Ethanol Petrol: केंद्र सरकार ने देश में प्योर पेट्रोल, E10 और E20 एक साथ बेचने से मना कर दिया है। अब देश में सिर्फ E20 ही स्टैंडर्ड पेट्रोल रहेगा जिसस …और पढ़ें
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ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पूरे भारत में Pure Petorl, E10 और E20 पेट्रोल बेचने की संभावना को खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि अलग-अलग तरह के पेट्रोल की बिक्री जारी रखने से लागत बढ़ जाएगी और इसे संभालने में बड़ी लॉजिस्टिकल चुनौतियां पैदा होंगी। 10 जुलाई को एक नोट में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने यह साफ किया है कि देश में E20 ही स्टैंडर्ड पेट्रोल ब्लेंड के रूप में जारी रहेगी।
मंत्रालय का कहना है कि भारत के फ्यूल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में 1 लाख से ज्यादा रिटेल आउटलेट्स शामिल हैं जिन्हें रिफाइनकी, टर्मिनल, डिपो, पाइपलाइन और स्टोरेज सुविधाओं का सपोर्ट मिलता है। इस पूरे नेटवर्क में पेट्रोल के तीन अलग-अलग ग्रेड्स को बनाए रखने के लिए अलग स्टोरेज, इंवेंट्री मैनेजमेंट और डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी। इससे रखरखाव की लागत बढ़ जाएगी और काम करने की क्षमता कम होगी।
सरकार ने प्रीमियम पेट्रोल के साथ इसकी तुलना को भी खारिज कर दिया। सरकार का कहना है कि प्रीमियम पेट्रोल एक खास प्रोडक्ट है जो बहुत कम मात्रा में बिकता है और इसके लिए नेशनवाइड फ्यूल सप्लाई चेन को अलग करने की जरूरत नहीं पड़ती है।
मंत्रालय ने कहा कि, भारत के Ethanol ब्लेंडिंग प्रोग्राम को बढ़ावा देने के लिए Ethanol उत्पादन में भारी निवेश किया गया है जिसमें डिस्टलरी, स्टोरेज सुविधाएं और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है। मंत्रालय अगर दोबारा E10 को स्टैंडर्ड पेट्रोल ब्लेंड बनाया गया तो Ethanol उत्पादन की क्षमता का पूरी इस्तेमाल नहीं हो पाएगा। इससे किसानों, कोऑपरेटिव्स और वित्तीय संस्थानों द्वारा किए गए निवेश पर बुरा असर पड़ सकता है।
अलग-अलग ग्रेड का पेट्रोल बेचने का सवाल उन पुराने वाहनों के मालिकों द्वारा उठाया गया है जिनकी गाड़ियां शुरुआत में E10 पेट्रोल पर चलने के लिए सर्टिफाइड की गई थीं। मंत्रालय के अनुसार, E20 पेट्रोल को लागू करने से पहले कार मैन्युफैक्चरर, पार्ट्स बनाने वाले सप्लायर्स, टेस्टिंग एजेंसियों और रिसर्च संस्थानों से सलाह ली गई थी।
इसके तहत, मटेरियल कंपैटिबिलिटी, इंजन कैलिब्रेशन, फ्यूल सिस्टम, टिकाऊपन, एमिशन और फ्यूल इकोनॉमी जैसे सभी चीजों की जांच की गई थी।
अपने फैसले के पक्ष में मंत्रालय ने Maruti और Hero Motocorp के फील्ड डेटा का हवाला दिया। मंत्रालय ने बताया कि, Maruti ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ गाड़ियों की सर्विसिंग की। इनमें 1.5 करोड़ पुरानी ऐसी गाड़ियां भी शामिल थीं जो शुरुआत में E20 पेट्रोल के लिए सर्टिफाइड नहीं थे।
इसके बावजूद, कंपनी को E20 पेट्रोल की वजह से जंग लगने, पार्ट्स के असामान्य रूप से घिसने या उनकी लाइफ खराब होने की कोई शिकायत नहीं मिली। Hero Motocorp ने भी अपने फील्ड डेटा में इसी तरह के अनुभव की जानकारी दी है।
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