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‘दुबई से भारत लौटते ही मुझे यहां के माहौल में एडजस्ट होने में कुछ दिन लग जाते हैं.’ एक भारतीय महिला CEO की यह बात सोशल मीडिया पर बड़ी बहस की वजह बन गई है. उनका कहना है कि हर भारतीय को जिंदगी में कम से कम एक बार विदेश जरूर जाना चाहिए, क्योंकि इससे अपने ही देश को देखने का नजरिया बदल जाता है.
यह पोस्ट फोबेट मीडिया की फाउंडर और CEO रिया उप्रेती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर की है. उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी ने अपना ऑफिस नोएडा से दुबई शिफ्ट कर दिया है. अब उन्हें अक्सर दुबई आना-जाना पड़ता है.
रिया ने लिखा कि हर बार भारत लौटने पर मुझे यहां के माहौल में ढलने में कुछ दिन लगते हैं. मेरा मानना है कि हर भारतीय को जिंदगी में कम से कम एक बार विदेश जरूर जाना चाहिए. इससे सोचने का नजरिया बदल जाता है.
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दुबई में ऐसा क्या दिखा?
रिया उप्रेती के मुताबिक, विदेश जाकर उन्हें यह एहसास हुआ कि अच्छी नागरिक सुविधाएं लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को कितना आसान बना देती हैं.
उन्होंने लिखा कि जब कोई साफ हवा, बिना लगातार हॉर्न के शोर, अच्छी सड़कें, पैदल चलने के लिए व्यवस्थित फुटपाथ और कूड़े से मुक्त सड़कें देखता है, तब समझ आता है कि एक नागरिक को कैसी बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए.
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उनका कहना है कि विदेश यात्रा यह भी एहसास कराती है कि भारत में बुनियादी सुविधाओं के मामले में अभी काफी काम किया जाना बाकी है.
सोशल मीडिया पर बंट गई राय
रिया की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं. एक यूजर ने लिखा कि जब तक लोग खुद नहीं बदलेंगे, तब तक देश भी नहीं बदलेगा.दूसरे यूजर ने कहा कि दुबई की सड़कें सिर्फ सरकार की वजह से साफ नहीं हैं, वहां के लोग भी गंदगी नहीं फैलाते.एक अन्य यूजर ने लिखा कि दुबई को छोड़िए, अगर कोई श्रीलंका के कोलंबो भी घूम आए, तो उसे फर्क साफ दिखाई देगा.एक अन्य यूजर ने दावा किया कि वियतनाम के कई छोटे शहर भी साफ-सफाई और ट्रैफिक अनुशासन के मामले में भारत से आगे हैं.
We moved our office to Dubai and I travel there frequently. Every time I come back to India, it takes me a few days to adjust again.
Every Indian should travel abroad at least once in their lifetime. It changes your perspective. When you experience clean air, no constant…
दूसरी तरफ क्या बोले लोग?
हालांकि, कई यूजर्स ने रिया उप्रेती की बात से असहमति भी जताई.
उनका कहना था कि भारत और दुबई की तुलना सीधे-सीधे करना सही नहीं है. दोनों देशों की आबादी, क्षेत्रफल, संसाधन और चुनौतियां बिल्कुल अलग हैं. कुछ लोगों ने यह भी लिखा कि भारत के कई शहर तेजी से बदल रहे हैं और साफ-सफाई, मेट्रो, एक्सप्रेसवे और सार्वजनिक सुविधाओं में लगातार सुधार हो रहा है.
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बहस सिर्फ दुबई की नहीं, सोच की भी है
रिया उप्रेती की पोस्ट ने सिर्फ भारत और दुबई की तुलना की बहस नहीं छेड़ी, बल्कि नागरिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े किए हैं. कई लोगों का मानना है कि बेहतर सड़कें और साफ शहर सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नागरिकों की आदतों पर भी निर्भर करते हैं.
वहीं कुछ लोगों का कहना है कि विदेश यात्रा इंसान को यह समझने का मौका देती है कि बेहतर ट्रैफिक व्यवस्था, साफ-सफाई और सार्वजनिक सुविधाएं कैसी हो सकती हैं. दूसरी ओर, कई लोग यह भी मानते हैं कि भारत जैसे विशाल और विविधता वाले देश की तुलना दुबई जैसे छोटे शहर-राज्य से करना पूरी तरह उचित नहीं है.
फिलहाल रिया उप्रेती की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है और भारत में बुनियादी सुविधाओं, नागरिक जिम्मेदारी और बेहतर शहरी व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ चुकी है.
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