राजीव रंजन झा,दरभंगा। एलएनएमयू के पीजी हिन्दी एवं उर्दू विभाग की ओर से नागार्जुन चेयर के संयुक्त तत्वावधान में हमारा समय : कबीर और नागार्जुन की विरासत विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार ने कहा कि कबीर और नागार्जुन हमारे सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गौरव हैं। दोनों महापुरुषों ने साहित्य और समाज को महत्त्वपूर्ण दिशा दी है। वे आज भी नवीन समाज रचना के लिए निश्चित ही पथ प्रदर्शक हैं। बीज वक्तव्य में प्रो. विजय कुमार ने कहा कि कई अर्थों में मध्यकाल संक्रमण का दौर था। उस दौर में कबीर ने भारतीय समाज को सम्भालने का काम किया है। ठीक इसी प्रकार नागार्जुन स्वातंत्र्योत्तर भारत की तमाम विद्रूपताओं से टकराते हुए समाज को सही दिशा देते हैं।
मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. पुनीता झा ने कहा कि कबीर और नागार्जुन को यह बात भी जोड़ती है कि दोनों ही जीवन पर्यन्त समाज के लिए समर्पित रहे। अपने साहित्य को इन्होंने सायास जीवनोपयोगी बनाया। प्रो. प्रभाकर पाठक ने कहा कि कबीर और नागार्जुन तमाम बाह्य दाबाबों के बावजूद कभी टूटे नहीं। कबीर और नागार्जुन हमारे समय के सर्वथा प्रासंगिक कवि हैं। प्रो. अजीत वर्मा ने कहा कि कबीर और नागार्जुन हमारे भीतर हैं। उन्हें काल और परिस्थितियां भारतीय मन से अपदस्थ नहीं कर सकती।
प्रो. चन्द्रभानु प्रसाद सिंह, डॉ. कुमार वरुण, प्रो. राजेन्द्र साह, डॉ. मंजरी खरे, डॉ. बिन्दु चौहान, डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सुमन, प्रो. इफ्तिखार अहमद, डॉ. महेश प्रसाद सिन्हा, डॉ. विनीता कुमारी, डॉ. ज्वालचंद्र चौधरी, डॉ. धर्मेन्द्र दास, डॉ. रश्मि आदि ने भी अपने विचार रखे।
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