Saharsa News: सहरसा, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले के किसानों को उद्वह सिंचाई ।8 (लिफ्ट इरिगेशन)योजना के तहत जल्द ही सुविधा मिलने वाली है। हर खेत सिंचाई का कार्यक्रम तहत उद्ववह सिंचाई परियोजनाओं व्यवस्था का जीर्णोद्धार कार्य किया जाएगा। जिले के चार प्रखण्ड तहत लगभग 12 उद्ववह सिंचाई योजना का सर्वेक्षण किया गया है। जानकारी अनुसार हर उद्ववह सिंचाई योजना से लगभग 40 हेक्टेयर जमीन को सिंचाई किया जा सकता है।
लघु सिंचाई प्रमंडल सहरसा द्वारा हर खेत सिंचाई का कार्यक्रम अंतर्गत छूटी हुई योजनाओं के सर्वेक्षण कर प्रतिवेदन बनाया गया है। डीएम के अनुमोदन उपरांत प्रतिवेदन विभाग को भेजा जाएगा। विभाग से स्वीकृति मिलते ही उद्ववह सिंचाई योजनाओं का जीर्णोद्वार कराते किसानों को उनके खेत तक पानी पहुंचाया जाएगा। उद्वह सिंचाई में पानी को नहर या नदी से पंप द्वारा ऊपर उठाकर खेतों तक भेजा जाता है। पानी प्राकृतिक स्रोतों जैसे नदियाँ,व नहरों से आता है। इन स्रोतों से पानी को पंप या मोटरों के माध्यम से ऊंचे स्थानों पर बने खेतों तक भेजा जाता है। इसे लगाने की शुरुआती लागत अधिक हो सकती है, लेकिन बड़े क्षेत्रों पर सिंचाई करने से प्रति एकड़ खर्च कम आता है।
जिन क्षेत्रों की जमीन ऊंची-नीची या ढलान वाली होती है और मुख्य नहर का पानी खेतों तक नहीं पहुंच पाता, वहां इसका उपयोग होता है। उद्ववह सिंचाई नदी या नहर के पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है। जानकारी अनुसार यदि प्राकृतिक स्रोत में पानी नहीं है, तो उद्वह सिंचाई काम नहीं करेगी। जिससे यह किसानों के लिए उपयोगी नहीं होगा। इसके लिए प्राकृतिक स्रोत में पानी का रहना आवश्यक है।
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