पाकिस्तान एक बार फिर पानी के लिए रोया है। सिंधु जल समझौते के रद्द होने से पाकिस्तानी हुकूमत इस कदर निराश है कि अब पाकिस्तान ने इसके लिए युद्ध तक की गीदड़भभकी दे दी है। पाकिस्तान ने हाल ही में एक बयान में कहा कि भारत द्वारा पानी को रोकना युद्ध की कार्रवाई होगी। दरअसल भारत ने बीते दिनों एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि सिंधु जल समझौते को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है और आने वाले दिनों में पाकिस्तान को एक बूंद पानी भी नहीं दिया जाएगा। पाकिस्तान इसी बयान पर बुरी तरह बौखला गया है।
इससे पहले भारत के केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सीआर पाटिल ने एक बयान में कहा था कि पाकिस्तान को पानी न देने की योजना पर काम शुरू हो गया है। बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का हवाला देते हुए कहा था, “सिंधु जल समझौते को फिलहाल स्थगित रखा गया है। जब से प्रधानमंत्री मोदी ने यह फैसला लिया है, तब से हर संभव कोशिश की जा रही है कि आने वाले सालों में पानी की एक भी बूंद पाकिस्तान ना जाए।”
उन्होंने आगे कहा था कि गृह मंत्री अमित शाह खुद व्यक्तिगत रूप से इस मामले की निगरानी कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा था, “मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि हमारा काम निश्चित समय सीमा पर आगे बढ़ रहा है और आने वाले सालों में पाकिस्तान को भारत से एक बूंद पानी भी नसीब नहीं होगा।”
भारत से मिले इस झटके के बाद पाकिस्तान बुरी तरह घबरा गया। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने एक बयान जारी कर कहा कि भारत के इस कदम से 25 करोड़ से अधिक पाकिस्तानियों पर संकट छा सकता है। वहीं उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन भी बताया। अंद्राबी ने अपने बयान में कहा, “पाकिस्तान पानी को एक राजनीतिक उपकरण या दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करने के विचार को पूरी तरह खारिज करता है।” उन्होंने आगे गीदड़भभकी देते हुए कहा कि पानी को रोकने की किसी भी कोशिश के गंभीर नतीजे भुगतने होंगे और इसे UN चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत युद्ध की कार्रवाई माना जा सकता है।
बता दें कि भारत ने बीते साल जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया था। भारत ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद के जरिए खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। तब से पाकिस्तान बार बार रोता नजर आया है। पाकिस्तान ने वैश्विक मंचों पर भी इस मुद्दे पर उठाया है। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता स्थगित ही रहेगा।
इससे पहले 1960 में हुए सिंधु जल संधि के तहत 3 पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी मुख्य रूप से पाकिस्तान को मिला था। वहीं 3 पूर्वी नदियों, रावी, ब्यास और सतलुज का पानी भारत के हिस्से में आया था। हालांकि भारत को इन तीन पश्चिमी नदियों के पानी का भी इस्तेमाल करने का अधिकार था। अब भारत सरकार ने चेनाब नदी के पानी को डायवर्ट करने की योजना बनाई है। इस प्रोजेक्ट के तहत चेनाब के लगभग 1.9 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी को टनल के जरिए ब्यास में डाइवर्ट कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि चेनाब नदी का पानी पाकिस्तान में खेती के लिए लाइफलाइन है। भारत अगर इसका पानी ब्यास नदी की तरफ मोड़ता है, तो पहले से सूखे का मार झेल रहा पाक का पंजाब प्रांत अकाली के दलदल में फंस सकता है।
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