तराई में सूखे आसमान तोड़ रहे किसानों की उम्मीदें – Live Hindustan

इटवा, हिन्दुस्तान संवाद। तराई के आंगन में मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जून माह समाप्त होने को है, लेकिन जिले में अब तक सामान्य से काफी कम बारिश होने से खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई प्रभावित हो रही है। खेतों में नमी की कमी और सिंचाई के साधनों की बदहाली ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। किसानों का कहना है कि जिन्होंने समय से धान की नर्सरी तैयार कर ली थी, अब रोपाई नहीं हो पाने से उनके बेहन खराब होने लगे हैं। प्रकृति की मार के साथ ही सिंचाई व्यवस्था भी किसानों का साथ नहीं दे रही है। इलाके से होकर गुजरने वाली अधिकांश नहरें सूखी पड़ी हैं, जबकि सरकारी नलकूप भी खस्ताहाल हैं। ऐसे में किसानों को निजी पम्पसेट के सहारे खेतों और नर्सरियों में पानी पहुंचाना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है。
राज्य कृषि मौसम केन्द्र के प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि जिले में एक जून से 28 जून तक औसतन 152.5 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन इस अवधि में केवल 36.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह सामान्य से करीब 76 फीसदी कम है।
किसान कौशल कुमार, राम कुमार, महेंद्र कुमार ने बताया कि भीषण गर्मी और बारिश न होने के कारण धान के बेहन को बचाए रखना चुनौती बन गया है। नर्सरी में हर तीसरे दिन सिंचाई करनी पड़ रही है। एक बीघा बेहन में औसतन पांच घंटे पानी लग रहा है, जिस पर निजी पम्पसेट से करीब 500 रुपये खर्च हो रहे हैं। वहीं, किराये पर सिंचाई कराने वाले किसानों को इससे लगभग दोगुना खर्च उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की रोपाई और उत्पादन दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिससे पूरे कृषि सत्र पर संकट गहरा जाएगा।
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