सरायमीर, हिन्दुस्तान संवाद। मोहर्रम की छठीं के मौके पर सोमवार को सरायमीर और आसपास के क्षेत्रों में अकीदत और एहतराम के साथ मजलिसों और मातमी जुलूसों का आयोजन किया गया। विभिन्न इमामबारहों और अजाखानों में बड़ी संख्या में अजादारों ने शिरकत कर शोहदाएं कर्बला को खिराजे अकीदत पेश की। सरायमीर में मजलिस को संबोधित करते हुए प्रतापगढ़ से आए मौलाना सैय्यद मुंतजिर मेहंदी ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन और उनके वफादार साथियों ने दीन-ए-इस्लाम की हिफाजत और इंसानियत की सर बलंदी के लिए अपनी जानों की कुर्बानी पेश की। उन्होंने कहा कि कर्बला का पैगाम हर दौर के इंसान को ज़ुल्म और नाइंसाफी के खिलाफ डटकर खड़े होने, सब्र, कुर्बानी और भाईचारे का सबक देता है।
मीर हसन स्थित अजाखाना में होने वाली मजलिस को पढ़ते हुए मौलाना मोहम्मद आदिल ने अपने बयान में कहा कि मोहर्रम केवल गम मनाने का महीना नहीं, बल्कि इमाम हुसैन के मिशन और उनकी शिक्षाओं को अपनी जिंदगी में उतारने का भी संदेश देता है। इसी क्रम में निकामुद्दीनपुर मस्जिद से अलम के साथ मातमी जुलूस निकाले गए। जिनमें बड़ी संख्या में अजादारों, नौजवानों और बुजुर्गों ने हिस्सा लिया। इस दौरान नौहाख्वानी और मातम का सिलसिला जारी रहा और अजादारों ने शोहदाएं कर्बला की याद में पुरसा पेश किया।
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