भारतीय नौसेना के जांबाज विंग ‘मार्कोस’ (मरीन कमांडो) में शामिल होकर देश की सुरक्षा करने वाले एक जवान की जिंदगी को सड़क पर लापरवाही से दौड़ती एक कार ने हमेशा के लिए बदल दिया। पटियाला हाउस कोर्ट स्थित मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधीकरण (एमएसीटी) ने मामले में गंभीर रूप से घायल पीड़ित कमांडो को बड़ी राहत देते हुए 2.46 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
पीठासीन अधिकारी डॉ. अभिलाष मल्होत्रा की कोर्ट ने कार ड्राइवर की घोर लापरवाही को इस हादसे का जिम्मेदार माना और रॉयल सुंदरम जनरल इंश्योरेंस कंपनी एवं प्रतिवादी पक्ष को पीड़ित जवान के भविष्य के नुकसान और इलाज की भरपाई के लिए यह पूरी रकम अदा करने का निर्देश दिया।
फैसला सुनाते समय अदालत ने भावुक टिप्पणी करते हुए कहा कि पैसा किसी व्यक्ति के दर्द, सपनों और खोए हुए जीवन को वापस नहीं ला सकता, लेकिन यह उसे सम्मानजनक जीवन जीने में मदद जरूर कर सकता है। अदालत ने गहरा दुख जताते हुए कहा कि लखपत सिंह ने मार्कोस कमांडो बनने के लिए कई बेहद कठिन और कठोर प्रशिक्षणों को पार किया था, लेकिन इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे ने उनकी जिंदगी का रुख ही बदल दिया।
अदालत ने सड़कों पर बढ़ती गाड़ियों की संख्या और ड्राइवरों की लापरवाही पर चिंता जताते हुए कहा कि वाहन चलाते समय एक पल का गैर-जिम्मेदाराना रवैया न केवल किसी की पूरी जिंदगी बर्बाद कर सकता है, बल्कि देश को लखपत जैसे जांबाज कमांडो की सेवाओं से भी वंचित कर देता है।
यह हादसा वर्ष 2018 में 25 दिसंबर को दोपहर करीब दो बजे विशाखापट्टनम में हुआ था। मार्कोस जवान लखपत सिंह अपने एक दोस्त के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर जा रहे थे, तभी विशाखापट्टनम के तेलुगु थल्ली फ्लाईओवर पर पीछे से आ रही एक तेज रफ्तार और अनियंत्रित स्विफ्ट कार ने उनकी मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी।
दुर्घटना में लखपत सिंह सड़क पर दूर जा गिरे और उनके दाहिने हिस्से के हाथ, कोहनी, पसलियों और कूल्हे में कई गंभीर फ्रैक्चर हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां हालत नाजुक होने के कारण उन्हें कई दिनों तक आईसीयू में जीवन और मौत के बीच जूझना पड़ा और बाद में एयरलिफ्ट कर सैन्य अस्पताल ले जाना पड़ा।
हादसे के कारण लखपत 88 फीसदी तक शारीरिक रूप से दिव्यांग हो गए थे। मेडिकल बोर्ड द्वारा उन्हें स्थायी अनफिट घोषित कर दिया गया, जिसके चलते वह पूरी तरह से केवल डेस्क जॉब तक ही सिमट कर रह गए और अपनी दैनिक दिनचर्या के लिए भी सहायकों पर निर्भर हो गए।
अदालत ने मामले में सभी स्थिति को देखते हुए 1,65,69,404 रुपये की मूल मुआवजा राशि तय की, जिसमें भविष्य की आय का नुकसान, पदोन्नति न मिल पाने का हर्जाना, सहायक का खर्च और चिकित्सा व्यय शामिल हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका दायर होने की तारीख (19 दिसंबर 2020) से लेकर पूरी रकम जमा होने तक 9 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज जोड़ने का निर्देश दिया, जिससे मुआवजे की यह कुल रकम लगभग 2.46 करोड़ रुपये हो गई।
कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
संक्षिप्त विवरण
कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव: कृष्ण बिहारी सिंह लोकमत, आज समाज, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। कृष्ण बिहारी सिंह मौजूदा वक्त में भारत के प्रसिद्ध समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) की स्टेट टीम में डिप्टी चीफ एडिटर (कंटेंट क्रिएटर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि: लॉ (एलएलबी) और साइंस (बी.एससी, बायोलॉजी) से ग्रेजुएट कृष्ण बिहारी सिंह ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए और एमफिल किया है। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ विधि विषय की गहरी समझ रखते हैं। अखबार से लेकर टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया के बदलावों के साक्षी रहे कृष्ण बिहारी सिंह पाठकों की पसंद और बदलते ट्रेंड को बारीकी से समझते हैं।
रिपोर्टिंग एवं विशेषज्ञता: कृष्ण बिहारी सिंह राजनीति, जिओ पॉलिटिक्स, जन सरोकार और क्राइम की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। कृष्ण बिहारी सिंह ने अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में नेशनल, इंटरनेशनल, बिजनेस, रिसर्च एवं एक्सप्लेनर और संपादकीय टीमों के साथ लंबे समय तक काम किया है। यही वजह है कि खबर के पीछे छिपे एजेंडे की समझ रखने वाले केबी समसामयिक घटनाक्रमों पर गहरा विश्लेषण करते हैं।
पत्रकारिता का उद्देश्य: कृष्ण बिहारी सिंह ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ काम करते हैं। केबी का मानना है कि एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी उसका राष्ट्र और लोक कल्याण है। केबी खबरों को पहले प्रमाणिकता की कसौटी पर कसते हैं, फिर आम जनमानस की भाषा में उसे परोसने का काम करते हैं। केबी का मानना है कि रिपोर्टिंग का उद्देश्य पाठकों को न केवल सूचना देना वरन उन्हें सही और असल जानकारी देना है।
आरएसएसविज्ञापन र॓टहमार॓ साथ काम करेंहमारे बारे मेंसंपर्क करेंगोपनीयतासाइट जानकारी
Advertise with usAbout usCareers Privacy Contact usSitemapCode Of Ethics
Partner sites: Hindustan TimesMintHT TechShineHT AutoHealthshotsHT SmartcastFAB Play