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भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को वैधानिक रूप देने के लिए अमेरिकी टीम 1 जून को भारत आ रही है। …और पढ़ें
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राजीव कुमार, नई दिल्ली। व्यापार समझौते को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बन चुकी सहमति को वैधानिक प्रारूप देने के लिए अमेरिका की टीम एक जून को भारत आ रही है। व्यापार समझौता से जुड़े दोनों देशों के मुख्य वार्ताकार के नेतृत्व में चार जून तक नई दिल्ली में बैठक होगी।
इस बैठक में बाजार पहुंच, टैरिफ, निवेश, मोबिलिटी जैसे कई मुद्दों पर वार्ता होगी ताकि व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर के लिए उसके दस्तावेज को अंतिम रूप दिया जा सके। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक अभी अमेरिका में सभी देशों की वस्तुओं पर 10 प्रतिशत का शुल्क लगता है।
इस शुल्क की अवधि आगामी 24 जुलाई को समाप्त हो रही है। माना जा रहा है कि 24 जुलाई के बाद अमेरिका एक बार फिर से सभी देशों पर अलग-अलग शुल्क लगा सकता है। पिछले साल अप्रैल में अमेरिका ने भारत समेत दुनिया के 50 से अधिक देशों पर पारस्परिक शुल्क लगाने की घोषणा की थी।
भारत पर 25 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क लगाया गया था। रूस से तेल खरीदने को गलत मानते हुए अमेरिका ने भारत पर जुर्माने के रूप में पिछले साल अगस्त में और 25 प्रतिशत का शुल्क लगा दिया।
इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर वार्ता होती रही और 18 प्रतिशत शुल्क पर समझौते के लिए सहमति बनी। लेकिन इसी बीच अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने पारस्परिक शुल्क को अवैध ठहराते हुए राष्ट्रपति ट्रंप के पारस्परिक शुल्क के आदेश को अवैध करार दे दिया और आगामी 24 जुलाई तक सभी देशों पर 10 प्रतिशत का शुल्क लगने का आदेश दिया।
भारत अमेरिका के बीच इससे पहले ही सहमति बन सकती है। वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि भारत व्यापार समझौते के लिए उसी दर पर अब अपनी सहमति देगा जब भारत को अमेरिका के बाजार में प्रतिद्वंद्वी देशों पर बढ़त दिखेगी।
प्रतिद्वंद्वी देशों से कम शुल्क पर ही भारत व्यापार समझौता करना चाहेगा। पिछले साल 50 प्रतिशत शुल्क के बाद अमेरिका के बाजार में भारतीय निर्यात की बढ़ोतरी दर प्रभावित होने लगी थी। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, इसलिए अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को काफी अहम माना जा रहा है।
अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (यूएसटीआर) ने मार्च में, 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत, भारत समेत कई देशों के खिलाफ दो एकतरफा जांच शुरू की थी। ये जांच ज्यादा उत्पादन क्षमता व ग्लोबल सप्लाई चेन में जबरदस्ती मजदूरी खत्म करने में नाकाम रहने के मामलों पर आधारित थीं। भारत ने यूएसटीआर द्वारा उन दोनों जांचों में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
2025-26 में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर था। पिछले वित्त वर्ष के दौरान, भारत से अमेरिका को होने वाला निर्यात थोड़ा बढ़कर (0.92%) 87.3 अरब डालर हो गया जबकि आयात 15.95 प्रतिशत बढ़कर 52.9 अरब डालर हो गया। इस ट्रेड सरप्लस 2024-25 के 40.89 अरब डालर से घटकर 2025-26 में 34.4 अरब डालर हो गया।
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