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एक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत के युवा देश को एक बड़ी वैश्विक शक्ति के रूप में देखते हैं और मौजूदा विदेश नीति का समर्थन करते हैं। …और पढ़ें
भारत को वैश्विक ताकत के तौर पर देख रहे हैं युवा (फाइल फोटो)
युवा भारत को वैश्विक शक्ति, विदेश नीति को सही मानते हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन करते हैं।
पश्चिम एशिया को तरक्की और साझेदारी का नया द्वार मानते हैं।
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। भारत के ज्यादातर युवा देश को दुनिया की एक बड़ी ताकत के तौर पर देख रहे हैं और उनका मानना है कि मौजूदा विदेश नीति सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
हाल ही में विदेश नीति पर किए गए एक सर्वेक्षण में युवाओं ने संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं पर भरोसा जताया है और भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाए जाने का समर्थन किया।
युवा ब्रिक्स को भी पश्चिमी देशों के प्रभाव वाले वैश्विक ढांचे के विकल्प के रूप में देख रहे हैं। यानी अब देश के युवा सिर्फ नौकरी, पढ़ाई और इंटरनेट मीडिया तक सीमित नहीं है। वह दुनिया की राजनीति, देशों के रिश्तों और भारत की बढ़ती ताकत को भी बारीकी से समझ रहे हैं।
यही तस्वीर सामने आई है द ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की नई रिपोर्ट ‘फॉरेन पॉलिसी सर्वे : यंग इंडिया एंड द मिडिल ईस्ट’ में। सर्वेक्षण में देश के 19 शहरों के 18 से 35 वर्ष के पांच हजार से ज्यादा युवाओं से हुई बातचीत को शामिल किया गया है।
सर्वेक्षण में सबसे दिलचस्प बात यह सामने आई है कि भारत के युवा पश्चिम एशिया को अब सिर्फ तेल और व्यापार का इलाका नहीं मानते। उनके लिए यह क्षेत्र भारत की तरक्की, तकनीक और वैश्विक साझेदारी का नया दरवाजा बन चुका है।
युवाओं का मानना है कि भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा और चार देशों के रणनीतिक गठबंधन आइ2यू2 जैसे बड़े प्रोजेक्ट आने वाले समय में भारत को पश्चिम एशिया से और मजबूती से जोड़ेंगे। वहीं, पश्चिम एशिया में बसे युवाओं को भी उस क्षेत्र की आर्थिक तरक्की का वाहक बताया।
रिपोर्ट में संयुक्त अरब अमीरात सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। युवाओं ने माना कि यूएई के साथ भारत की बढ़ती दोस्ती देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दे सकती है। भारत-यूएई आर्थिक समझौते को भी युवाओं ने फायदे का सौदा बताया। नई पीढ़ी पश्चिम एशिया को भविष्य की सबसे अहम साझेदारी के रूप में देख रही है।
वहीं, पाकिस्तान और आतंकवाद को लेकर युवाओं का रुख बेहद सख्त दिखाई दिया। पहलगाम आतंकी हमले के बाद चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर का युवाओं ने खुलकर समर्थन किया।
इतना ही नहीं, पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई और सिंधु जल संधि को रोकने के फैसले को भी सही बताया गया।
रिपोर्ट में चीन के साथ सीमा तनाव और पाकिस्तान से होने वाले आतंकवाद को देश की सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौतियों में गिना गया है।
इस सर्वेक्षण ने साफ कर दिया कि भारत का युवा अब दुनिया को नए नजरिये से देख रहा है। उसे लगता है कि बदलती वैश्विक राजनीति में भारत अब किनारे खड़ा देश नहीं, बल्कि खेल बदलने वाली ताकत बन चुका है।
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