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आंध्र प्रदेश के पोलवरम से एक बेहद परेशान करने वाली तस्वीर सामने आई है. यहां के थेनेलामामीडी गांव में रहने वाले आदिवासी परिवार दशकों से पानी की गंभीर किल्लत से जूझ रहे हैं. ग्रामीणों को महज एक घड़ा पीने का पानी जुटाने के लिए रोज दो किलोमीटर लंबा खतरनाक रास्ता तय करना पड़ता है. इस मुश्किल सफर में उन्हें उफनती नदी को रस्सी के सहारे पार करना होता है, जिसमें हर वक्त जान का खतरा बना रहता है. प्रशासनिक अनदेखी से तंग आकर अब इन परिवारों ने मुख्यंमत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई है.
मारेडुमिल्ली मंडल के इस दूरदराज आदिवासी इलाके में पानी लाना किसी जंग जीतने जैसा है. पानी जुटाने की सबसे ज्यादा मार यहां की महिलाओं, बच्चों पर पड़ती है. गांव की महिलाओं ने बताया कि उन्हें उफनती हुई स्थानीय नदी को पार करने के लिए मजबूर होना पड़ता है. जब पानी का बहाव तेज होता है, तब वे रस्सी का सहारा लेकर किसी तरह नदी पार करती हैं. पूर्व में कई लोग इस तेज धारा में बह भी चुके हैं. महिलाओं, बच्चों पर सबसे ज्यादा बोझ
सालों से सुन रहे हैं सिर्फ आश्वासन
अपनी इस परेशानी को लेकर हाल ही में ग्रामीणों का एक दल जिला कलेक्टर दफ्तर पहुंचा था, लेकिन वहां उन्हें सिर्फ निराशा हाथ लगी. अधिकारियों ने ग्रामीणों को मुख्य इमारत के अंदर तक नहीं जाने दिया, बल्कि गेट पर ही उनसे मुलाकात की. अफसरों ने उनकी बात सरकार तक पहुंचाने का भरोसा तो दिया, मगर तुरंत राहत के लिए टैंकर जैसी कोई अस्थाई व्यवस्था नहीं की. ग्रामीणों का कहना है कि वे सालों से सिर्फ खोखले वादे ही सुन रहे हैं.
स्थानीय स्तर पर समाधान नहीं मिलने के बाद ग्रामीणों ने अपनी मांग सीधे बड़े नेतृत्व तक पहुंचाई है. उन्होंने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के साथ उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण को पत्र भेजकर गांव में सुरक्षित पेयजल की स्थायी व्यवस्था करने की अपील की है. ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि पाइपलाइन चाहिए ताकि रोज की यह मुश्किल हमेशा के लिए खत्म हो सके.
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