पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने लगा है। सरकार ने इस दबाव को घटाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। केंद्र सरकार ने सोने और चांदी समेत कई कीमती धातुओं के आयात पर सीमा शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। इस कदम से सोने के आयात पर कुछ लगाम लगेगी और साथ ही, देश में सोने की खरीद भी घटेगी। अभी यह बताना संभव नहीं है कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद सोने की खरीद कितनी घटी है, लेकिन सोने की कीमत बढ़ती मालूम पड़ रही है। विशेषज्ञों ने अनुमान लगा लिया है कि सोने के भाव में वृद्धि होगी। इसी क्रम में बुधवार को वायदा कारोबार में सोने की कीमत 9.723 रुपये बढ़कर 1.63 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। चांदी की कीमत भी बढ़ने लगी है और यह तीन लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार बनी रहे, तो अचरज नहीं। कई लोग मान रहे हैं कि सोना न खरीदने की अपील हुई है, चांदी खरीदने से नहीं रोका गया है। आशंका है, सोने का भाव भले ठहर जाए, पर चांदी में तेजी रहेगी।
बहरहाल, सरकार को उम्मीद है कि सोने पर आयात शुल्क से लाभ हो सकता है। ऐसा पहले भी हुआ है, मगर मात्र इस उपाय से पूरी अर्थव्यवस्था को राहत नहीं मिलने वाली। सरकार को स्थितियों को संभालने के लिए अनेक कदम उठाने पड़ेंगे और वह क्रमवार फैसले लेने की तैयारी में दिख रही है। वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने, विदेशी मुद्रा बचाने और गैर-जरूरी आयात को नियंत्रित करने के उद्देश्य से कदम उठाने की जरूरत है। अभी तक पश्चिम एशिया के संकट का आम लोगों पर बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा है। रसोई गैस की कीमत और किल्लत से देश का एक वर्ग अवश्य प्रभावित हुआ, पर ज्यादातर भारतीयों की जिंदगी सामान्य चल रही है। प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की अपील से यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं कि संयम की तैयारी सभी को कर लेनी चाहिए। यहां यह उम्मीद जरूर की जा सकती है कि सरकार अचानक से कोई कड़ा फैसला न ले। कड़े फैसले भी क्रमवार लेने चाहिए। एक ‘न्यू नॉर्मल’ कोरोना-लॉकडाउन से गुजरते हुए बहुत मुश्किल से बना था, पर लॉकडाउन जैसी परेशानियां फिर नहीं खड़ी होनी चाहिए। तब लॉकडाउन की वजह से वर्ष 2021, 2022 और 2023 में भारतीय सकल घरेलू उत्पाद में 12 प्रतिशत की कमी आई थी। बड़े पैमाने पर नौकरी गई थी। तनख्वाह में कटौती हुई थी, ऐसा बहुत कुछ हुआ था, जो दुखद था, वैसा दोबारा नहीं होना चाहिए।
पूरा अभियान संसाधन बचाने पर केंद्रित हो, परेशानी बढ़ाने पर नहीं। जरूरी सेवाओं पर भी खास नजर रखने की जरूरत है, ताकि मुश्किल समय देखकर बेईमानी न शुरू हो जाए। मिसाल के लिए, कोरोना के दौर में हमने चिकित्साकर्मियों को मरीजों की सेवा में जान गंवाते भी देखा है, तो स्याह कारोबार करते हुए भी देखा है। आपदा में अवसर का मतलब कहीं भी जमाखोरी, कालाबाजारी न हो। यह ‘सिविक सेंस’ का परिचय देते हुए एक-दूसरे का सहारा बनने का समय है। जमीनी बदलाव के बजाय मौद्रिक उपायों को तरजीह मिले, तो हम आर्थिक तनाव से निपट लेंगे। ऐसे में, यह खुशखबरी ही है कि सोने-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ने से रुपया बुधवार सुबह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने सर्वकालिक निचले स्तर से 16 पैसे चढ़कर 95.52 रुपये पर पहुंच गया। निस्संदेह, सक्षम लोगों को सहर्ष संकट का सामना करना चाहिए, ताकि कम सक्षम लोगों पर ज्यादा आंच न आए।
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