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दुबई में पले-बढ़े रायलन अनिल अभी-अभी एक CBSE स्टूडेंट के तौर पर बारहवीं क्लास में गए हैं. सिर्फ पांच दिनों के भीतर, उन्होंने भारत के दो सबसे बड़े एग्जामिनेशन सिस्टम – NEET और JEE एडवांस्ड में गंभीर कमियां ढूंढ निकालीं और उनको रिपोर्ट किया. वह निसर्ग और सार्थक जैसे युवा एथिकल हैकर्स के एक छोटे लेकिन बढ़ते हुए ग्रुप का हिस्सा हैं, जिन्होंने चुपचाप देश के एग्जाम सिस्टम को आईना दिखाया है. उन्होंने ‘aajtak.in’ से बात की, और बताया कि उन्होंने यह सब कैसे किया, उन्हें किस बात से डर लगा, और क्यों वह मानते हैं कि उनके जैसे स्टूडेंट्स को एंटी-नेशनल कहना बिल्कुल गलत है.
सवाल: पिछले पांच दिनों में आपने दो एथिकल हैक्स किए हैं, एक NEET के लेवल पर और एक JEE एडवांस्ड पर. इनमें आपको कितना समय लगा?
जवाब: JEE वाले में कुल मिलाकर लगभग तीन से चार घंटे लगे, और NEET वाले में मुझे करीब तीन घंटे लगे. लेकिन किसी और को ऐसा करने के लिए शायद मेरे लेवल की टेक्निकल काबिलियत की जरूरत होगी.
सवाल: आप अभी-अभी बारहवीं क्लास में आए हैं. आपको यह सब करना आता कैसे है?
जवाब: मुझे आठवीं क्लास से ही कंप्यूटर सिस्टम्स में दिलचस्पी रही है. मैं उनके साथ छेड़छाड़ करता था, लिनक्स (Linux) सिस्टम्स पर काम करता था, और वक्त के साथ मैं बग बाउंटी हंटिंग और CTFs जैसे हैकिंग गेम्स में आ गया. मैंने वहीं से बहुत कुछ सीखा.
सवाल: क्या आप आगे चलकर जिंदगी में खुद को यही करते हुए देखते हैं?
जवाब: हां. मैं एक CISO (चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर) या साइबर-सिक्योरिटी इंजीनियर बनना चाहता हूँ.
सवाल: 31 मई को आपने NEET की पहली कमी (vulnerability) सामने रखी. उसके बाद क्या हुआ?
जवाब: मैंने सबसे पहले इस कमी के बारे में CERT-In को भेजा, और उसके करीब दस मिनट बाद मैंने इसके बारे में ट्विटर पर पोस्ट कर दिया. फिर मैं सो गया. रात भर में यह बात बहुत फैल गई. सुबह मुझे NTA अधिकारियों का एक ईमेल मिला, जिसमें उन्होंने एक बड़ी कमी को उजागर करने के लिए मेरा शुक्रिया अदा किया था, और उन्होंने तुरंत पूरे पोर्टल को बंद कर दिया.
सवाल: NTA में किसने आपसे संपर्क किया था?
जवाब: अभिषेक सिंह, जो डायरेक्टर जनरल हैं. उन्होंने खुद मुझसे संपर्क किया और शुक्रिया कहा. मैंने उन्हें पूरा प्रोसेस समझाया, और फिर उन्होंने पोर्टल को बंद कर दिया.
सवाल: और JEE के मामले में क्या हुआ?
जवाब: वह काम और तेजी से हुआ. मैंने JEE की कमी के बारे में मि. अभिषेक को ईमेल किया और उन्होंने इसे IIT के हेड को फॉरवर्ड कर दिया. उन्होंने तुरंत रिस्पॉन्स दिया और कुछ ही घंटों में उस खराबी को ठीक कर दिया.
सवाल: क्या वह पोर्टल भी बंद कर दिया गया है?
जवाब: मुझे पक्का नहीं पता कि उन्होंने इसे बंद किया या नहीं, लेकिन मैं जानता हूँ कि कमी को ठीक कर दिया गया है और समस्या को सुलझा लिया गया है.
सवाल: जब सार्थक को पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी ने बुलाया था- वह इसके सामने गवाही देने वाले अब तक के सबसे कम उम्र के इंसान हैं. सोर्सेज बताते हैं कि उनके प्रेजेंटेशन के बाद ही CBSE में बड़ा बदलाव हुआ और दो बड़े ब्यूरोक्रेट्स का ट्रांसफर कर दिया गया. क्या आप अब तक की कार्रवाई से खुश हैं, या आपको लगता है कि अभी और कुछ किए जाने की जरूरत है?
जवाब: मैं अब तक की कार्रवाई से बेहद खुश हूं. निसर्ग को जो भी कमियां मिली थीं, CBSE ने उन सभी को ठीक कर दिया है, और NTA अधिकारियों ने भी मुझे बहुत जल्दी रिस्पॉन्स दिया. लेकिन मैं अब भी मानता हूं कि हमारे सरकारी सिस्टम्स में ऐसी कई कमियां हैं जिन्हें लगभग तुरंत ठीक करने की जरूरत है.
सवाल: आप दुबई में रहते हैं. दुनिया के बाकी हिस्सों के मुकाबले, क्या भारतीय सिस्टम और पोर्टल ज्यादा कमजोर हैं?
जवाब: मैंने दुनिया भर के पोर्टल्स को टेस्ट नहीं किया है, इसलिए मैं आपको एकदम सही अंदाजा नहीं दे सकता. मैंने जो कुछ देखा है, उसके हिसाब से भारतीय सिस्टम्स में सेंध लगाना मीडियम लेवल की चैलेंज था.
सवाल: आप जब इसे मीडियम लेवल का चैलेंज कह रहे हैं, तो वह किसी मंझे हुए प्रोफेशनल हैकर के लिए बहुत आसान हो सकता है. क्या आप इस बात से सहमत हैं?
जवाब: हो सकता है, लेकिन मैं इसका जवाब नहीं दे सकता.
सवाल: NEET को ऑनलाइन करने की मांग है, क्या आपको लगता है कि NTA के पास फिलहाल ऐसा करने की क्षमता और एक पुख्ता सिस्टम है? क्या इसे ऑनलाइन होना चाहिए?
जवाब: उनके पास ऑनलाइन जाने की क्षमता यकीनन है, लेकिन यह उनका फैसला है. मेरे दोस्तों से मैंने सुना है कि वे चाहते हैं कि NEET ऑनलाइन हो जाए. निजी तौर पर मुझे लगता है कि जब तक जरूरी सावधानी बरती जा रही है, तब तक इसे पेपर पर रखना भी ठीक है.
सवाल: क्या आप इसे Gen Z का एक बड़ा पल मानते हैं?
जवाब: मैं इसे बहुत से युवा टेक एक्सपर्ट्स के लिए एक बड़ा बदलाव मानता हूं. मेरे जैसे कई लोग इन पोर्टल्स को टेस्ट करने के लिए निसर्ग और सार्थक से इंस्पायर हुए हैं. और चूंकि ये सभी युवा सरकार के सिस्टम्स को टेस्ट कर रहे हैं, इसलिए मेरा मानना है कि हम एक बहुत ज्यादा सिक्योर देश बनने जा रहे हैं.
सवाल: कुछ स्टूडेंट्स जिन्होंने CBSE में मार्किंग की गड़बड़ियों के बारे में शुरुआत में आवाज उठाई थी, उन्हें ट्रोल किया गया, पाकिस्तानी कहा गया, एंटी-नेशनल कहा गया. क्या आप सिस्टम की कमियों को उजागर करने से डरे थे?
जवाब: शुरुआत में, हां. मेरे पोस्ट करने के ठीक बाद, यह बात बहुत बढ़ गई और मैं सचमुच डर गया था. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं. लेकिन एक बार जब NTA ने मुझसे संपर्क किया, तो मेरी बहुत सी चिंताएं दूर हो गईं. और मुझे लगता है कि हमें एंटी-नेशनल कहना बिल्कुल गलत है. अगर कुछ है भी, तो इन कमियों का मुद्दा उठाकर हम और ज्यादा नेशनलिस्ट बन रहे हैं.
सवाल: आप सब अभी भी नाबालिग हैं. जब आपने अपने पेरेंट्स से कहा कि आप भारत के एजुकेशन सिस्टम की कमियों को उजागर करने जा रहे हैं, तो उनका क्या रिएक्शन था?
जवाब: पहली चीज जो उन्होंने पूछी वह यह थी कि क्या मैं जेल जा रहा हूं. मुझे उन्हें जल्दी से समझाना पड़ा कि मैंने यह काम एथिकल तरीके से किया है. उसके बाद वे मेरे साथ थे. उन्होंने एक वकील से भी कॉन्टैक्ट किया ताकि यह पक्का हो सके कि मैं सेफ रहूं. आखिर में उन्हें मुझ पर गर्व था.
सवाल: क्या यह एक समस्या है कि जब कोई युवा सिस्टम को ठीक करने की कोशिश करता है, तो पहला ख्याल यही आता है कि क्या वह जेल जाएगा?
जवाब: मुझे नहीं लगता कि यह कोई समस्या है, कम से कम मेरे मामले में तो नहीं. मेरे पेरेंट्स ने जो पहला आर्टिकल पढ़ा था, उसमें लिखा था कि एक टीनएज लड़के ने NEET को हैक कर लिया है. ‘हैकिंग’ शब्द के साथ एक बड़ा कलंक जुड़ा हुआ है. मेरे पिता खुद IT बैकग्राउंड से आते हैं, इसलिए वह बहुत डर गए थे कि मैंने कुछ गैरकानूनी कर दिया है. लेकिन एक बार जब मैंने उन्हें समझा दिया, तो वे शांत और खुश थे.
सवाल: चलते-चलते कोई किस्सा शेयर कीजिए. सरकार, युवाओं और मीडिया से सराहना मिलने के बाद, इस समय आपके, सार्थक और निसर्ग के बीच कैसी बातचीत हो रही है?
जवाब: हर कोई खुश है कि सिस्टम ने आखिरकार हमें पहचाना और हमारी खोजी हुई कमियों पर ध्यान दिया. और हम खुश हैं कि हमारे सरकारी पोर्टल आखिरकार सिक्योर होंगे, और अब उस डेटा को लीक नहीं करेंगे जो वे पहले कर रहे थे.
सोलह साल की उम्र में, रायलन अनिल और उनके दोस्तों ने संसदीय समिति, सरकार और ब्यूरोक्रेट्स को सक्रिय होने और ध्यान देने पर मजबूर कर दिया है. उन्होंने एक आईना दिखाया, और देश के पास देखने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था.
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