पहुंचे और विभिन्न कार्यक्रमों में शिरक्त की।
सबसे पहले उन्होंने माता दरवाजा स्थित जैन पब्लिक स्कूल के प्रांगण में हरियाणा की प्रथम एस्ट्रोनॉमी स्पेस लैब का उद्घाटन का उद्धाटन किया और बच्चों द्वारा बनाए गए अत्याधुनिक उपकरण का अवलोकन कर जमकर सराना की। उन्होंने कहा कि खुशी की बात है कि विज्ञान के प्रति बच्चों की रूचि बढ़ रही है। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांढा ने उद्योगपति राजेश जैन द्वारा बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए साइंस लैब उपलब्ध कराने की जमकर सराहना की और कहा कि इस सांसइ लैब के माध्यम से अंतरिक्ष और ब्रह्मांड की संभावनाओं को समझने का मौका मिलेगा, जोकि बच्चों के लिए काफी कारगर सिद्ध होगी।
बाद में महिपाल ढांडा ने गांव खरावड़ स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में स्थापित की गई निपुण वाटिका का भी उद्घाटन किया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि देश के प्रतिभाशाली बच्चों की क्षमता को बचपन से ही सही दिशा और उचित वातावरण देकर निखारा जाए। इसी उद्देश्य के तहत प्रदेश में निपुण वाटिका और सुपर-40 जैसी अभिनव पहलें बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाना, लिखना सिखाना और उनकी झिझक को दूर करना इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है। बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि देश में 27-28 के करीब राष्ट्रीय भाषाए हैं, क्योंकि हर राज्य की अपनी भाषा है। सभी भाषाओं का सम्मान करना चाहिए, लेकिन हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा दिया गया है तो उसका सम्मान जरूरी है। आजादी के बाद हिंदी को राष्ट्र भाषा माना गया था।
सरकारी स्कूलों में सुविधाओं को लेकर पूछे गए सवाल के जबाव में उन्होंने कहा कि सरकार के संज्ञान में जो भी विषय आ रहे हैं, उन पर काम किया जा रहा है। समय के अनुसार ही सरकार आगे बढ़ रही है।
इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी मंजीत मलिक, दिलजीत सिंह, रूपांशी हुड्डा, रवि जैन, मनीष जैन, मुकेश, अतुल जैन, राजीव जैन, सन्नी निझावन व शीतल प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से ‘द ट्रिब्यून’ का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
‘द ट्रिब्यून’ के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।