ग्रेटर नोएडा, आशीष धामा। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की हड़ताल से अधिकांश सभी स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गई है। तीसरे दिन भी कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इस दौरान उनकी जिम्स प्रशासन के साथ बैठक भी हुई। हड़ताल कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर अस्पताल में सेवाएं दी। उस समय संस्थान ने उन्हें स्थाई नौकरी का आश्वासन दिया था, लेकिन अब अपने वादे से मुकर गए। कर्मचारी गौरव, कल्याण, अजय, अमित, मोहन, अंकित, दिनेश आदि का कहना है कि वे कई वर्षों से आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं मिलती हैं और न ही नौकरी की सुरक्षा।
हर समय रोजगार समाप्त होने का डर बना रहता है। इसी कारण उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। उनका उद्देश्य अस्पताल की व्यवस्था को प्रभावित करना नहीं है, बल्कि अपने अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा के लिए आवाज उठाना है। उन्होंने प्रशासन और शासन से जल्द हस्तक्षेप कर उनकी समस्याओं का समाधान कराने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, इन कर्मचारियों की हड़ताल के तीन दिन बाद संस्थान में सभी प्रकार की सेवाएं लगभग ठप हो गई है। जिम्स के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. आरके गुप्ता का कहना है कि हड़ताल के चलते सभी सुविधाएं संचालित करना चुनौती बन गया है। मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। कर्मचारियों को समझाने के प्रयास जारी है।
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