खड़ी कार में खुला एयरबैग, मौत; इन 3 कारणों से हुआ होगा ऐसा! जिन पर अक्सर लोग ‘ध्यान ही नहीं देते’ – Live Hindustan

कार खरीदते वक्त ज्यादातर पैसेंजर उसकी सेफ्टी के बारे में जरूर चेक करते हैं। खासकर, कार में कितने एयरबैग हैं और उसे कितनी NCAP रेटिंग मिली है। इन दोनों बातों की डिटेल कंपनियां भी ग्राहकों को बताती हैं। अब सोचिए जिस एयरबैग का काम पैसेंजर की जान बचाने का होता है, वही जान का दुश्मन बन जाए तब क्या होगा? दरअसल, महाराष्ट्र के ठाणे में एक खड़ी कार में अचानक एयरबैग खुलने से 25 साल के कार डीलर की मौत हो गई। वो 15 साल पुरानी कार के अंदर बैठा था। तभी अचानक गाड़ी का सेफ्टी सिस्टम एक्टिव हो गया। एयरबैग इतनी तेजी से खुला कि उसके जोरदार झटके से उसकों गंभीर चोटें आईं और ज्यादा खून बहने से मौत हो गई।

अब सवाल ये उठता है कि कार को जो एयरबैग चलती कार का एक्सीडेंट होने के वक्त खुलता है, वो आखिरी खड़ी कार में कैसे खुल गया। इस हादसे ने एयरबैग वाली कारों की सेफ्टी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं? इतना ही नहीं, लोगों के मन में अब इस बात का डर भी है कि कहीं उनकी कार में भी इस तरह का हादसा नहीं हो जाए। ऐसे में इस एयरबैग के खुलने की वजह क्या हो सकती है, हम आपको यहां समझा रहे हैं।

₹ 46.41 – 55.27 लाख
₹ 1.79 – 1.82 करोड़
₹ 33.23 – 35.19 लाख
₹ 7.2 – 8.75 लाख
₹ 4.59 करोड़
₹ 2.47 करोड़

क्या होता है एयरबैग?
किसी भी कार की सेफ्टी फीचर्स की लिस्ट में एयरबैग सबसे जरूरी और अहम हिस्सा होता है। ये एक तरह का कॉटन का बना थैला होता है, जो मौके पर गुब्बारे की तरह फूल जाता है। जिस पर सिलिकॉन की कोटिंग होती है। कार की टक्‍कर होने एयरबैग को एक्टिवेट करने वाले सेंसर इसे कमांड देते हैं, जिससे खुल जाता है और लोगों को कार के अंदर सेफ्टी देता है। एयरबैग को कार स्टीयरिंग, पैसेंजर साइड डैशबोर्ड, सभी दरवाजों पर कर्टेन की तरह फिक्स किया जाता है। इनकी संख्या कार मॉडल के हिसाब से 2 से 15 तक हो सकती है।

खड़ी कार में आखिर क्यों खुला एयरबैग?
जिस खड़ी कार में एयरबैग खुला वो करीब 15 साल पुरानी बताई गई है। हालांकि, कार की फिटनेस पूरी तरह सही थी। उसका वैलिड फिटनेस सर्टिफिकेट था। माना जा रहा है कि जब कार में एयरबैग खुला तो उसकी स्पीड करीब 200 से 300 किमी/घंटा के बीच रही होगी। इतनी तेज स्पीड से एयरबैग खुलने के कारण ही पैसेंजर को तेज झटका लगा। क्योंकि कार खड़ी थी इस वजह से उसने सीट बेल्ट भी नहीं पहना था, जिसके चलते एयरबैग का पूरा जोर उसके चेहरे पर लगा। बाद में यही उसकी मौत का कारण बन गया। कार में अचाकन खुले एयरबैग के कुछ कारण हो सकते हैं, जैसे-

1. सेंसर का एक्टिव होना
एयरबैग की वर्किंग प्रोसेस उसके सेंसर से जुड़ी होती है। यानी एयरबैग को खुलन की कमांड सेंसर से मिलती है। तो हो सकता है कि कार के बंपर के नीचे इतनी तेजी से झटका लगा हो कि सेंसर एक्टिव हो गया और एयरबैग खुल गया।

2. कंट्रोल यूनिट में खराबी
कार को सरकारी डॉक्युमेंट में फिटनेस सर्टिफिकेट मिला था, लेकिन ये 15 साल पुरानी थी। ऐसे में कार के इंटरनली दी जाने वाली कंट्रोल यूनिट और सेंसर में खराबी आ सकती है। इस बात का पता तो फिटनेस टेस्ट में भी नहीं चलता।

3. वायरिंग में खराबी
देश के अंदर कई कारों के एक्सीडेंट की वजह उसकी वायरिंग में खराबी भी होती है। दरअसल, कई बार चूहे कारों की वायरिंग काट देते हैं, या फिर बाहरी एक्सेसरीज लगाने पर वायरिंग प्रोपर नहीं होती, इस वजह से शॉट सर्किट हो जाता है।

ऐसे काम करता है एयरबैग
कार के एयरबैग के साथ कुछ सेंसर को फिट किया जाता है। यानी जब कार में टक्कर लगती है तब सेंसर एक्टिव होकर एयरबैग को ओपन करने का इशारा करता है। ये काम माइक्रो सेकेंड में होता है। जैसे ही सेंसर से एयरबैग को कमांड मिलती है स्टेयरिंग के नीचे मौजूद इन्फ्लेटर एक्टिव हो जाता है। ये सोडियम एजाइड के साथ मिलकर नाइट्रोजन गैस बना देता है, जो एयरबैग में भर जाती है और वो फूल जाता है। इस फूले हुए बैग से पैसेंजर टकराता है और बच जाता है। इस प्रोसेस में 50 मिली सेकेंड का वक्त लगता है।

>> आपकी कार में 2, 4 या 6 एयरबैग हैं, लेकिन वो काम नहीं करते तब उनका होना भी नहीं होने जैसा हो जाएगा। ऐसी स्थिति में उनकी वर्किंग प्रोसेस को चेक करते रहना चाहिए। एयरबैग की वर्किंग कंडीशन के बारे में इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर से पता चल जाता है। जब भी आप कार स्टार्ट करते हैं तो कार का कम्प्यूटर एयरबैग को चेक करता है। कार स्टार्ट करते समय इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर को देखें।

>> यहां एयरबैग या SRS के साथ एक ह्यूमन लोगो में लाइट ऑन हो जाती है। कार के कम्प्यूटर द्वारा एयरबैग की जांच करने और उसे ठीक से काम करते पाए जाने पर यह बंद हो जाएगी। अब यदि ये लाइट बंद नहीं होती है और कार चलाते समय भी चलती रहती है, तो इसका मतलब है कि कार के एयरबैग सिस्टम में कोई समस्या है।

>> ऐसा हो तो इसे सर्विस सेंटर ले जाएं और तुरंत ठीक कराएं, क्योंकि यह सीधे तौर पर आपकी सेफ्टी से जुड़ा होता है। इसे आप खुद से रिपेयर नहीं कर सकते। इस बात का भी ध्यान रहे कि किसी लोकल मैकेनिक से इसे सही कराने की कोशिश नहीं करें। एयरबैग पर कंपनियों की लंबी वारंटी होती है। ऐसे में यदि इसमें खराबी आती भी है तब कंपनी इस फ्री में रिपेयर करेगी।

एयरबैग का सही रहना जरूरी
एयरबैग में जिस मटेरियल का यूज होता है वो एक टाइम के बाद खराब होने लगता है। वैसे, एयरबैग की फिटिंग और फंग्शन में जिन पार्ट्स का यूज किया जाता है वे खराब नहीं होते। एयरबैग में डाइग्नोस्टिक सिस्टम होता है। इसे SRS (सप्लीमेंटल रेस्ट्रेन्ट सिस्टम) भी कहते हैं। इसी की मदद से एयरबैग के सही होने का पता चलता है। हम जब कार स्टार्ट करते हैं, तो मीटर में लगे SRS इंडिकेटर्स कुछ सेकेंड के लिए ऑन होते हैं, अगर ये ऑन होने के बाद ऑफ नहीं होते तो एयरबैग में कोई प्रॉब्लम हो सकती है।

एयरबैग तोड़ सकता है हड्डी
कार में फ्रंट पैसेंजर वाली सीट पर भी सेफ्टी के लिए एयरबैग दिया है, इससे आपको सावधान रहना चाहिए। कुछ लोग बगल वाली सीट पर बैठकर रिलेक्स होने के लिए अपने पैर को डैशबोर्ड पर रख लेते हैं। वहीं, जब भी कार गड्ढे में जाती है तब पैर जम्प करते हुए बोर्ड पर टकराता है। ऐसे में सेंसर के एक्टिव होने का चांस बढ़ जाते हैं। एयरबैग जब ओपन होता है तब उसकी स्पीड 300 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है। यानी इतनी स्पीड से अगर ये आपके पैरों में टकराया तो सकता है कि पैर की हड्डी टूट भी सकती है। या फिर जान भी जा सकती है।

नरेंद्र जिझोतिया देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में अपनी लेखनी के लिए चर्चित नाम बन चुके हैं। गाड़ियों का रिव्यू, फर्स्ट राइडिंग इम्प्रेशन, कम्पेरिजन, सेल्स एनालिसिस, यूटिलिटी (DIY, How To Do) जैसे विषयों पर उनकी शानदार पकड़ है। अपने एक्सक्लूसिव कंटेंट को लेकर वो लगातार सुर्खियों में रहते हैं। ऑटो के लॉन्च इवेंट में अपने अलग एंगल के लिए भी उन्हें जाना जाता है। वे लाइव हिन्दुस्तान के साथ असिस्टेंट न्यूज एडिटर के तौर पर पिछले 4 सालों से भी लंबे समय से जुड़े हुए हैं। 2008 में जीवाजी यूनिवर्सिटी ग्वालियर से पत्रकारिता पूरी की। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने जी 24 घंटे छत्तीसगढ़ (रायपुर) में बतौर स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट के तौर पर की। 18 साल के लंबे करियर के दौरान वे बंसल न्यूज (भोपाल), दैनिक भास्कर डिजिटल (भोपाल) समेत 5 संस्थानों में काम कर चुके हैं। वे स्पोर्ट्स, बॉलीवुड, खबर जरा हटके, यूटिलिटी, बिजनेस, टेक्नोलॉजी, ऑटो समेत कई सेक्शन में काम कर चुके हैं। उन्हें दैनिक भास्कर में यूरेका अवॉर्ड, हाईफाइव अवॉर्ड, बेस्ट स्टोरी अवॉर्ड मिल चुका है। वहीं, लाइव हिन्दुस्तान में डिजी स्टार अवॉर्ड का सम्मान मिल चुका है। वे टीवी जर्नलिज्म के दौरान हॉकी मैच में लाइव कॉमेंट्री भी कर चुके हैं। उन्हें क्रिकेट खेलना, सिगिंग, साइकिलिंग पसंद है।
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