काबुल/इस्लामाबाद: 15 अगस्त, 2021 को जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया, तब सबसे ज्यादा खुश पाकिस्तान था. पाकिस्तान को उम्मीद थी कि उसका एक इस्लामिक देश होना अफगानिस्तान से बेहतर संबंधों का कारण होगा. लेकिन अब 3 साल बाद स्थिति पूरी बदल चुकी है. पाकिस्तान और तालिबान प्रशासन वाले अफगानिस्तान के बीच हाल के दिनों में तनाव देखा गया है. तालिबान अब अपने पड़ोसी पाकिस्तान की जगह दूसरे देशों से रिश्ते मजबूत कर रहा है. तालिबान का सबसे बड़ा दोस्त अब भारत बनकर उभरा है.
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और अंतरिम तालिबान सरकार के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी के बीच पिछले सप्ताह दुबई में मीटिंग हुई. मीटिंग के बाद तालिबान ने भारत को एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय सहयोगी बताया. इसके अलावा तालिबानी मंत्री ने यूएई के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की थी. रविवार को मुत्ताकी ने काबुल में सऊदी अरब के चार्जडी अफेयर्स फैसल तालक अल-बक्मी से मुलाकात की. तालिबान ने इन मुलाकातों के जरिए पाकिस्तान को दिखा दिया है कि मुस्लिम दुनिया में पाकिस्तान के अलावा भी उसके दोस्त हैं.
भारत-तालिबान की करीबी से टेंशन
यूएई और सऊदी से तालिबान का मिलना पाकिस्तान की टेंशन भले न बढ़ाए. लेकिन भारत और तालिबान के बीच की करीबी से पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स हैरान हैं. वह भारत की विदेश नीति की तारीफ कर रहे हैं, साथ ही पाकिस्तान को चेतावनी भी दे रहे हैं. पाकिस्तानी टीवी चैनल ‘समा टीवी’ के कार्यक्रम में अबसार आलम ने चेतावनी देते हुए कहा कि अफगानिस्तान में शेख हसीना की सत्ता जाने के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का नाम आ रहा है. इसके बाद से ही देखा गया कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बातचीत बढ़ गई है.
उन्होंने आगे कहा कि तालिबान के साथ भारत शुरू से संपर्क में है. वह मुफ्त गेहूं, दवाई और पोलियो वैक्सीन दे रहा है. यूएई में भारत और तालिबान की मीटिंग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘भारत और तालिबान की मीटिंग खतरनाक और दिलचस्प दोनों है. दोनों की मीटिंग में टीटीपी और अफगानिस्तान पर पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक पर चर्चा हुई. इंडिया ने ईरान के चाबहार बंदरगाह के जरिए मदद का भरोसा दिलाया है.’
तीन फ्रंट से घिरा पाकिस्तान
युक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की पूर्व स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने पाकिस्तान की विदेश नीति की पोल खोल दी. उन्होंने समा टीवी से बातचीत में कहा, ‘भारत को मैनेज करना जरूरी है. क्योंकि पाकिस्तान के प्रति उसकी पॉलिसी बेहद आक्रामक है. ईरान से तनाव है. पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की जमीन पर एयर स्ट्राइक की है, जिससे हमारे संबंध तालिबान से भी खराब हुए हैं. पाकिस्तान तीन फ्रंट पर नहीं लड़ सकता.’
लोधी ने आगे कहा, ‘भारत कश्मीर पर बात नहीं करना चाहता है. लेकिन अफगानिस्तान के साथ हमें अपनी नई पॉलिसी बनाने की जरूरत है. ऐसा इसलिए क्योंकि अभी तक पाकिस्तान ने जो पॉलिस अपनाई है उससे वह नतीजे नहीं निकले, जिसकी उम्मीद थी.’
‘सरकार बचा रहा तालिबान’
कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत अफगानिस्तान में चीन की बढ़त को कमजोर करने के लिए तालिबान के करीब जा रहा है. वहीं पाकिस्तान में विशेष मामलों के एक्सपर्ट नजम सेठी ने कहा, ‘अफगान तालिबान को डर है कि टीटीपी और इस्लामिक स्टेट मिलकर अफगानिस्तान में गृहयुद्ध शुरू कर सकते हैं, इसलिए वह टीटीपी के खिलाफ कोई एक्शन नहीं ले रहा है, जिससे तकलीफ पाकिस्तान को हो रही है. तालिबान सिर्फ अपनी सरकार बचा रहा है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव चल रहा है. भारत ने यही मौका देखा. वहीं तालिबान ने देखा कि भारत के आने से पाकिस्तान को तकलीफ होगी इसलिए उसने भी भारत से दोस्ती बढ़ाई.’