क्या है TMR? पहाड़ों पर एवलांच में सेना के साथ मिलकर बचाई सैकड़ों जान – Hindustan Hindi News

भारत के दुर्गम और अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों में आपदा प्रबंधन और बचाव कार्यों को एक नई दिशा मिली है। देश के पहले पेशेवर माउंटेन और एवलांच रेस्क्यू संगठन टीएमआर (TMR) ने नागरिक विशेषज्ञता और सैन्य क्षमता के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण किया है। इस अभूतपूर्व बदलाव के पीछे मुख्य चेहरा हैं हेमंत सचदेवा, जिन्होंने अपने दूरदर्शी नेतृत्व से भारत की आपदा तैयारियों को वैश्विक स्तर पर ला खड़ा किया है। पिछले एक दशक में हेमंत सचदेवा और उनकी टीम ने न केवल सैकड़ों बेशकीमती जानें बचाई हैं, बल्कि भारतीय सेना के साथ मिलकर सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा का एक नया सुरक्षा चक्र तैयार किया है।

हेमंत सचदेव के नेतृत्व में TMR ने पिछले दस वर्षों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत की उत्तरी सीमाओं के बेहद खतरनाक और संवेदनशील इलाकों में 16 विशेष बचाव दलों को तैनात किया गया। इन टीमों ने सीधे तौर पर लगभग 400 भारतीय सैनिकों की जान बचाई है। साल 2017 में हिमस्खलन के कारण होने वाली मौतों की संख्या 38 थी। TMR की सटीक तैयारियों, आधुनिक तकनीकों और त्वरित प्रतिक्रिया के कारण वर्ष 2023-24 तक यह आंकड़ा सिमटकर शून्य पर पहुंच गया। यह भारत के आपदा प्रबंधन इतिहास में एक मील का पत्थर है।

चाहे पहाड़ों में हिमस्खलन हो, भूस्खलन हो या फिर अचानक आई बाढ़ हेमंत सचदेवा के नेतृत्व में TMR की टीमों ने हर मोर्चे पर अपनी काबिलियत साबित की है। 2022 में माउंट त्रिशूल बचाव अभियान, 2022 में ही मणिपुर भूस्खलन, 2023 में सिक्किम की अचानक आई ग्लेशियर बाढ़ और 2024 में केरल के वायनाड की भीषण बाढ़ के दौरान इन्होंने कई जानें बचाई हैं।

सैन्य और नागरिक विशेषज्ञता को एक साथ लाने के लिए हेमंत सचदेवा ने भारतीय सेना के साथ कई एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। सेना की उत्तरी, पूर्वी और मध्य कमांड के साथ सफल समझौतों के बाद सितंबर 2024 में सेना मुख्यालय के साथ एक ऐतिहासिक मील का पत्थर समझौता किया गया। इस साझेदारी ने देश की सुरक्षा और बचाव व्यवस्था को अभूतपूर्व मजबूती दी है।

TMR का प्रभाव केवल सेना तक सीमित नहीं है। यह संगठन नागरिक आपदा प्रतिक्रिया और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित करता है, जो देश के आम नागरिकों और स्थानीय प्रशासन को संकट के समय आत्मनिर्भर बनाते हैं। आज के समय में जब जलवायु परिवर्तन के कारण पहाड़ी इलाकों में आपदाएं तेजी से बढ़ रही हैं, हेमंत सचदेवा जैसे दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता की आवाज बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
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