केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की UDISE+ रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में 1.15 करोड़ छात्रों में से लगभग 45.5% 12वीं कक्षा तक पहुंचने से पहले ही स्कूल छोड़ देत …और पढ़ें
सांकेतिक तस्वीर।
गुजरात में 45.5% छात्र 12वीं से पहले छोड़ते स्कूल।
माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर राष्ट्रीय औसत से अधिक।
राज्य में कई स्कूल एकल-शिक्षक या छात्र-विहीन हैं।
डिजिटल डेस्क, गांधीनगर। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी साल 2025-26 की यूडाइस प्लस (UDISE+) रिपोर्ट में गुजरात की स्कूली शिक्षा को लेकर कुछ चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 53425 स्कूलों में 1.15 करोड़ छात्र रजिस्टर्ड हैं, लेकिन कक्षा 12वीं तक केवल 54.5% बच्चे ही अपनी पढ़ाई पूरी कर पाते हैं। इसका मतलब यह है कि करीब 45.5% छात्र स्कूल बीच में ही छोड़ देते हैं।
लड़कियों का प्रदर्शन लड़कों से बेहतर स्कूल में टिके रहने (रिटेंशन) के मामले में गुजरात का औसत (54.5%) राष्ट्रीय औसत (51.9%) से थोड़ा बेहतर है। इसमें लड़कों का रिटेंशन रेट 53% और लड़कियों का 56.2% है।
रिपोर्ट बताती है कि शुरुआती पढ़ाई में तो 100% बच्चे स्कूल में टिके रहते हैं, लेकिन मिडिल स्कूल (कक्षा 6 से 8) में यह आंकड़ा घटकर 90.4% हो जाता है और माध्यमिक स्तर (हाई स्कूल) पर इसमें भारी गिरावट आती है। गुजरात में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉप-आउट (स्कूल छोड़ने की) दर 12.5% है, जो कि 7% के राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा है।
बता दें कि गुजरात में प्रति स्कूल औसतन 7 शिक्षक हैं, जो राष्ट्रीय औसत के बराबर है। हालांकि, राज्य में हर 29 छात्रों पर एक शिक्षक (29:1) है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 24 छात्रों पर एक शिक्षक का है।
इसके अलावा राज्य में 58 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी छात्र नहीं है, लेकिन वहां 74 शिक्षक कार्यरत हैं। (देशभर में ऐसे 5663 स्कूल और 20667 शिक्षक हैं)। इतना ही नहीं गुजरात के 2335 स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जिनमें कुल 80053 छात्र पढ़ रहे हैं।