सर्किल रेट दोगुना होने से बढ़ी रजिस्ट्री लागत तत्काल प्रभाव से सरकार के नए नियम को लागू किया गया पेज पांच की लीड छपरा, नगर प्रतिनिधि। सारण में अब जमीन खरीदना पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है। वर्षों से स्थिर पड़ी जमीन के सरकारी मूल्य यानी सर्किल रेट में राज्य सरकार ने व्यापक बढ़ोतरी कर दी है। नए सर्किल रेट लागू होने के बाद शहरी क्षेत्रों में जमीन का सरकारी मूल्य लगभग दोगुना हो गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इसमें करीब 60 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इस बदलाव का सीधा असर जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर पड़ेगा। जमीन खरीदने वालों को अब रजिस्ट्री शुल्क और स्टांप शुल्क के रूप में पहले से कहीं अधिक राशि खर्च करनी होगी।
जिले में लंबे समय से जमीन की वास्तविक बाजार कीमत और सरकारी मूल्य के बीच भारी अंतर बना हुआ था। कई प्रमुख इलाकों में बाजार भाव सरकारी दर से आठ से दस गुना तक अधिक हो चुका था, लेकिन रजिस्ट्री पुराने सर्किल रेट के आधार पर ही हो रही थी। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा था। इसी विसंगति को दूर करने के लिए मद्य निषेध, उत्पाद व निबंधन विभाग के निर्देश पर फरवरी माह में एमवीआर (मिनिमम वैल्यू रजिस्टर) का पुनरीक्षण कराया गया था। अब संशोधित दरों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
70.84 लाख रुपये प्रति डिसमिल पहुंचा सलेमपुर, पुरानी गुरहट्टी का सर्किल रेट छपरा शहर के प्रमुख व्यावसायिक इलाके नए सर्किल रेट के बाद सबसे महंगे क्षेत्रों में शामिल हो गए हैं। सलेमपुर, पुरानी गुरहट्टी और साहेबगंज से थाना चौक तक के व्यावसायिक क्षेत्रों में जमीन का सरकारी मूल्य पहले लगभग 35.42 लाख रुपये प्रति डिसमिल था। नई दरें लागू होने के बाद यह बढ़कर करीब 70.84 लाख रुपये प्रति डिसमिल पहुंच गया है। वहीं इन इलाकों में आवासीय जमीन का सर्किल रेट पहले लगभग 13.57 लाख रुपये प्रति डिसमिल था, जो अब बढ़कर करीब 27 लाख रुपये प्रति डिसमिल हो गया है। नगरपालिका चौक, भगवान बाजार, मौना चौक, गुदरी बाजार और अन्य प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में भी जमीन की सरकारी कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इन इलाकों में अब जमीन की रजिस्ट्री कराना आम लोगों के लिए पहले की अपेक्षा अधिक खर्चीला साबित होगा। रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि नए सर्किल रेट का असर आने वाले दिनों में बाजार कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
जिले में कुल छह निबंधन कार्यालयों के माध्यम से जमीन की खरीद-बिक्री का पंजीकरण किया जाता है। नए सर्किल रेट लागू होने के बाद इन कार्यालयों में होने वाली सभी रजिस्ट्रियां संशोधित दरों के आधार पर ही शुक्रवार को की गई। इससे सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, वहीं खरीदारों और निवेशकों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा। निबंधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सर्किल रेट में वृद्धि से जमीन की वास्तविक बाजार कीमत और सरकारी मूल्य के बीच का अंतर कम होगा। हालांकि मध्यम वर्ग और पहली बार घर या प्लॉट खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह फैसला झटका साबित हो सकता है। फिलहाल सारण में जमीन खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों को अब अपनी जेब पहले से अधिक ढीली करनी पड़ेगी。
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