बंगाल की तृणमूल कांग्रेस के बाद अब पंजाब कांग्रेस में भी टूट के आसार हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष न बनाए जाने से नाराज पूर्व सीएम और जालंधर सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने घर पर 4 विधायकों समेत 50 पार्टी नेताओं के साथ मीटिंग की।
MLA तृप्त राजिंदर बाजवा ने कहा कि सभी नेताओं ने चन्नी से कहा कि अमरिंदर राजा वड़िंग को प्रधान बनाए जाने पर वे हाईकमान से बात करें। सभी नेता इस फैसले से नाराज हैं और हाईकमान इस फैसले पर रिकंसीडर करे। इस बीच भाजपा के पंजाब प्रधान केवल ढिल्लों ने कहा कि चन्नी अगर BJP में आते हैं तो उनका स्वागत है।
चन्नी नाराज क्यों?
चन्नी की मीटिंग ये बड़े नेता पहुंचे MLA तृप्त राजिंदर बाजवा, बरनाला विधायक काला ढिल्लों, कपूरथला विधायक राणा गुरजीत, राजासांसी विधायक सुखबिंदर सिंह सरकारिया, पूर्व डिप्टी सीएम ओपी सोनी, पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू, गुरकीरत कोटली, पूर्व MLA गुरप्रीत कांगड़।
इनके अलावा नाजर सिंह मानशाहिया, पूर्व विधायक परमिंदर सिंह पिंकी, दविंदर सिंह घुबाया, यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष बरिंदर ढिल्लो, कमलजीत कड़वल और पूर्व सांसद मोहम्मद सदीक, पूर्व विधायक जोगगिंदर पाल, दिनेश बस्सी, दलबीर गोल्डी, पूर्व विधायक पिरमल सिंह और सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह।
पूर्व विधायक बोले- सभी को हाईकमान का फैसला मानना चाहिए
पूर्व विधायक कुलदीप सिंह वैद ने कहा कि हाईकमान ने जो फैसला दिया है, सभी नेताओं को उसे मानना चाहिए। पहले पंजाब में सरकार बनानी चाहिए। उसके बाद आगे की बात करनी चाहिए। नए वर्किंग प्रधान संगत सिंह गिलजियां ने कहा- अजय माकन की कमेटी की रिपोर्ट में चन्नी का नाम सबसे ऊपर था, लेकिन मैं पार्टी के साथ हूं।
कांग्रेस सांसद शाह से मिले, कहा- पहले से तय थी यह मुलाकात
गुरदासपुर से कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। वे भाजपा के राज्यसभा सांसद तरूण चुघ के साथ नजर आए। इस मुलाकात को उन्होंने पहले से तय बताया। कहा कि पंजाब की बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर अपना पक्ष रखा था।
चन्नी के शक्ति प्रदर्शन के 2 मकसद
1. वड़िंग हटाओ, कैप्टन की तरह प्रदेश प्रमुख बनाओ पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि पंजाब कांग्रेस में एक प्रचलन रहा है कि जो पार्टी प्रमुख होता है, वही सीएम बनता है। कैप्टन अमरिंदर सिंह दोनों बार चुनाव से पहले अध्यक्ष बनाए गए और जब पार्टी ने चुनाव जीता तो उन्हें ही सीएम बनाया गया।
2017 में जब कांग्रेस की सरकार आई तो इसी तरह कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी हाईकमान पर दबाव बनाया। जतब प्रताप बाजवा को प्रदेश प्रमुख पद से हटाया गया था। प्रदेश प्रमुख बनने का मतलब टिकट बंटवारे में उनकी चले और विधायक जीतकर आएं तो ज्यादातर उनके समर्थक हों और मुख्यमंत्री की कुर्सी का रास्ता साफ रहे।
चन्नी भी कैप्टन के रास्ते पर हैं। वह चाहते हैं कि हाईकमान उन्हें प्रदेश प्रमुख बनाए ताकि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो वड़िंग क्रेडिट न ले सकें।इसके बाद चन्नी सीएम कुर्सी पर भी दावा ठोक सकते हैं।
चन्नी गुट लंबे समय से राजा वड़िंग के विरोध में रहा है। पार्टी की इंटरनल मीटिंग हो या फिर हाईकमान के सामने सब जगह चन्नी राजा वड़िंग को फेल लीडर बता चुके हैं और उन्हें प्रदेश प्रमुख पद से हटाने की वकालत भी कर चुके हैं।
2. प्रदेश प्रमुख नहीं तो मुझे ‘सीएम चेहरा’ घोषित करो 2022 में नवजोत सिद्धू कांग्रेस के प्रदेश प्रमुख थे और चरणजीत चन्नी मुख्यमंत्री, इसीलिए तब हाईकमान पर दबाव डाला गया कि सीएम चेहरा घोषित करें। इसकी वजह ये थी कि प्रदेश प्रमुख सिद्धू थे और सीएम चन्नी। चन्नी पंजाब कांग्रेस के ट्रेंड से वाकिफ थे कि अगर सिद्धू की प्रदेश प्रमुखगी में चुनाव जीते तो सीएम कुर्सी मिलनी मुश्किल है।
इसलिए सिद्धू को उकसाया गया और अंदरूनी तौर पर चन्नी लॉबिंग करते रहे। फिर पहली बार कांग्रेस ने पंजाब में औपचारिक तौर पर चन्नी को सीएम चेहरा घोषित करना पड़ा। माना जा रहा है कि चन्नी उसी पैटर्न पर चल रहे हैं। वह चाहते हैं कि हाईकमान उन्हें प्रदेश प्रमुखगी की कुर्सी दे। अगर ऐसा नहीं होता तो चाहे राजा वड़िंग प्रदेश प्रमुख रहें लेकिन पिछली बार की तरह उन्हें CM चेहरा घोषित किया जाए।
पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि कांग्रेस जट्टसिखों को नाराज नहीं करना चाहती थी। इसलिए वड़िंग को नहीं हटाया। इसलिए चन्नी अब पार्टी हाईकमान पर उन्हें सीएम फेस घोषित करने का दबाव बना रहे हैं। चन्नी के पास समर्थक नेताओं की लंबी फौज है। ऐसे में समर्थकों और 31% दलित वोट बैंक के जरिए वह हाईकमान पर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे।
चन्नी की दोनों मांगें दरकिनार तो क्या रास्ता बचा? पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि चरणजीत चन्नी पहले तो कांग्रेस पर पूरा दबाव बनाएंगे कि या तो उन्हें अध्यक्ष बनाया जाए या फिर सीएम फेस घोषित किया जाए। अगर दोनों में से कुछ भी नहीं हुआ तो उनके पास प्लान बी है। प्लान बी के तहत वो अपने समर्थकों के साथ नई पार्टी का गठन कर सकते हैं।
अगर ऐसा हुआ तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान माना जाएगा। उनका कहनना है कि चन्नी के साथ एक बड़ा दलित वर्ग जुड़ा है। 2021 में उनके 111 दिन के कार्यकाल से भी अच्छी छवि बनी है। अगर चन्नी बगावत करते हैं या अलग पार्टी बनाते हैं, तो कांग्रेस के पारंपरिक दलित और गरीब तबके में मैसेज जाएगा कि उनके नेता की सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में यह वोट बैंक पूरी तरह से खिसक जाएगा, जिसका सीधा फायदा विरोधी दलों को मिलेगा।
चन्नी गुट के दिग्गज नेताओं का इस फैसले पर क्या रवैया चन्नी गुट के किसी भी नेता ने हाईकमान के फैसले पर कोई धन्यवाद नहीं किया। इनमें MLA राणा गुरजीत, MLA परगट सिंह, पूर्व डिप्टी सीएम ओपी सोनी, पूर्व MLA भारत भूषण आशू प्रमुख नेता हैं। कपूरथला से MLA राणा गुरजीत की एक रील भी सुर्खियों में है, जिसमें उन्होंने ‘पातशाही दा वा रखदे हां, खंडियां दी धार ते नचदे हां, सानू औंदा है बदला लैंणा’ सॉन्ग लगा रखा है।
इससे ये कयास लगाए जा रहे हैं कि वह भी चन्नी की लड़ाई में उनके साथ हैं। राणा गुरजीत ने 2022 में AAP की आंधी के बावजूद न केवल अपनी सीट जीती बल्कि अपने बेटे राणा इंदरप्रताप को भी सुल्तानपुर लोधी से निर्दलीय जिता दिया।
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