12वीं तक पढ़ा आदमी करने लगा अल्ट्रासाउंड, 15 हजार तक लेता था फीस… चाइनीज डिवाइस से भ्रूण जांच की कहानी – AajTak

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महाराष्ट्र के पुणे जिले के दौंड तहसील में हैरान कर देने वाली कहानी सामने आई है. यहां एक कमरे में अवैध तरीके से भ्रूण लिंग जांच की जा रही थी. यह काम 12वीं तक पढ़ाई करने वाला आदमी कर रहा था. इसके लिए वह 5 से 15 हजार रुपये तक वसूलता था. भ्रूण जांच करने के बाद वह महिलाओं को डॉक्टरों के पास भेज देता था. पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है. 
एजेंसी के अनुसार, भ्रूण जांच करने वाला आरोपी कभी फार्मेसी कोर्स में दाखिला लेकर फेल हो चुका था, लेकिन इसके बावजूद उसने खुद को ‘मेडिकल विशेषज्ञ’ की तरह पेश कर एक अवैध नेटवर्क खड़ा कर लिया. जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह कोई छोटा-मोटा ऑपरेशन नहीं था. यह एक पूरी तरह से संगठित नेटवर्क था.
सबसे पहले महिलाओं को ‘कंसल्टेशन’ के नाम पर आरोपी तक लाया जाता था. यहां पर उनसे भ्रूण जांच के लिए 5,000 से 15,000 रुपये तक वसूले जाते थे. इस प्रॉसेस में आरोपी कथित तौर पर भ्रूण का जेंडर बताने का दावा करता था. अगर कोई केस आगे के स्टेप की ओर बढ़ता, तो उन महिलाओं को नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों या डॉक्टरों के पास रेफर किया जाता था, जहां आगे की प्रक्रिया कराई जाती थी.
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पुलिस जांच में सबसे अहम चीज जो सामने आई, वह थी एक पोर्टेबल चाइनीज अल्ट्रासाउंड डिवाइस. यह मशीन मोबाइल एप्लीकेशन से जुड़ी हुई थी और ब्लूटूथ के जरिए काम करती थी. इसी डिवाइस के आधार पर आरोपी भ्रूण की जांच करने का दावा करता था.
मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की मशीन का इस्तेमाल बिना लाइसेंस और बिना मेडिकल निगरानी के करना पूरी तरह अवैध है और PCPNDT Act का सीधा उल्लंघन है. पुलिस ने इस डिवाइस को जब्त कर लिया है और इसकी तकनीकी जांच की जा रही है.
सोशल मीडिया वीडियो से खुला राज
इस पूरे मामले का खुलासा एक वायरल वीडियो से हुआ. सोशल मीडिया पर एक क्लिप सामने आई, जिसमें कथित रूप से अवैध भ्रूण लिंग जांच की गतिविधियां दिख रही थीं. वीडियो वायरल होते ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और शिकायत दर्ज कराई गई. इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और धीरे-धीरे इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगीं.
मुख्य आरोपी ने पुलिस पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने 2024 से यह काम शुरू किया था. उसने बताया कि वह न तो डॉक्टर है, न ही उसके पास कोई मेडिकल डिग्री है. वह केवल 12वीं तक पढ़ा है और फार्मेसी कोर्स में फेल हो चुका है. इसके बावजूद उसने खुद को ‘विशेषज्ञ’ बताकर महिलाओं की जांच शुरू कर दी. पुलिस का कहना है कि वह हर महीने 15 से 50 महिलाओं की जांच करता था, हालांकि सभी मामलों में भ्रूण लिंग निर्धारण हुआ या नहीं, इसकी पुष्टि अभी जांच का हिस्सा है.
पैसे का खेल: 5,000 से 15,000 तक ‘फीस’
इस जांच के लिए 5,000 से 15,000 तक की वसूली की जाती थी. यह रकम सीधे आरोपी तक पहुंचती थी, जबकि नेटवर्क में जुड़े अन्य लोग रेफरल सिस्टम के जरिए हिस्सा पाते थे. पुलिस को जांच में पता चला है कि यह मामला सिर्फ दो लोगों तक सीमित नहीं है. कुछ अन्य डॉक्टरों और बिचौलियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. संदेह है कि यह एक बड़ा रैकेट हो सकता है, जो अलग-अलग जिलों तक फैला हुआ है. एक आरोपी को पहले ही एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया गया था और अब उससे इस केस में भी पूछताछ की जा रही है. इस पूरे मामले में आरोपियों पर केस दर्ज कर लिया गया है.
इस घटना ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बिना लाइसेंस यह नेटवर्क इतने समय तक कैसे चलता रहा? चाइनीज मशीन भारत में कैसे पहुंची? क्या इसके पीछे कोई बड़ा सप्लाई चैन है? और सबसे बड़ा सवाल- कितनी बार यह अवैध जांच पहले हो चुकी है? फिलहाल पुलिस जांच जारी है.
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