देश में पेट्रोल-डीजल की कमी? दाम बढ़ने के बाद तेल कंपनी ने दिया अपडेट – AajTak

देशभर में पेट्रोल और डीजल के दाम में तीसरी बार इजाफा किया गया है. इस बार पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे की बढ़ोतरी की गई है, जबकि डीजल में 91 पैसे का इजाफा किया गया है. इस बढ़ोतरी के बाद, देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने शनिवार को कहा कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है. 
कंपनी ने यह भी कहा कि कुछ खुदरा दुकानों पर रिपोर्ट की गई ईंधन की कमी ‘ज्‍यादा स्‍थानीय’ है और अस्‍थायी है. यह क्षेत्रीय मांग सप्‍लाई में दिक्‍कत और बदलते बिक्री पैटर्न के कारण हुई है.
सरकारी स्‍वामित्‍व वाली फ्यूल सेलर कंपनी ने कहा कि कुछ आउटलेट्स पर मांग में बढ़ोतरी के कारण फसल कटाई के सीजन में डीजल की खपत में मौसमी बढ़ोतरी, रिटेल प्राइस उम्‍मीद से ज्‍यादा होने के कारण प्राइस पंपों से कस्‍टमर्स का ट्रांसफर और पब्लिक सेक्‍टर के आउटलेट्स पर संस्‍थागत खरीद में बढ़ोतरी थी. 
कंपनी ने कहा कि 1 से 22 मई के दौरान पेट्रोल की सेल में साल दर साल 14 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि डीजल की सेल में करीब 18 प्रतिशत की बढोतरी हुई, जो मांग में बढ़ोतरी को दिखाता है, जिसे कंपनी पूरे देश में पूरा करने में सक्षम रही. 
कंपनी ने कहा है कि आईओसी के 42,000 से ज्‍यादा फ्यूल स्‍टेशन के नेटवर्क में से सिर्फ ‘बहुत कम संख्‍या’ में आउटलेट्स में सप्‍लाई बाधित हुई है, जबकि ज्‍यादातर पंपों पर स्‍टॉक और सप्‍लाई सामान्‍य और पर्याप्‍त बनी हुई है. 
10 दिन में कितनी बढ़ी तेल की कीमतें
सरकारी सूत्रो के अनुसार 76 दिन तक सरकार और OMCs ने वैश्विक तेल संकट के बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की थी. 15, 19 और 23 मई 2026 की तीन स्‍टेप वाली बढ़ोतरी के बाद भी भारत में कुल बढ़ोतरी सिर्फ ₹4.74–₹4.82 प्रति लीटर रही है. 
दुनिया में जहां कई देशों में  20% से 90% तक ईंधन महंगा हुआ, भारत में सिर्फ करीब 5% बढ़ा है. पेट्रोल सबसे महंगा तेलंगाना, केरल, आंध्र प्रदेश में है, जबकि सबसे सस्ता गुजरात, यूपी, दिल्ली, हरियाणा, गोवा, असम में ईंधन की कीमतें हैं. 
केंद्र ने की टैक्‍स में कटौती 
मार्च 2026 में केंद्र ने पेट्रोल-डीजल पर ₹10 प्रति लीटर एक्साइज कट किया, जबकि डीजल एक्साइज शून्य तक लाया गया. सरकार का दावा है कि इस कटौती का करीब ₹30,000 करोड़ का बोझ सीधे केंद्र ने उठाया है. सरकार का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और होर्मुज संकट दोनों के दौरान भारत ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कीमतें कंट्रोल रखी है . OMCs को रोज़ाना लगभग ₹1000 करोड़ तक का नुकसान होने का दावा किया जा रहा है. मई की बढ़ोतरी के बाद नुकसान घटकर ₹750 करोड़ प्रतिदिन हो चुका है.  
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