रांची, हिन्दुस्तान टीम। रांची की प्रतिभाएं एक मंच पर जुटीं तो सभी ने दिल खोलकर बच्चों का स्वागत किया। अवसर था हिन्दुस्तान प्रतिभा सम्मान समारोह का। मोरहाबादी के आर्यभट्ट सभागार में हिन्दुस्तान की ओर से प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में जैक बोर्ड के साथ सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड प्रो सरोज शर्मा, विशिष्ट अतिथि जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज, साईं यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ एसपी अग्रवाल, गोल इंस्टीट्यूट रांची के हेड रामाकांत शुभम, एनआईबीएम के निदेशक एमके गुप्ता आदि ने विद्यार्थियों को मेडल और सर्टिफिकेट प्रददान कर सम्मानित किया। हिन्दुस्तान के प्रतिभा सम्मान समारोह में शनिवार को आर्यभट्ट सभागार युवा ऊर्जा-प्रतिभा से सराबोर रहा। नई ऊमंग और सपनों को सच करने का जज्बा दिखा। अतिथियों ने भी प्रतिभावान छात्रों का हौसला बढ़ाया और उच्च शिक्षा के साथ बेहतर भविष्य के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। इस दौरान उन्होंने छात्रों को निरंतर मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अवसरों का लाभ उठाने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की सलाह दी। मंच संचालन भारती ओझा ने किया। इस दौरान शहर के गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में अभिभावक मौजूद थे.
मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो सरोज शर्मा ने हिन्दुस्तान प्रतिभा सम्मान में उपस्थित सभी मेधावियों को अपने संबोधन से लक्ष्य साक्ष्य के लिए प्रेरित किया। कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 यूनेस्को के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य शिक्षा को अधिक समावेशी, गुणवत्तापूर्ण और भारत केंद्रित बनाना है। उन्होंने कहा कि इसके तहत वर्ष 2030 तक स्कूली शिक्षा में शत-प्रतिशत साक्षरता और वर्ष 2035 तक उच्च शिक्षा में 50 प्रतिशत सकल नामांकन दर (जीईआर) प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
हिन्दुस्तान के प्रतिभा सम्मान समारोह की मुख्य अतिथि रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो सरोज शर्मा ने छात्रों को जीवन में सफल होने के महत्वपूर्ण टिप्स दिए। विशेष रूप से नई शिक्षा नीति से छात्र-छात्राओं को होने वाले लाभ की जानकारी दी। कहा- नई शिक्षा नीति- 2020 विद्यार्थियों की रुचि, कौशल और जुनून को केंद्र में रखकर तैयार की गई है। अब विद्यार्थियों पर सिर्फ इंजीनियर, डॉक्टर या चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का दबाव नहीं होगा, बल्कि वे अपनी पसंद, क्षमता और रुचि के अनुरूप विषयों का चयन कर सकेंगे। उन्होंने अभिभावकों से भी बच्चों की रुचि और प्रतिभा का सम्मान करने की अपील की.
कुलपति ने बताया कि नई शिक्षा नीति- 2020 में अनुसंधान और नवाचार को विशेष महत्व दिया गया है। चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को शोध व परियोजनाओं से जुड़ने के अधिक अवसर प्राप्त होंगे। इसके साथ ही मल्टीपल एंट्री, मल्टीपल एग्जिट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित शिक्षण और लचीली शैक्षणिक व्यवस्था जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। नई व्यवस्था के अंतर्गत तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के बाद दो वर्षीय और चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के बाद एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम का प्रावधान किया गया है.
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और भारतीय ज्ञान प्रणाली को भी शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाती है। भारत का गौरवशाली इतिहास गणित, विज्ञान, रसायन विज्ञान और अर्थशास्त्र जैसे क्षेत्रों में विश्व को दिशा देने वाला रहा है। नई नीति विद्यार्थियों को अपनी जड़ों, संस्कृति और ज्ञान परंपरा से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करेगी। प्रो शर्मा ने कहा कि रांची विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय की ओर से करियर गाइडेंस, नेट और जेआरएफ परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग सहित कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे तथा उनकी प्रतिभा को उचित सम्मान प्राप्त होगा.
चुनौतियों का सामना करने के लिए भी स्वयं को तैयार करें : बादल राज
रांची। हिन्दुस्तान प्रतिभा सम्मान समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में रांची जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज ने कहा कि आज के छात्र केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने तक सीमित न रहें, बल्कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी स्वयं को तैयार करें। उन्होंने कहा कि 10वीं और 12वीं कक्षा छात्रों के जीवन की महत्वपूर्ण सीढ़ियां हैं, जो उनके भविष्य की दिशा निर्धारित करती हैं, लेकिन अपनी शिक्षा और अभिभावकों की असली परीक्षा अब शुरू होगी। शिक्षा का अर्थ मानसिक मजबूती से भी है। उन्होंने एक मेधावी छात्र का उदाहरण देते हुए कहा कि केवल शैक्षणिक उपलब्धियां जीवन में सफलता की गारंटी नहीं होतीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों से उबरने की क्षमता भी उतनी ही आवश्यक है, इसलिए बच्चों को मजबूत बनाना है। अभिभावकों को सिर्फ डिग्री और करियर तक बच्चों से अपेक्षा नहीं करनी है। जिला शिक्षा अधीक्षक ने मानसिक स्वास्थ्य को वर्तमान समय की बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा और अपेक्षाओं के दबाव के बीच मानसिक रूप से मजबूत रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में आज के युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, कौशल विकास और व्यक्तित्व निर्माण पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा। उन्होंने छात्रों से खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और अन्य पाठ्येतर कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की अपील की.
कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं: डॉ एसपी अग्रवाल
साईं नाथ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एसपी अग्रवाल ने कार्यक्रम में उपस्थित टॉपर्स को सफलता और व्यक्तिगत विकास के मूलमंत्र देते हुए कहा कि कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है, यहां तक कि प्रतिभा भी कड़ी मेहनत का विकल्प नहीं है। यदि कोई व्यक्ति प्रतिभाशाली है, तो वह समाज में एक औसत स्थान प्राप्त करेगा, लेकिन यदि वह मेहनती और प्रतिभाशाली दोनों है, तो वह महान ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। उन्होंने लता मंगेशकर और सचिन तेंदुलकर का उदाहरण देते हुए कहा कि यह बताता है कि मेहनत प्रतिभा से भी ऊपर है। उन्होंने आगे एकाग्रता की शक्ति बहुत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जैसे बचपन में लेंस से सूर्य की रोशनी को केंद्रित करके कागज जलाना। लेंस, सूर्य और कागज समान होते हैं, लेकिन एकाग्रता का अंतर परिणाम को बदल देता है। यदि कोई व्यक्ति अपनी ऊर्जा को एक बिंदु पर केंद्रित कर पाता है, तो वह वांछित परिणाम प्राप्त करेगा। यदि आप सोचते हैं कि आप कुछ कर सकते हैं या नहीं कर सकते, तो दोनों ही स्थितियों में आप सही हैं। जब आप सोचते हैं कि आप कर सकते हैं, तो आपका मन, शरीर और आत्मा उस दिशा में काम करते हैं ताकि वांछित लक्ष्य प्राप्त हो सके। जब आप कहते हैं कि मैं नहीं कर सकता, तो आप पहले ही हार मान चुके होते हैं। हमेशा अपनी शक्ति पर विश्वास रखें, क्योंकि आप स्वयं अपनी सीमाओं और लक्ष्यों का निर्धारण करते हैं। आपकी सफलता या असफलता केवल आप पर निर्भर करती है, कोई और इसके लिए जिम्मेदार नहीं है। यह दर्शाता है कि व्यक्ति की मानसिकता और आत्म-विश्वास उसके जीवन के परिणामों को सीधे प्रभावित करते हैं। उन्होंने शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण भाग चरित्र निर्माण को बताया। कहा कि जो डॉक्टर या इंजीनियर बनने से पहले एक अच्छा इंसान बनने पर जोर देता है। एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति जो समाज की निःशुल्क या आधे दर पर सेवा करता है, उसे भगवान का अवतार माना जाता है। व्यक्ति का चरित्र शिक्षा का आधार और परिणाम दोनों है। यह दर्शाता है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यावसायिक सफलता नहीं, बल्कि नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी भी है.
हृदय को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार, व्यायाम और नियमित जांच जरूरी: डॉ दीपक
हिन्दुस्तान प्रतिभा सम्मान समारोह में डॉ दीपक ने कहा कि हृदय संबंधी बीमारियों की रोकथाम के लिए संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लोगों को हृदय संबंधी आपात स्थितियों के लक्षणों की पहचान भी होनी चाहिए, ताकि समय रहते उपचार मिल सके। बताया कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार सीने में दर्द, बेचैनी, जलन, उल्टी या घबराहट जैसी समस्या महसूस हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईसीजी सहित अन्य जांचों के माध्यम से हृदय की वर्तमान स्थिति का आकलन किया जा सकता है। हृदय संबंधी समस्या की स्थिति में शीघ्र चिकित्सा सहायता मिलने से मरीज की जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है। स्वस्थ जीवनशैली पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि दैनिक भोजन की प्लेट का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा फल और सब्जियों से भरा होना चाहिए। शेष हिस्से में 25 प्रतिशत प्रोटीन और 25 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय भोजन में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है, इसलिए लोगों को धीरे-धीरे प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों जैसे पनीर, सोया, अंडा, छेना का सेवन बढ़ाना चाहिए। उन्होंने नियमित व्यायाम पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 30 से 40 मिनट तक शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग अधिक व्यायाम नहीं कर सकते, उन्हें प्रतिदिन कम से कम 7-8 हजार कदम चलने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसके अलावा नमक और चीनी के सीमित सेवन, तंबाकू एवं शराब से पूर्ण परहेज, प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की नींद और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ व्यक्तियों को भी वर्ष में कम से कम एक बार रक्तचाप, रक्त शर्करा और लिपिड प्रोफाइल जैसी बुनियादी जांच अवश्य करानी चाहिए। वहीं, बीपी और शुगर के मरीजों को नियमित रूप से दवा लेने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने की सलाह दी.
नेशनल टॉपर भव्या की सबने की तारीफ
सम्मान समारोह के दौरान एक खास पल आया जब मंच पर इस वर्ष 12वीं आर्ट्स की नेशनल टॉपर भव्या रंजन को सम्मानित किया गया। सभी अतिथियों ने भव्या को मंच पर सम्मानित किया। इस दौरान सभी ने उनकी मेहनत के लिए उन्हें बधाई दी। ऑक्सफोर्ड स्कूल की छात्रा रहीं भव्या रंजन ने बोर्ड परीक्षा में 99.8 प्रतिशत अंक हासिल कर नेशनल टॉपर बनीं थी.
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