भास्कर संवाददाता| विदिशा
यह वाकई ऐसी खबर है, जो युवा पीढ़ी को भी सोचने पर मजबूर करती है कि अगर हौसला बुलंद हो, तो उम्र का हर पड़ाव छोटा पड़ जाता है।
विदिशा के पूर्व प्राचार्य केएन शर्मा ने 82 वर्ष की आयु में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एमए की परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास कर अनुकरणीय कार्य किया है। शर्मा जी, जो खुद पूर्व प्राचार्य और वरिष्ठ शिक्षक रहे हैं, उन्होंने रिटायरमेंट के पूरे 20 साल बाद यह मुकाम हासिल किया। उनकी यह यात्रा आज की उस पीढ़ी के लिए बड़ा सबक है, जो छोटी-छोटी मुश्किलों से हार मान लेती है। केएन शर्मा का जीवन केवल किताबों तक सीमित नहीं रहा। वे बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी हैं। उनका तालमेल पढ़ाई, खेल, समाज सेवा तीनों में कमाल का है। वे केवल पढ़ाई में ही अव्वल नहीं आए। वे अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में देश के लिए गोल्ड मेडल भी जीत चुके हैं। उनकी फिटनेस इस उम्र में भी युवाओं को शर्मिंदा करने वाली है। आज भी वे घर पर आराम करने के बजाय पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा के कामों में ग्राउंड पर एक्टिव हैं। वे युवाओं को स्वच्छ और स्वस्थ भारत बनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रहे हैं। केएन शर्मा ने बताया कि सफलता का कोई शॉर्टकट या दूसरा रास्ता नहीं होता। मेहनत और समर्पण ही एकमात्र जरिया हैं। युवाओं को मेरी यही सलाह है कि वे अपनी शिक्षा और कड़ी मेहनत पर ध्यान दें, ताकि वे अपने हर सपने को पूरा कर सकें।
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