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छंटनी के महा संकट दौर में जहां लोगों को नौकरी जा रही है वहीं, कुछ लोग अपनी सुरक्षित नौकरी को छोड़ रहे हैं जिसके पीछे सैलरी, मानसिक शांति समेत कई वजहें शामिल हैं. देखा जा रहा है लोग नौकरी छोड़कर अपने काम शुरू करने पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं. ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया पर एक बार फिर चर्चा में आ गया है. जहां 22 साल के एक युवक ने अपनी नौकरी छोड़ डिलीवरी का काम करना शुरू कर दिया. उसका कहना है कि वह नौकरी से ज्यादा डिलीवरी से कमा सकता है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वायरल हो रहे इस पोस्ट में बताया गया है कि वह युवा कोई आम कर्मचारी नहीं था.
उसे कंपनी की तरफ से खास ट्रेनिंग दी जा रही थी, सीखने के लिए जरूरी संसाधन और किताबें दी गई थीं और यहां तक कि एआई से जुड़ी ट्रेनिंग भी उपलब्ध कराया गया था. उनके नियोक्ता को लगता था कि वह कुछ ही समय में लीडरशिप की भूमिका भी निभा सकता है.
लेकिन बदल गए हालात
लेकिन स्थिति तब बदल गई जब उन्होंने एक्स्ट्रा कमाई के लिए वीकेंड पर डिलीवरी का काम शुरू किया. धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि सिर्फ डिलीवरी से ही वह हर महीने लगभग 35,000 से 40,000 रुपये तक कमा सकते हैं. इसी वजह से उन्होंने अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया.
नियोक्ता ने व्यक्त की चिंता
एक्स पोस्ट में नियोक्ता ने चिंता जताते हुए कहा कि ऐसा काम लंबे समय तक करने से सेहत पर असर पड़ सकता है और साथ ही कॉर्पोरेट स्किल्स और करियर ग्रोथ भी रुक सकती है. उन्होंने इतना भी कहा कि यह काम 5 साल करने के बाद जब उनका हेल्थ उनके साथ नहीं होगा तो वह क्या करेंगे? इसके बावजूद कर्मचारी ने बिना कुछ सोचे कॉर्पोरेट ग्रोथ के मुकाबले तत्काल कमाई को प्राथमिकता दी.
कमाई बदल रही काम करने का तरीका
पोस्ट वायरल होते ही कमाई को लेकर और यह घटना दोनों चर्चा में आ गए हैं. आज नौकरी के बाजार में कमाई का पूरा संतुलन बदल रहा है. ऑथर के अनुसार, अब 10–12 हजार रुपये महीने वाली नौकरियां मिलना मुश्किल हो गया है. यहां तक कि शारीरिक काम वाले शुरुआती स्तर के जॉब्स में भी लोग अब 18,000 रुपये या उससे ज्यादा की उम्मीद रखते हैं. इस वजह से कई युवा नौकरी और कमाई की तुलना अलग तरीके से करने लगे हैं, क्योंकि गिग इकॉनमी या डिलीवरी जैसे काम तुरंत ज्यादा पैसा दे रहे हैं.
यही कारण है कि शुरुआती कॉर्पोरेट सैलरी और गिग वर्क की कमाई के बीच का फर्क बढ़ रहा है और इसका असर युवाओं के करियर चुनाव पर साफ दिख रहा है. अब बहस यह है कि कंपनियां अगर सैलरी और ग्रोथ बेहतर नहीं करेंगी, तो क्या वे युवा टैलेंट को बनाए रख पाएंगी या वे जल्दी ही दूसरे विकल्प चुन लेंगे.
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