ट्रंप-मोदी मुलाक़ात के बाद क्या अमेरिका से भारत के संबंध बेहतर हो पाएंगे? – BBC

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से एक साल से ज्यादा समय बाद पहली द्विपक्षीय मुलाकात की.
यह बैठक G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई, जहाँ मेजबान देश फ़्रांस ने भारत के साथ-साथ ब्राज़ील, मिस्र, केन्या और दक्षिण कोरिया को भी आमंत्रित किया था.
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब दोनों देशों के बीच कई विवाद चल रहे थे, जिनमें हाल ही में अमेरिकी हमले में भारतीय नाविकों की मौत भी शामिल थे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप से कहा, ''पश्चिम एशिया में शांति के प्रयास में प्रगति हुई है इसके लिए मैं आपका अभिनंदन करता हूं.''
उन्होंने कहा, '' आपके इन प्रयासों के कारण पश्चिम एशिया में शांति की एक नयी किरण नज़र आ रही है और हम आशा करते है कि यह स्थिर और स्थायी शांति बनेगी.''
''आप और हम सभी इस बात से सहमत हैं कि होर्मुज़ का खुला रहना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ही अनिवार्य है. हम हमेशा कहते रहे हैं कि फ़्रीडम ऑफ़ नेविगेशन सुनिश्चित होना चाहिए. आप जानते हैं कि मेरीटाइम ट्रेड की दुनिया में भारत के लाखों सीफ़ेरर्स (नाविक) आज दुनिया के अलग-अलग समंदर में सेवाएं दे रहे है और मैं समझता हूँ कि उनकी सुरक्षा भी उतनी है महत्वपूर्ण है. मुझे पूरा विश्वास है कि समझौते में सीफ़ेरर्स की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी और उसे प्राथमिकता मिलेगी.''
28 फ़रवरी 2026 को अमेरिका और इसराइल ने मिलकर ईरान पर हमले किए, जिसमें उस समय के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई और कुछ अन्य अधिकारी मारे गए.
भारत में इस बैठक पर कांग्रेस पार्टी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी.
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उसने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "प्रधानमंत्री ने ओमान की खाड़ी में अमेरिकी हमले में मारे गए तीन भारतीय नाविकों का कोई ज़िक्र नहीं किया. सिर्फ राष्ट्रपति ट्रंप ने सवालों के जवाब दिए. उन्होंने भारतीय नागरिकों की मौत पर भी जवाब दिया. खुद को 'विश्वगुरु' बताने वाले फिर भी चुप रहे. यह बहुत ख़राब है और बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है."
शिखर सम्मेलन में अपने पहले के बयान में पीएम मोदी ने कहा था, "आज दुनिया में संसाधनों की कमी नहीं है, बल्कि विश्वास की कमी है. और हमारी साझेदारी का भविष्य इसी विश्वास को बनाने पर निर्भर करता है."
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बैठक के बाद हुई प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सारे सवाल राष्ट्रपति ट्रंप से ही पूछे गए, जबकि पीएम मोदी उनके पास बैठे रहे.
जब एक पत्रकार ने उनसे भारत में उनके कुछ फ़ैसलों से पैदा हुई परेशानियों के बारे में पूछा, तो ट्रंप ने कहा, "मुझे नहीं पता कि कोई परेशानी कहाँ हुई होगी."
जब उनसे 'अमेरिकी हमलों में भारतीय नाविकों की मौत' के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "यह एक कठिन पेशा है."
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह 'संवेदना जताना' चाहते हैं, तो उन्होंने कहा कि हाँ, और फिर जोड़ा, "ऐसी घटनाएँ हमेशा होती रहती हैं," लेकिन इसका मतलब साफ़ नहीं बताया.
जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत पश्चिम एशिया में कोई भूमिका निभाता है, तो उन्होंने कहा कि भारत "हर चीज़ में बड़ी भूमिका निभाता है," लेकिन इसके बारे में ज्यादा विस्तार से बात नहीं की.
ट्रंप ने कुछ और भी बयान दिए. जैसे, "भारत अमेरिका में बहुत पैसा लगा रहा है. इससे वहां नौकरियां पैदा हो रही हैं. हम (अमेरिका और भारत) इससे ज्यादा क़रीब नहीं हो सकते."
पीएम मोदी के साथ शुरुआती बयान में उन्होंने कहा, "हमारा एक जी-2 आने वाला है, आप में से ज्यादातर जानते हैं कि जी-2 क्या है," लेकिन उन्होंने इसका भी ज्यादा ब्योरा नहीं दिया.
अभी तक न भारत और न ही अमेरिका ने इस बैठक का आधिकारिक ब्योरा जारी किया है.
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बीबीसी ने ट्रंप और मोदी की इस मुलाक़ात के बारे में पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुणायत से बात की.
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह एक अहम और रिश्तों की फिर से शुरुआत वाली बैठक थी. दोनों नेता 16 महीने से नहीं मिले थे. इस बार पहले जैसा गले मिलना नहीं दिखा, लेकिन ट्रंप फिर भी प्रधानमंत्री की तारीफ़ करने की कोशिश कर रहे थे. जो हमने देखा, उसके अनुसार यह जरूरी था कि मुश्किल मुद्दों पर बात हो. जैसे हमारे नाविकों की हत्या और उनकी सुरक्षा. अभी भी व्यापार समझौते जैसे कई मुद्दे बाकी हैं, लेकिन यह बैठक आगे बढ़ने में मदद करेगी."
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार प्रोफ़ेसर मुक्तदर ख़ान ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने क्वाड समूह (जिसमें भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका शामिल हैं) के भविष्य के बारे में ज्यादा नहीं कहा, लेकिन उन्होंने 'जी-2' का ज़िक्र किया, जो अमेरिका और चीन के विज़न की बात करता है. यह भारत के लिए अच्छा संकेत नहीं है. मैं यह भी कहना चाहता हूं कि ट्रंप इस बैठक के लिए ज्यादा तैयार नहीं लगे, जबकि पीएम मोदी ज्यादा तैयार दिखे. हमने उन्हें नोट्स देखकर अपनी बात रखते हुए देखा."
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बैठक से कुछ घंटे पहले, इंडोपैकॉम का नाम बदलकर फिर से यूएसपैकॉम कर दिया गया.
दिन में पहले, अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पोस्ट किया, "यू.एस. पैसिफ़िक कमांड… फिर से वापस आ गया है."
जानकारी के लिए, यू.एस. पैसिफिक कमांड (यूएसपैकॉम) अमेरिका की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी सैन्य कमान में से एक है.
इसे 2018 में यूएसपैकॉम (यू.एस. इंडो-पैसिफिक कमांड) नाम दिया गया था, ताकि 'हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बढ़ते संबंधों को दिखाया जा सके'.
तब इसे "बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक" फैली कमान कहा गया था.
भारत और विदेश के कई विशेषज्ञ इस फैसले और इसके समय को लेकर हैरान हैं.
उनका सवाल है कि क्या इसका मतलब यह है कि अमेरिका चीन के बेहतर होते रिश्तों के बीच भारत की भूमिका कम हो रही है?
अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने इस बदलाव का कोई खास कारण नहीं बताया. हालांकि उसने कहा कि यूएसपैकॉम का जिम्मेदारी वाला क्षेत्र, जो अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला है.बिल्कुल वैसा ही रहेगा."
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वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.
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डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी 2025 में अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में पद संभाला.
उनके शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने किया, और एक महीने के अंदर ही पीएम मोदी की ट्रंप से मुलाक़ात भी हो गई.
लेकिन भारत पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव और बाद में हुए संघर्ष विराम के बाद भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में कुछ दूरी आ गई.
इसका मुख्य कारण यह था कि भारत मानता था कि यह मामला सिर्फ़ भारत और पाकिस्तान के बीच का है, इसमें अमेरिका या किसी अन्य देश की कोई भूमिका नहीं है.
वहीं ट्रंप लगातार कहते रहे कि उनकी सरकार ने इस संघर्ष को रोकने में भूमिका निभाई.
इसके बाद अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर 50 फ़ीसदी तक टैरिफ़ लगाया, जिसे बाद में हटा लिया गया.
कुछ महीने पहले ट्रंप ने एक पॉडकास्ट भी साझा किया था, जिसमें भारत को 'बहुत खराब जगह' कहा गया था. इस बयान की अमेरिका में भी आलोचना हुई थी.
इस साल की शुरुआत में भारत और अमेरिका ने व्यापार वार्ता में प्रगति की घोषणा की, लेकिन अभी तक अंतिम समझौता नहीं हो पाया है.
हालांकि, दोनों नेताओं के बीच निजी स्तर पर बातचीत में हमेशा अच्छे और दोस्ताना शब्द रहे हैं.
जैसे 10 जून को ट्रंप ने पीएम मोदी को 'भारत के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने' पर बधाई दी, जिसका जवाब मोदी ने भी दिया.
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इस बैठक के अलावा, पीएम मोदी ने कई द्विपक्षीय बैठकें भी कीं.
इनमें यूरोपीय संघ के नेताओं, जर्मनी के चांसलर, यूएई के राष्ट्रपति, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और कनाडा के पीएम के साथ मुलाकात शामिल थी.
उन्होंने इसके अलावा कई अन्य विश्व नेताओं से भी बातचीत की.
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