छत्रपति शिवाजी के योगदान को किया याद – Live Hindustan

गाजीपुर, संवाददाता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से रविवार को रायगंज स्थित माधवकुटी आश्रम में हिन्दू साम्राज्य दिनोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ छत्रपति शिवाजी महाराज, संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और सदाशिव राव गोलवलकर के चित्रों पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर हुआ। मुख्य वक्ता विभाग संघचालक सचिदानन्द ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में भारतीय संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा करते हुए हिन्दवी स्वराज की स्थापना की। उन्होंने बताया कि ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी के दिन वर्ष 1674 में रायगढ़ में शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था, जिसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिन्दू साम्राज्य दिनोत्सव के रूप में मनाता है। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए संगठित समाज की शक्ति से असंभव कार्यों को भी संभव बनाया। उन्होंने बताया कि संघ वर्षभर में छह प्रमुख उत्सव-वर्ष प्रतिपदा, हिन्दू साम्राज्य दिनोत्सव, गुरु पूजन, रक्षाबंधन, विजयदशमी और मकर संक्रांति-मनाता है। शिवाजी महाराज के आदर्श आज भी राष्ट्रभक्ति, संगठन और सांस्कृतिक चेतना के प्रेरणास्रोत हैं। इस अवसर पर जिला प्रचारक प्रभात, जिला संघचालक जयप्रकाश, नगर संघचालक सर्वजीत, चंद्र कुमार, अशोक, दीनदयाल, अखिलेश, अमित, देवसरन, नितिन, अंजनी, अभिषेक, रामकुमार, कृपाशंकर, संजय, विश्वमोहन, कृष्णा, दुर्गेश सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे। संचालन नगर कार्यवाह हर्ष ने किया.
पतार, हिन्दुस्तान संवाद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, बाराचवर खंड की ओर से रविवार को बाराचवर स्थित आरएस कॉन्वेंट स्कूल में हिन्दू साम्राज्य दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में विभाग संघचालक सच्चिदानन्द राय ने कहा कि ज्येष्ठ मास की त्रयोदशी को छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस दिन को हिन्दू साम्राज्य दिवस के रूप में मनाता है। उन्होंने कहा कि राजमाता जीजाबाई के संस्कारों और समर्थ गुरु रामदास के मार्गदर्शन ने शिवाजी महाराज के व्यक्तित्व को आकार दिया। मात्र 14 वर्ष की आयु से उन्होंने मुगल शासन का सामना शुरू किया और अपने अदम्य साहस, रणनीतिक कौशल तथा नेतृत्व क्षमता के बल पर अनेक किलों पर विजय प्राप्त कर हिन्दवी स्वराज की स्थापना की। आगरा में बंदी बनाए जाने के बाद भी उन्होंने अपनी सूझबूझ और साहस से वहां से निकलकर इतिहास रचा। सच्चिदानन्द राय ने कहा कि शिवाजी महाराज का जीवन संघर्ष, राष्ट्रभक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक है। सीमित संसाधनों और विषम परिस्थितियों में भी उन्होंने यह साबित किया कि दृढ़ संकल्प और संगठन की शक्ति से बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से शिवाजी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने ध्वज प्रणाम किया तथा ‘नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि’ गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर खंड कार्यवाह प्रवीण, सह खंड कार्यवाह रितेश सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में उपस्थित रहे।
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