Delhi News: मुंबई, एजेंसी। सियाचिन ग्लेशियर पर 42 साल पहले तिरंगा फहराने वाले सैन्य दल का नेतृत्व करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी (सेवानिवृत्त) का कहना है कि सियाचिन में भारत की मजबूत रणनीतिक उपस्थिति जरूरी है। इसे भारत की अखंडता और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कुलकर्णी ने जोर दिया कि भारत को इसे लेकर पाकिस्तान से बातचीत के झांसे में नहीं आना चाहिए। 1984 में दुर्गम-दुष्कर ऊंचाई पर स्थित सियाचिन ग्लेशियर पर भारतीय सेना के अभियान ‘ऑपरेशन मेघदूत’ की कमान संभालने वाले लेफ्टिनेंट जनरल कुलकर्णी पर्वतारोहियों के वार्षिक कार्यक्रम ‘गिरिमित्र सम्मेलन’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस बात पर आश्चर्य जताया कि 13 अप्रैल 1984 को शुरू हुआ यह अभियान आज भी जारी है।
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना का हर जवान सियाचिन में देश की सेवा करने में गर्व महसूस करता है।इस दौरान सियाचिन के महत्व पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भले ही 2003 से वहां युद्धविराम लागू है, लेकिन पाकिस्तान पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, पाकिस्तान को ‘आतंक का सौदागर’ करार देते हुए कहा कि हम बातचीत के जरिए सियाचिन का मसला हल नहीं कर सकते। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत-पाकिस्तान और चीन सीमा के इस संवेदनशील ‘ट्राई-जंक्शन’ पर स्थित सैन्य पोस्टों को किसी भी स्थिति में खाली नहीं किया जाना चाहिए। कहा कि इन ऊंचाइयों को खोने का मतलब देश की सुरक्षा को खतरे में डालना होगा।
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