जयपुर में एयर पॉल्यूशन को कम करने के लिए मोबाइल वैन चलाई जा रही है। यह वैन शहर के अलग-अलग हिस्सों में घूमकर प्रदूषण कंट्रोल करती है। यह वैन आखिर काम कैसे करती है? इसे कहां बनाया गया? इन सभी सवालों पर भास्कर रिपोर्टर ने नगर निगम के अधिकारियों से बात क
नगर निगम के XEN गोपाल मुण्ड ने बताया- यह अत्याधुनिक वैन IIT खड़गपुर में विकसित टेक्नोलॉजी पर आधारित है। वैन को शहर के उन इलाकों में भेजा जाएगा, जहां वायु प्रदूषण का स्तर ज्यादा रहेगा। यह मशीन हवा में मौजूद प्रदूषक कणों (पॉल्यूटेंट पार्टिकल्स) को नियंत्रित करने का काम करेगी।
गोपाल मुण्ड ने बताया- वैन में खास तरह के स्प्रिंकलर (पानी की बूंदें फेंकने वाले यंत्र) लगाए गए हैं। इसमें आरओ का शुद्ध पानी भरा जाता है। यह पानी स्प्रिंकलर के जरिए बेहद महीन फुहार के रूप में हवा में छोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान हवा में मौजूद धूल और प्रदूषण के सूक्ष्म कण पानी के साथ नीचे बैठ जाते हैं। इससे वातावरण स्वच्छ होता है।
गोपाल मुण्ड ने बताया- इस तकनीक के माध्यम से हवा की गुणवत्ता में सुधार होने के साथ ऑक्सीजन स्तर को बेहतर बनाने में भी सहायता मिलती है।
जयपुर में घूम रही मोबाइल वैन की तस्वीरें…
55 लाख रुपए की है वैन
इस एयर पॉल्यूशन कंट्रोल मोबाइल वैन की कुल लागत करीब 55 लाख रुपए है। जीनस कंपनी ने ट्रायल के लिए यह मशीन शुरू की है। अगले एक साल तक वैन का संचालन, ड्राइवर की व्यवस्था और मशीन का रखरखाव कंपनी की ओर से किया जाएगा। इसकी निगरानी जयपुर नगर निगम करेगा। वैन किस क्षेत्र में संचालित होगी, इसका फैसला नगर निगम करेगा।
XEN गोपाल मुण्ड ने बताया- फिलहाल इस तकनीक का ट्रायल किया जा रहा है। अगर ट्रायल सफल रहता है तो भविष्य में ऐसी वैन की संख्या बढ़ाई जाएगी। साथ ही इस मॉडल को राजस्थान के अन्य शहरों और उत्तर भारत के दूसरे शहरों में भी लागू करने की योजना बनाई जा सकती है। इसका मकसद वायु प्रदूषण को प्रभावी तरीके से कम करना है। साथ ही लोगों को अधिक स्वच्छ और बेहतर गुणवत्ता वाली हवा उपलब्ध कराना है।
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