'एक्सक्लूसिव ग्रुपिंग बनाकर घेराबंदी स्वीकार नहीं', जापानी PM के भारत दौरे से चीन को हुई जलन! – AajTak

Feedback
जापान की पीएम सनाए तकाइची के भारत दौरे से चीन की जलन हुई है. चीन तुरंत इस दौरे पर अपनी आपत्तियां जाहिर करने लगा है. शुक्रवार को चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि देशों के बीच आपसी सहयोग का मकसद किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाना या किसी दूसरे देश के हितों को नुकसान पहुंचाना नहीं होना चाहिए. यह बयान भारत और जापान द्वारा जापानी प्रधानमंत्री सनाए तकाइची की दिल्ली यात्रा के दौरान कई अहम पहल शुरू करने के एक दिन बाद आया है. 
सनाए तकाइची को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छोटी बहन कहा है और जापान के साथ रिश्तों को प्राथमिकता दी है. 
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “देशों के बीच सहयोग ऐसा होना चाहिए जिससे क्षेत्रीय देशों के बीच समझ और भरोसा बढ़े और इलाके में शांति व स्थिरता बनी रहे.”
भारत-जापान की दोस्ती से चीन को टेंशन
गुओ जियाकुन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री के बीच बातचीत के बाद सप्लाई चेन को मज़बूत करने के लिए क्रिटिकल मिनरल्स पर भारत और जापान के बीच सहयोग से जुड़े एक सवाल का जवाब दे रहे थे. 
गुओ ने कहा, “इस तरह के सहयोग का मकसद किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाना या उसके हितों को नुकसान पहुंचाना नहीं होना चाहिए. और तो और, इसका इस्तेमाल एक्सक्लूसिव ग्रुपिंग बनाकर फूट और टकराव को बढ़ावा देने के बहाने के तौर पर भी नहीं किया जाना चाहिए.”
उन्होंने आगे कहा, “ग्लोबल इंडस्ट्रियल और सप्लाई चेन को सुरक्षित और स्थिर रखना सभी देशों की साझा ज़िम्मेदारी है. सभी पक्षों को खुलेपन और सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए और इस प्रक्रिया में रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए.”
मोदी और तकाइची के बीच शिखर वार्ता के बाद भारत और जापान ने गुरुवार को कई अहम पहलों का ऐलान किया. इनमें एक आर्थिक साझेदारी ढांचा, मिलिट्री हार्डवेयर को मिलकर बनाने के लिए रक्षा समझौता और तेल की कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए ऊर्जा संबंधों को मजबूत करने के कदम शामिल हैं. 
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ईस्ट चाइना सी और साउथ चाइना सी की स्थिति पर “गहरी चिंता” भी जताई. साथ ही, उन्होंने नेविगेशन की आजादी को खतरे में डालने वाले एकतरफा कदमों और ताकत के दम पर यथास्थिति बदलने की कोशिशों का विरोध किया. 
भारत यात्रा पर बीजिंग की पैनी नजर
जापानी प्रधानमंत्री की भारत यात्रा पर बीजिंग की पैनी नज़र थी. नवंबर 2025 में तकाइची ने एक बयान दिया था जिसके बाद जापान और चीन के रिश्ते कई सालों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे. पीएम तकाइची ने कहा था कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो जापान जवाब दे सकता है. 
चीन, ताइवान को अपना एक बागी प्रांत मानता है और ज़रूरत पड़ने पर उसे ज़बरदस्ती अपने नियंत्रण में लाना चाहता है. उनके बयानों पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी. 
चीन ने अपने व्यापारिक हितों को बढ़ाने के लिए जापान, अमेरिका, भारत और कई अन्य देशों को ‘रेयर अर्थ मिनरल्स’ के निर्यात पर सख्ती बरती, ताकि इनका इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया जा सके. 
दुनिया भर में ‘रेयर अर्थ’ खनिजों की माइनिंग का लगभग 70 प्रतिशत और इनकी प्रोसेसिंग का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा चीन के पास है. 
ये खनिज इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, पवन ऊर्जा, रक्षा उपकरणों और कई आधुनिक गैजेट्स के निर्माण के लिए बहुत जरूरी हैं. 
 
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News