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एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में छात्र आत्महत्याओं की संख्या बढ़कर 14,488 हो गई, जो पिछले वर्ष से 4.3% अधिक है। …और पढ़ें
प्रतीकात्मक फोटो।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में छात्र आत्महत्या के मामलों ने 2024 में नया चिंताजनक रिकॉर्ड बना दिया है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में कुल 14,488 छात्रों ने आत्महत्या की, जो 2023 के 13,892 मामलों की तुलना में 4.3 प्रतिशत अधिक है।
चिंता की बात यह है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब देश में कुल आत्महत्या के मामलों में मामूली गिरावट दर्ज की गई। NCRB के मुताबिक, 2023 में कुल 1,71,418 आत्महत्या के मामले सामने आए थे, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 1,70,746 रह गई।
आंकड़ों के अनुसार, छात्र आत्महत्या के मामलों में पिछले एक दशक में तेज वृद्धि हुई है।
2015 में छात्र आत्महत्या के मामले: 8,934
2020 में: 12,526
2024 में: 14,488
इस तरह 2015 से 2024 के बीच छात्र आत्महत्या के मामलों में 62.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि पिछले पांच वर्षों में यह बढ़ोतरी 15.7 प्रतिशत रही। NCRB के अनुसार, 2015 से 2024 के बीच कुल 1,15,850 छात्रों ने आत्महत्या की।
रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कुल आत्महत्या मामलों में छात्रों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।
2015 में छात्रों की हिस्सेदारी: 6.7%
2020 में: 8.2%
2023 में: 8.1%
2024 में: 8.5%
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति देश में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य संकट की गंभीरता को दर्शाती है।
दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज (IHBAS) के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि परीक्षा का दबाव, कड़ी प्रतिस्पर्धा, अभिभावकों की अपेक्षाएं, करियर की चिंता और सोशल मीडिया का प्रभाव छात्रों पर भारी मानसिक दबाव बना रहे हैं।
उन्होंने कहा, “कई छात्र अवसाद, चिंता, बाइपोलर डिसऑर्डर और गहरे भावनात्मक तनाव से जूझ रहे होते हैं, लेकिन समय पर उनकी पहचान नहीं हो पाती। हमें स्कूलों और कॉलेजों में शुरुआती पहचान, बिना भेदभाव वाली काउंसलिंग और मजबूत मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली की तत्काल जरूरत है।”
मुंबई स्थित इंटरनेशनल करियर एंड कॉलेज काउंसलिंग (IC3) मूवमेंट के संस्थापक गणेश कोहली ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को मुख्यधारा की शिक्षा का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “शिक्षकों और अभिभावकों को भी इस बात के लिए प्रशिक्षित और संवेदनशील बनाया जाना चाहिए कि वे छात्रों में तनाव और अवसाद के शुरुआती संकेत पहचान सकें और ऐसा माहौल बनाएं जहां छात्र बिना डर और शर्म के मदद मांग सकें।”
2024 में आत्महत्या करने वाले 14,488 छात्रों में:
7,669 पुरुष छात्र
6,819 महिला छात्र शामिल थीं।
राज्यों की बात करें तो सबसे अधिक छात्र आत्महत्या के मामले महाराष्ट्र में दर्ज किए गए।
महाराष्ट्र: 13.2%
उत्तर प्रदेश: 10.9%
मध्य प्रदेश: 10%
तमिलनाडु: 8.9%
रिपोर्ट के अनुसार, आत्महत्या करने वाले छात्रों में सबसे बड़ा वर्ग माध्यमिक स्तर यानी कक्षा 10 तक पढ़े छात्रों का था।
कक्षा 10 तक: 25.6%
कक्षा 8 तक: 17.7%
कक्षा 12 तक: 18.3%
प्राथमिक स्तर (कक्षा 5 तक): 14.4%
अशिक्षित: 10.1%
स्नातक या उससे अधिक शिक्षित: 5.6%
आत्महत्या के प्रमुख कारण
NCRB के अनुसार, 2024 में आत्महत्या के सबसे बड़े कारण पारिवारिक समस्याएं रहीं, जिनकी हिस्सेदारी 33.5 प्रतिशत थी। इसके बाद:
बीमारी: 17.9%
नशे की लत: 7.6%
बेरोजगारी: 1.5%
परीक्षा में असफलता: 1.2%