सहरसा, वरीय संवाददाता। शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और दस्तावेजों की सत्यता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। टीआरई-1 के तहत कक्षा एक से पांच तक के विद्यालयों में पदस्थापित 25 शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। प्रारंभिक जांच के दौरान इन शिक्षकों के शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों में विभिन्न प्रकार की अनियमितताएं सामने आई हैं। इनमें सीटेट प्रमाणपत्र में त्रुटियां, विभागीय पोर्टल पर फोटो का मिसमैच होना तथा डीएलएड प्रमाणपत्रों में गड़बड़ियां प्रमुख रूप से शामिल हैं।
शिक्षा विभाग द्वारा की गई जांच में पाया गया कि कुछ शिक्षकों के द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटेट) के प्रमाणपत्रों में दर्ज सूचनाएं विभागीय अभिलेखों से मेल नहीं खा रही हैं। वहीं कुछ मामलों में विभागीय पोर्टल पर अपलोड की गई तस्वीर और अभ्यर्थी के मूल दस्तावेजों में लगी तस्वीरों के बीच अंतर पाया गया है। इसके अलावा एक दर्जन से अधिक शिक्षकों के डीएलएड प्रमाणपत्रों की वैधता और विवरण को लेकर भी संदेह उत्पन्न हुआ है। विभाग द्वारा नियुक्ति से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। इसी दौरान कई मामलों में प्रमाणपत्रों और ऑनलाइन रिकॉर्ड के बीच असंगति सामने आई। इसके बाद संबंधित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए निर्धारित अवधि के भीतर अपना पक्ष रखने और आवश्यक प्रमाण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया मिली गड़बड़ियों के आधार पर किसी शिक्षक को दोषी नहीं माना गया है। सभी शिक्षकों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। यदि संबंधित शिक्षक संतोषजनक जवाब और वैध दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं तो मामले का निष्पादन नियमों के अनुसार किया जाएगा। हालांकि, यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया या दस्तावेजों में फर्जीवाड़े की पुष्टि होती है, तो संबंधित शिक्षकों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी। जांच के दौरान विशेष रूप से डीएलएड प्रमाणपत्रों की पड़ताल की जा रही है। विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि नियुक्ति के समय प्रस्तुत किए गए प्रशिक्षण प्रमाणपत्र मान्यता प्राप्त संस्थानों से जारी हुए हों और उनमें अंक, पंजीकरण संख्या तथा अन्य विवरण सही हों। कई मामलों में प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए संबंधित संस्थानों और परीक्षा निकायों से भी जानकारी मांगी जा रही है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में दस्तावेजों की शुद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी प्रकार की त्रुटि, तथ्य छिपाने या गलत जानकारी प्रस्तुत करने को गंभीरता से लिया जाता है। जिस कारण प्रमाणपत्र सत्यापन अभियान को और अधिक सख्ती से लागू किया गया है। शिक्षा विभाग का मानना है कि विद्यालयों में नियुक्त शिक्षकों की योग्यता और पात्रता को लेकर किसी भी प्रकार की शंका नहीं रहनी चाहिए। जिला शिक्षा पदाधिकारी हेमचंद्र ने बताया कि जांच के क्रम में 25 शिक्षकों के दस्तावेजों में विभिन्न प्रकार की विसंगतियां सामने आई हैं। सभी संबंधित शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्राप्त स्पष्टीकरण और उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डीईओ ने स्पष्ट किया कि विभाग का उद्देश्य नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखना है। यदि किसी स्तर पर दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा, कूटरचना या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित शिक्षक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ अन्य वैधानिक कदम भी उठाए जा सकते हैं। शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई से कई शिक्षक अपने दस्तावेजों की दोबारा जांच कराने और रिकॉर्ड को अद्यतन करने में जुट गए हैं। वहीं विभाग का कहना है कि जिन मामलों में संदेह की स्थिति होगी, उनकी गहन जांच कराई जाएगी। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि संबंधित शिक्षकों को राहत मिलेगी या उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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